महाराष्ट्र के पुणे शहर स्थित ऐतिहासिक शनीवार वाडा में एक वीडियो के वायरल होने के बाद विवाद खड़ा हो गया है। इस वीडियो में मुस्लिम महिलाओं को शनीवार वाडा के ऊपरी मंजिल पर नमाज अदा करते हुए देखा गया। वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद हिंदू संगठनों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया और इस मामले में राजनीतिक विवाद भी पैदा हो गया। भारतीय जनता पार्टी (BJP) की राज्यसभा सांसद मेधा कुलकर्णी ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर इस वीडियो को पोस्ट किया और इसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। उन्होंने इसे भारतीय इतिहास और धरोहर का अपमान बताते हुए विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया।
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वीडियो के वायरल होने के बाद बवाल
वीडियो में छह से सात मुस्लिम महिलाएं शनीवार वाडा के ऊपर की मंजिल पर चटाई बिछाकर नमाज पढ़ रही हैं, जबकि आसपास बच्चे खेल रहे हैं और पर्यटक घूम रहे हैं। यह वीडियो सोशल मीडिया पर फैलने के बाद बहस का विषय बन गया और देखते ही देखते यह राजनीतिक मुद्दा बन गया। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के एक अधिकारी ने पुणे पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, और उन महिलाओं के खिलाफ मामला दर्ज किया गया, जिनकी पहचान अभी तक नहीं हो पाई है।
भारी विरोध प्रदर्शन और शुद्धिकरण की कार्रवाई
वीडियो वायरल होने के बाद, रविवार को बीजेपी सांसद मेधा कुलकर्णी और उनके समर्थकों ने शनीवार वाडा के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन में ‘पतित पावन संगठन’ और ‘हिंदू सकल समाज’ जैसे हिंदू संगठनों के लोग भी शामिल हुए। विरोध के दौरान, इन संगठनों के कार्यकर्ताओं ने शनीवार वाडा को ‘शुद्ध’ करने के उद्देश्य से गौमूत्र छिड़का और ‘शिव वंदना’ की। उनका मानना था कि यहां नमाज अदा करने से ऐतिहासिक स्थल की पवित्रता को ठेस पहुंची है।
विरोध के दौरान, कुछ हिंदू संगठन कार्यकर्ताओं ने शनीवार वाडा के पास स्थित हजरत ख्वाजा सय्यद दरगाह के आसपास भी विरोध जताने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें बल प्रयोग से रोक दिया। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें भी हुईं, जिनमें कई लोग घायल हो गए। इस घटना के बाद से इलाके में तनाव का माहौल बना हुआ है।
राजनीतिक विवाद का रूप लेना
शनीवार वाडा पर नमाज अदा करने को लेकर विवाद ने अब एक राजनीतिक मोड़ ले लिया है। महाराष्ट्र के सत्ताधारी महायुति गठबंधन में शामिल दोनों दलों, एकनाथ शिंदे की शिवसेना और अजित पवार की एनसीपी ने बीजेपी सांसद मेधा कुलकर्णी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग की है। उनका आरोप है कि कुलकर्णी ने इस घटना को हिंदू-मुस्लिम रंग देकर समाज में विघटन फैलाने की कोशिश की है।
वहीं दूसरी तरफ, बीजेपी सांसद मेधा कुलकर्णी ने संवाददाताओं से कहा कि यह घटना दुर्भाग्यपूर्ण है और शनीवार वाडा नमाज अदा करने का स्थान नहीं है। उन्होंने प्रशासन से इस मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की है। पुलिस उपायुक्त कृषिकेश रावले ने भी इस मामले पर बयान दिया और कहा कि यह स्थान भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधीन आता है, और मामले की जांच की जा रही है।
शनीवार वाडा का ऐतिहासिक महत्व
शनीवार वाडा, जो 1736 में पेशवाओं द्वारा निर्मित एक 13 मंजिला महल था, पुणे के इतिहास और संस्कृति का एक अहम हिस्सा है। यह महल पेशवा शासन का केंद्र था और पुणे शहर की पहचान के रूप में स्थापित हुआ। हालांकि, 1828 में एक बड़ी आग के कारण महल नष्ट हो गया, लेकिन अब यहां केवल किले की दीवारें और विशाल दरवाजे ही बचे हैं। शनीवार वाडा अब एक ऐतिहासिक स्थल के रूप में पर्यटकों के लिए एक प्रमुख आकर्षण बना हुआ है।
इस ऐतिहासिक स्थल पर नमाज अदा करने की घटना ने इसे एक संवेदनशील मुद्दा बना दिया है, क्योंकि यह स्थल भारतीय सांस्कृतिक धरोहर का हिस्सा है। हिंदू संगठनों का आरोप है कि इस तरह के धार्मिक आयोजन ऐतिहासिक स्थल की पवित्रता को भंग करते हैं।
सामाजिक और धार्मिक सद्भाव पर असर
यह विवाद न केवल पुणे में बल्कि पूरे महाराष्ट्र में धार्मिक और सांस्कृतिक विवाद का कारण बन गया है। धार्मिक स्थलों पर विभिन्न धार्मिक गतिविधियों को लेकर यह बहस एक बड़ी समस्या बन सकती है। यह घटना समाज में धार्मिक सौहार्द बनाए रखने के लिए एक चुनौती बन गई है।
सभी धार्मिक स्थलों को समान रूप से सम्मान देने की आवश्यकता है। हालांकि, ऐतिहासिक स्थलों पर धार्मिक गतिविधियों को लेकर विभिन्न मत हैं। कुछ लोग मानते हैं कि ऐतिहासिक स्थलों को सांस्कृतिक और धार्मिक गतिविधियों से मुक्त रखा जाना चाहिए, जबकि दूसरों का मानना है कि इन स्थानों पर सभी धर्मों के अनुयायी अपने धार्मिक कर्तव्यों को निभा सकते हैं।
शनीवार वाडा पर नमाज अदा करने के वीडियो ने न केवल पुणे बल्कि महाराष्ट्र और पूरे देश में एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। इस घटना से यह स्पष्ट होता है कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों पर धार्मिक गतिविधियों को लेकर संवेदनशीलता बनाए रखना आवश्यक है। राजनीतिक नेताओं और समाज के लोगों को इस मुद्दे पर संयम बनाए रखते हुए सामूहिकता और सहिष्णुता की भावना को बढ़ावा देना चाहिए।
मामले की जांच जारी है, और पुलिस के अधिकारियों ने इस मुद्दे को उचित तरीके से सुलझाने का आश्वासन दिया है। यह घटना समाज में धार्मिक ताना-बाना बनाए रखने की जरूरत को और भी अधिक महत्वपूर्ण बनाती है।
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