यूपी बोर्ड की इंटरमीडिएट परीक्षा 2026 में शामिल हो रहे छात्र-छात्राओं की प्रायोगिक परीक्षाएं शनिवार से शुरू हो गई हैं। पूरे प्रदेश में विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर प्रयोगात्मक परीक्षाएं आयोजित की जा रही हैं। इस बार बोर्ड ने अंकों की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए digital प्रक्रिया को और सख्त बनाया है।
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अंकों के अपलोड में किसी भी तरह की गड़बड़ी की आशंका को खत्म करने के उद्देश्य से बोर्ड ने नई व्यवस्था लागू की है। इसके तहत प्रायोगिक परीक्षा के अंक मोबाइल एप के माध्यम से दो बार अपलोड किए जाएंगे। बोर्ड का मानना है कि इससे error की संभावना पूरी तरह समाप्त हो जाएगी।
मोबाइल एप में संशोधन, दो चरणों में होंगे अंक अपलोड
इस वर्ष बोर्ड ने अपने मोबाइल एप में जरूरी संशोधन किए हैं। संशोधित व्यवस्था के तहत परीक्षक को प्रायोगिक परीक्षा के अंक दो चरणों में दर्ज करने होंगे। यह प्रक्रिया अंकों के verification के लिए अनिवार्य की गई है।
बोर्ड सचिव भगवती सिंह ने पिछले वर्ष पहली बार मोबाइल के जरिए प्रायोगिक अंकों को ऑनलाइन अपलोड करने की व्यवस्था शुरू की थी। उस समय एहतियात के तौर पर ऑफलाइन अंकों की भी मांग की गई थी, ताकि किसी तकनीकी समस्या की स्थिति में अंकों की सुरक्षा बनी रहे।
पिछले वर्ष की सफलता के बाद पूरी तरह online प्रक्रिया लागू
पिछले वर्ष online और offline दोनों व्यवस्थाओं के सफल संचालन के बाद बोर्ड ने इस साल पूरी तरह online प्रक्रिया लागू कर दी है। अब परीक्षकों को केवल मोबाइल एप के माध्यम से ही अंक अपलोड करने होंगे। ऑफलाइन अंक जमा करने की आवश्यकता समाप्त कर दी गई है।
नई व्यवस्था में किसी भी तरह की गड़बड़ी रोकने के लिए अंकों को दो बार दर्ज करना अनिवार्य किया गया है। बोर्ड का कहना है कि इससे किसी भी तरह की human error या तकनीकी गलती तुरंत पकड़ में आ जाएगी।
एक समूह में अधिकतम 80 परीक्षार्थियों के अंक होंगे दर्ज
परीक्षक मोबाइल एप पर लॉग-इन करने के बाद अपने आवंटित परीक्षार्थियों के समूह का चयन करेंगे। एक बार में अधिकतम 80 परीक्षार्थियों के अंक दर्ज किए जा सकेंगे। पहले चरण में अंक भरने के बाद डेटा सबमिट किया जाएगा।
इसके बाद सिस्टम स्वतः उसी समूह के लिए दूसरी बार अंक अपलोड करने की विंडो खोलेगा। परीक्षक को पुनः वही अंक दर्ज करने होंगे। यह प्रक्रिया accuracy सुनिश्चित करने के लिए बनाई गई है।
mismatch होने पर सुधार का मिलेगा अवसर
यदि पहले और दूसरे चरण में अपलोड किए गए अंकों में कोई mismatch पाया जाता है, तो सिस्टम दोनों प्रविष्टियों को स्क्रीन पर दिखाएगा। इसके बाद परीक्षक को गलत प्रविष्टि सुधारने का अवसर दिया जाएगा।
जब तक दोनों बार दर्ज किए गए अंक समान नहीं होंगे, सिस्टम डेटा स्वीकार नहीं करेगा। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि किसी भी प्रकार की त्रुटिपूर्ण प्रविष्टि को अंतिम रूप से दर्ज नहीं किया जाएगा।
परीक्षा केंद्र पर geo-location verification अनिवार्य
प्रायोगिक परीक्षा की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए geo-location verification को भी अनिवार्य किया गया है। कंप्यूटर शिक्षक विश्वनाथ मिश्र के अनुसार, परीक्षक के लॉग-इन करते ही सिस्टम वर्तमान location का मिलान पहले से दर्ज location से करेगा।
यदि दोनों स्थानों के बीच की दूरी तय सीमा के भीतर होगी, तभी प्रायोगिक परीक्षा की अनुमति मिलेगी। इससे यह सुनिश्चित होगा कि परीक्षक परीक्षा केंद्र पर मौजूद रहकर ही अंक अपलोड कर रहे हैं। यह monitoring व्यवस्था को मजबूत करता है।
online माध्यम से दर्ज कर सकेंगे शिकायत और सुझाव
बोर्ड ने परीक्षकों के लिए online शिकायत और सुझाव दर्ज करने की सुविधा भी शुरू की है। परीक्षक आधिकारिक वेबसाइट upmsp.edu.in पर जाकर अपने user ID और password से लॉग-इन कर सकेंगे।
लॉग-इन करने के बाद एक विशेष बॉक्स में वे अपनी शिकायत या सुझाव लिख सकते हैं। वैकल्पिक रूप से, वे अपनी शिकायत या अवलोकन कागज पर लिखकर उसे स्कैन कर browser के माध्यम से अपलोड भी कर सकते हैं।
शिकायत दर्ज करने में location verification नहीं होगा जरूरी
शिकायत या सुझाव दर्ज करने की प्रक्रिया में location verification लागू नहीं किया गया है। परीक्षक किसी भी स्थान से अपने सुझाव या शिकायत दर्ज कर सकते हैं। इसके लिए केवल valid login credentials होना आवश्यक है।
बोर्ड ने आश्वासन दिया है कि सभी शिकायतों और सुझावों की गंभीरता से समीक्षा की जाएगी। confidentiality बनाए रखते हुए आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
प्रायोगिक अंकों की accuracy पर बोर्ड का विशेष जोर
बोर्ड अधिकारियों का कहना है कि प्रायोगिक अंक छात्रों के अंतिम परिणाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। किसी भी प्रकार की गलती छात्रों के भविष्य को प्रभावित कर सकती है। इसी कारण इस वर्ष verification प्रक्रिया को और मजबूत किया गया है।
परीक्षकों को नई व्यवस्था से संबंधित दिशा-निर्देश पहले ही उपलब्ध करा दिए गए हैं। तकनीकी सहायता के लिए support टीम भी सक्रिय रहेगी।
digital सुधारों से परीक्षा प्रणाली होगी मजबूत
यूपी बोर्ड लगातार अपनी परीक्षा प्रणाली में digital सुधार कर रहा है। online प्रक्रिया से paperwork कम हुआ है और transparency बढ़ी है। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले समय में और भी तकनीकी बदलाव किए जाएंगे।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि दोहरी verification व्यवस्था से परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बढ़ेगी। यदि व्यवस्था का सही पालन हुआ, तो 2026 की प्रायोगिक परीक्षाएं बिना किसी विवाद के संपन्न होंगी।
बोर्ड का लक्ष्य है कि इस वर्ष परिणाम पूरी तरह error-free तैयार किए जाएं। नई व्यवस्था को उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।



