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हिमाचल प्रदेश के मंडी में बादल फटने से बाढ़ का कहर, दो की मौत, रेस्क्यू ऑपरेशन जारी

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हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में सोमवार रात भारी बारिश और बादल फटने की घटना ने तबाही मचा दी। इस प्राकृतिक आपदा में दो लोगों की मौत हो गई, जबकि कई इलाकों में हालात चिंताजनक बने हुए हैं। तेज बारिश के कारण आए फ्लैश फ्लड ने मंडी शहर और आसपास के क्षेत्रों में जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है।

भारी बारिश से शहर में बाढ़ जैसे हालात

मंडी शहर में रातभर हुई मूसलधार बारिश के बाद सुबह बाढ़ जैसी स्थिति बन गई। निचले इलाकों में पानी भर गया और कई वाहन कीचड़ और गड्ढों में फंस गए। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में देखा जा सकता है कि सड़कों पर खड़े वाहन पानी में आधे डूबे हुए हैं। कुछ वीडियो में सड़क किनारे बहते हुए पानी और लोगों की परेशानियां स्पष्ट दिखाई दे रही हैं।

नगर निगम आयुक्त का बयान

मंडी नगर निगम के आयुक्त रोहित राठौर ने जानकारी दी कि भारी बारिश के चलते ऊपरी क्षेत्रों से मलबा और पानी निचले इलाकों में जमा हो गया, जिससे बाढ़ की स्थिति बनी। उन्होंने बताया कि राहत और बचाव कार्य लगातार जारी है। जेल रोड के पास नुकसान की खबर मिलने पर टीम को मौके पर भेजा गया। अब तक दो शव बरामद किए जा चुके हैं और कुछ अन्य लोगों की तलाश की जा रही है।

जोनल अस्पताल की पहुंच हुई बंद

जिला मंडी का जोनल अस्पताल भी इस आपदा की चपेट में आ गया है। अस्पताल तक जाने वाली मुख्य सड़क पानी भर जाने के कारण बंद हो गई है, जिससे मरीजों और कर्मचारियों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल प्रशासन ने स्थिति को गंभीर बताते हुए प्रशासन से तत्काल सहायता की मांग की है।

ट्रैफिक और रेस्क्यू में बाधा

भूस्खलन और जलभराव के चलते मंडी जिले के कई हिस्सों में यातायात बाधित हो गया है। रास्ते बंद हो जाने के कारण राहत सामग्री और मेडिकल सुविधाएं पहुंचाने में भी कठिनाई हो रही है। स्थानीय पुलिस, होम गार्ड और एनडीआरएफ की टीमों को राहत कार्य में लगाया गया है। प्रभावित इलाकों में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है।

मानसून की मार और बढ़ती तबाही

20 जुलाई से शुरू हुए मानसून के बाद से हिमाचल प्रदेश में तबाही का सिलसिला थमा नहीं है। अभी तक पूरे प्रदेश में 90 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और करीब 35 लोग लापता हैं। मंडी जिला सबसे ज्यादा प्रभावित रहा है, जहां सबसे अधिक जानमाल की हानि हुई है। राज्य सरकार के अनुसार अब तक लगभग ₹1523 करोड़ का नुकसान हो चुका है।

बाढ़ से निपटने के लिए प्रशासन की कवायद

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने अतिरिक्त बलों की तैनाती की है। राहत शिविर स्थापित किए गए हैं और जरूरतमंदों को खाने-पीने का सामान, दवाइयां और कपड़े वितरित किए जा रहे हैं। वहीं जिन इलाकों में और अधिक खतरा है, वहां के लोगों को अस्थायी शिविरों में स्थानांतरित किया जा रहा है।

जलवायु परिवर्तन और कमजोर इन्फ्रास्ट्रक्चर की चुनौतियां

मंडी में आई इस बाढ़ ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जलवायु परिवर्तन के चलते अब हिमालयी क्षेत्र अधिक संवेदनशील होते जा रहे हैं। बादल फटना और फ्लैश फ्लड जैसी घटनाएं अब आम हो गई हैं। खराब ड्रेनेज सिस्टम और अव्यवस्थित शहरीकरण ने इस संकट को और गहरा कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अब समय आ गया है कि राज्य सरकारें आपदा प्रबंधन की योजनाओं को और सशक्त करें।

सामाजिक संगठनों और नागरिकों की पहल

सरकारी प्रयासों के साथ-साथ कई गैर-सरकारी संगठन और स्थानीय लोग भी राहत कार्यों में जुटे हैं। सोशल मीडिया पर सहायता के लिए अपील की जा रही है और फंडिंग कैम्पेन भी शुरू किए गए हैं। दानदाता लोगों से ड्राई राशन, पानी, दवाइयां और गर्म कपड़े जैसे जरूरी सामान उपलब्ध कराने की अपील की जा रही है।

आने वाले दिनों का पूर्वानुमान

मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में और बारिश की चेतावनी जारी की है। लोगों को सतर्क रहने और अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी गई है। प्रशासन ने सभी जिलों में आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर सक्रिय कर दिए हैं ताकि किसी भी स्थिति में तत्काल सहायता पहुंचाई जा सके।

मंडी में बादल फटने से उत्पन्न बाढ़ ने एक बार फिर दिखा दिया कि प्राकृतिक आपदाओं के सामने तैयारी ही एकमात्र सुरक्षा है। प्रशासन राहत कार्यों में जुटा है लेकिन पुनर्वास और पुनर्निर्माण की राह लंबी और चुनौतीपूर्ण होगी। ऐसे समय में सरकार, स्थानीय संस्थाएं और आम नागरिक मिलकर इस संकट से उबर सकते हैं।

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