राष्ट्रगीत ‘वंदेमातरम्’ के 150 साल पूरे होने के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अवसर पर आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में संबोधित करते हुए कहा कि ‘वंदेमातरम्’ केवल एक गीत नहीं था, बल्कि यह क्रांतिकारियों का स्वर बन गया था। इस गीत ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को प्रेरित किया और यह आजाद भारत की सोच और सपना भी प्रस्तुत किया। पीएम मोदी ने कहा कि वंदेमातरम् ने हमें आत्मविश्वास और साहस दिया, साथ ही यह दिखाया कि कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है।
‘वंदेमातरम्’ का महत्व
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि वंदेमातरम् शब्द न केवल हमारे वर्तमान को आत्मविश्वास से भरता है, बल्कि यह हमें यह विश्वास भी देता है कि हम किसी भी चुनौती का सामना कर सकते हैं। यह गीत केवल स्वतंत्रता का प्रतीक नहीं था, बल्कि इसने करोड़ों भारतीयों के सामने एक सपना प्रस्तुत किया था कि आज़ादी के बाद भारत कैसे होगा। प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर पर ‘वंदेमातरम्’ की असाधारण यात्रा को याद किया और बताया कि जब यह गीत पहली बार बंगाल पत्रिका में प्रकाशित हुआ, तब कुछ लोगों को यह सिर्फ एक साधारण गीत ही प्रतीत हुआ था। लेकिन वक्त के साथ, यह गीत स्वतंत्रता संग्राम का आवाज़ बन गया और हर क्रांतिकारी के होंठों पर गूंजने लगा।
वंदेमातरम् की उत्पत्ति
‘वंदेमातरम्’ के शब्दों को बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने 1870 के दशक में लिखा था। यह गीत उनका एक कवि रचनात्मक कार्य था जो उन्होंने अपनी काव्य रचना आनंदमठ में शामिल किया था। जब इस गीत को पहली बार 1882 में प्रकाशित किया गया, तो यह एक साधारण गीत के रूप में था, लेकिन समय के साथ, यह स्वतंत्रता संग्राम के महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक गीतों में बदल गया। यह गीत एक शक्ति और साहस का प्रतीक बन गया, जो भारतीयों को विदेशी शासन के खिलाफ संघर्ष करने के लिए प्रेरित करता था।
वंदेमातरम् और स्वतंत्रता संग्राम
प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी बताया कि कैसे ‘वंदेमातरम्’ ने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान भारतीयों को एकजुट किया। यह गीत एक राष्ट्रीय ध्वज की तरह था, जो भारतीयों के दिलों में एकता और प्रेरणा की भावना पैदा करता था। जब यह गीत गाया जाता था, तो यह भारतीयों को स्वतंत्रता की ओर अग्रसर होने के लिए प्रेरित करता था। वंदेमातरम्, क्रांतिकारियों की आवाज़ बनकर हर भारतीय के दिलों में गूंजने लगा। यह गीत न केवल स्वतंत्रता संग्राम का प्रतीक बन गया, बल्कि इसने भारत के भविष्य की तस्वीर भी उकेरी कि स्वतंत्र भारत कैसा होगा।
वंदेमातरम् का ऐतिहासिक योगदान
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वंदेमातरम् ने भारतीयों के दिलों में एक गहरी भावना पैदा की। यह गीत भारत के स्वतंत्रता संग्राम में एक प्रेरणास्त्रोत बन गया और इसे प्रत्येक क्रांतिकारी ने गाया। वंदेमातरम् ने न केवल हमें स्वतंत्रता दिलाई, बल्कि एक साथ एक राष्ट्र बनने की भावना भी दी। यह गीत एक अद्वितीय शक्ति का प्रतीक बन गया, जो भारतीयों को अपने हक के लिए संघर्ष करने का हौसला देता था। इस गीत की गूंज स्वतंत्रता संग्राम से लेकर आज तक हमारे देश में सुनाई देती है।
आज़ादी के बाद वंदेमातरम् की भूमिका
पीएम मोदी ने यह भी कहा कि आज़ादी के बाद वंदेमातरम् का अर्थ और महत्व और भी बढ़ गया। यह गीत सिर्फ इतिहास का हिस्सा नहीं रहा, बल्कि यह आज भी भारतीयों के दिलों में गूंजता है और एकता और समृद्धि का संदेश देता है। वंदेमातरम् ने हर भारतीय को यह अहसास कराया कि हमें मिलकर अपने देश को एक मजबूत और आत्मनिर्भर बनाना है। प्रधानमंत्री ने वंदेमातरम् की इस यात्रा को याद करते हुए कहा कि यह गीत न केवल उस समय के संघर्षों का प्रतीक था, बल्कि आज भी यह हमें हमारे कर्तव्यों और जिम्मेदारियों की याद दिलाता है।
150 साल की यात्रा: वंदेमातरम् का प्रभाव
प्रधानमंत्री मोदी ने वंदेमातरम् के 150 साल पूरे होने के इस ऐतिहासिक अवसर पर कहा कि यह दिन हमें इस गीत की असाधारण यात्रा को याद करने का मौका देता है। वंदेमातरम् का महत्व केवल एक गीत के रूप में नहीं बल्कि एक प्रेरणास्त्रोत के रूप में है, जिसने भारतीयों के दिलों में स्वतंत्रता संग्राम के दौरान और बाद में भी अपनी गहरी छाप छोड़ी। मोदी ने कहा कि यह गीत भारतीय समाज के विभिन्न वर्गों को एकजुट करता है और उन्हें एक लक्ष्य की ओर अग्रसर करता है।
प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर यह भी बताया कि वंदेमातरम् का इतिहास हमें यह सिखाता है कि किसी भी राष्ट्र के लिए अपने आदर्शों और मूल्यों को बनाए रखना कितना महत्वपूर्ण है। वंदेमातरम् ने यह दिखाया कि संघर्ष और समर्पण के साथ कोई भी लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है, और यही आज़ादी की वास्तविक भावना है।
वंदेमातरम् के 150 साल पूरे होने का अवसर हमारे लिए एक याद दिलाने वाला पल है। यह गीत केवल हमारे स्वतंत्रता संग्राम का प्रतीक नहीं, बल्कि यह भारतीय संस्कृति, एकता और सम्मान का भी प्रतीक है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शब्दों में, वंदेमातरम् ने हमें अपनी मातृभूमि से सच्ची निष्ठा और प्रेम का एहसास कराया। इस दिन को हम केवल एक गीत की सालगिरह के रूप में नहीं, बल्कि उन सपनों और संघर्षों की याद के रूप में मनाते हैं, जिन्होंने हमें आज़ादी दिलाई और एक मजबूत राष्ट्र बनाने की दिशा दिखाई।
Read this article in
KKN लाइव WhatsApp पर भी उपलब्ध है, खबरों की खबर के लिए यहां क्लिक करके आप हमारे चैनल को सब्सक्राइब कर सकते हैं।
Share this:
- Click to share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp
- Click to share on Facebook (Opens in new window) Facebook
- Click to share on X (Opens in new window) X
- Click to share on LinkedIn (Opens in new window) LinkedIn
- Click to share on Threads (Opens in new window) Threads
- Click to share on Telegram (Opens in new window) Telegram
