Home Bihar बिहार चुनाव 2025 : महिलाओं का मतदान में उमड़ा जोश

बिहार चुनाव 2025 : महिलाओं का मतदान में उमड़ा जोश

बिहार में लोक आस्था का महापर्व छठ के तुरंत बाद लोकतंत्र के महान उत्सव में महिलाओं का उत्साह चरम पर था। पहले चरण के चुनाव में महिलाओं की भागीदारी ने न केवल समाज की राजनीतिक जागरूकता को दर्शाया, बल्कि यह भी दिखाया कि महिलाएं अब अपने अधिकारों का पूरी तरह से अहसास करने लगी हैं। मतदान के दिन, तेज धूप के बावजूद, महिलाएं मतदान के लिए लंबी कतारों में खड़ी थीं, जिनमें बुजुर्ग महिलाएं और पहली बार मतदान करने वाली युवतियों का जोश देखने लायक था।

मतदान के पहले चरण में महिलाओं का उत्साह

चुनाव के पहले चरण में, जब सुबह की ठंडी धूप के बीच मतदान की प्रक्रिया शुरू हुई, तब भी महिलाओं का उत्साह कम नहीं हुआ। खासकर बुजुर्ग महिलाएं और पहली बार वोट करने वाली युवतियां इस मौके पर बहुत खुश नजर आईं। इन महिलाओं के चेहरे पर लोकतंत्र के इस महान पर्व का हिस्सा बनने की खुशी साफ झलक रही थी। बक्सर में एक परिवार की तीन पीढ़ियों ने एक साथ मतदान किया, जो अन्य मतदाताओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बना। अस्थावां के बिंद आदर्श मध्य विद्यालय में 80 वर्षीय परदादी मुंद्रिका देवी ने अपने बेटे की दुकान बंद कर, चार पीढ़ियों के 18 सदस्यों के साथ मतदान किया। यह दृश्य इस बात का गवाह था कि लोकतांत्रिक अधिकारों का सम्मान केवल उम्र का मोहताज नहीं है।

बड़े जोश के साथ मतदान

भोजपुर के बड़हरा विधानसभा क्षेत्र के मतदान केंद्रों पर महिलाओं की भारी भीड़ देखी गई। सुबह से ही महिलाएं वोट डालने के लिए पहुंचने लगीं, और वोटिंग का उत्साह कई जगहों पर पुरुषों से भी ज्यादा नजर आया। मुंगेर जिले में, सुबह सात बजे से ही मतदाताओं की लंबी कतारें लग गईं। खासतौर पर जमालपुर के अग्रहण पंचायत के बूथ पर 104 वर्षीय बजरंगी सिंह और उनकी 95 वर्षीय पत्नी पार्वती देवी ने अपने मतदान का अधिकार निभाया। यह दृश्य न केवल मतदान के महत्व को दर्शाता था, बल्कि यह भी बताता था कि उम्र किसी भी लोकतांत्रिक प्रक्रिया में रुकावट नहीं बन सकती।

वहीं, हरनौत के बस्ती गांव की 96 वर्षीय सावित्री देवी ने व्हील चेयर पर बैठकर मतदान किया और उन्हें डीडीसी श्रीकांत कुंडलिक खांडेकर की मदद से मतदान केंद्र तक पहुंचाया गया। यह घटना दिखाती है कि वृद्धावस्था के बावजूद, महिलाओं की लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भागीदारी उनके अधिकारों के प्रति जागरूकता का प्रमाण है।

महिलाएं घर के काम निपटाकर वोट डालने पहुंचीं

सारण जिले में भी कई मतदान केंद्रों पर महिलाओं की कतारें पुरुषों से लंबी देखी गई। बक्सर में महिला मतदाताओं में मतदान के प्रति एक अलग जुनून देखा गया। दल्लुपुर के मतदान केंद्र पर 80 वर्षीय शांति देवी ने अपने पुत्र दिलीप मिश्रा और सुरक्षाकर्मी की मदद से मतदान किया। इसी तरह, गोपालगंज के बैकुंठपुर में, दोपहर 12 बजे के बाद, सभी बूथों का नजारा बदल गया। चूल्हा-चौका निपटाकर बड़ी संख्या में महिलाएं मतदान केंद्रों पर पहुंची और मतदान में भाग लिया। यह दृश्य न केवल महिलाओं के मतदान के प्रति बढ़ते उत्साह को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि महिलाएं अपने घरेलू कार्यों को पूरा करने के बाद भी लोकतंत्र के इस पर्व का हिस्सा बन रही हैं।

बिहार चुनाव के पहले चरण में मतदान का रिकॉर्ड

पहले चरण के मतदान में बिहार ने रिकॉर्ड वोटिंग दर्ज की। इस दौरान महिलाओं की भागीदारी में एक उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने इस पहले चरण के मतदान के बाद ट्वीट किया और मतदाताओं के उत्साह का धन्यवाद किया। उन्होंने लिखा, “भारत निर्वाचन आयोग में पूर्ण विश्वास व्यक्त करने और इतनी बड़ी संख्या में उत्साह और जोश के साथ मतदान करने के लिए मतदाताओं का आभार है। पूरी पारदर्शिता और समर्पण के साथ काम करने के लिए पूरी चुनाव मशीनरी को भी धन्यवाद।” यह संदेश चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता और मतदाताओं के लोकतांत्रिक अधिकारों के प्रति जागरूकता को दर्शाता है।

महिलाओं की बढ़ती भागीदारी

बिहार चुनाव में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी यह संकेत देती है कि राज्य में महिला मतदाता अब अपनी शक्ति को महसूस कर रही हैं। यह न केवल उनके लोकतांत्रिक अधिकार का सम्मान है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि महिलाएं अब राजनीति में भी अपनी भागीदारी बढ़ा रही हैं। चुनावों में उनकी भागीदारी से यह स्पष्ट होता है कि महिलाएं अब न केवल घर के कामों में, बल्कि समाज की राजनीतिक गतिविधियों में भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।

यह बदलाव दिखाता है कि बिहार में महिलाएं केवल घरेलू दायित्वों को ही नहीं, बल्कि समाज की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों को भी अपना रही हैं। महिलाओं की बढ़ती राजनीतिक भागीदारी से यह साबित होता है कि वे समाज और देश की विकास प्रक्रिया में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।

7 नवंबर 2025 के बिहार चुनाव के पहले चरण में महिलाओं ने जिस तरह से मतदान में भाग लिया, उसने यह सिद्ध कर दिया कि वे अब लोकतंत्र का सक्रिय हिस्सा बन चुकी हैं। तेज धूप, लंबी कतारें और उम्र के बावजूद, महिलाओं ने मतदान केंद्रों पर आकर लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा बनना जरूरी समझा। उनकी यह भागीदारी समाज में महिलाओं के बढ़ते राजनीतिक जागरूकता को दर्शाती है। महिलाओं की इस नई सोच और सक्रिय भूमिका से यह स्पष्ट हो रहा है कि भविष्य में चुनावी राजनीति में उनकी और अधिक महत्वपूर्ण भूमिका होगी।

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