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BRABU मुजफ्फरपुर में छात्राओं की फीस माफ, SC/ST छात्रों को भी राहत

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बाबासाहेब भीवराव अंबेडकर बिहार यूनिवर्सिटी मुजफ्फरपुर (BRABU) ने छात्राओं के लिए बड़ी राहत की घोषणा की है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्नातक और स्नातकोत्तर की सामान्य पाठ्यक्रमों में पढ़ाई कर रही छात्राओं की फीस माफ करने का निर्णय लिया है। इस संबंध में बुधवार देर शाम आधिकारिक अधिसूचना जारी की गई।

रजिस्ट्रार प्रो. समीर कुमार शर्मा ने बताया कि यह फैसला वर्ष 2015 में राज्य सरकार द्वारा लिए गए संकल्प के निर्देशों के अनुरूप लिया गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह निर्णय केवल सामान्य पाठ्यक्रमों पर लागू होगा। Vocational Course में पढ़ने वाले छात्रों को इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा।

छात्राओं के अलावा अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के छात्रों को भी फीस से छूट दी गई है। इस निर्णय से बड़ी संख्या में छात्रों को आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है।

हजारों छात्रों को मिलेगा आर्थिक लाभ

BRABU में स्नातक की पढ़ाई के लिए लगभग 20 हजार रुपये फीस देनी होती है। वहीं स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में पांच से छह हजार रुपये तक शुल्क लिया जाता है। फीस माफी के बाद पात्र छात्राओं और SC/ST छात्रों को यह राशि नहीं देनी होगी।

विश्वविद्यालय का यह कदम Higher Education को बढ़ावा देने की दिशा में अहम माना जा रहा है। आर्थिक कारणों से पढ़ाई छोड़ने वाले छात्रों के लिए यह फैसला सहायक साबित हो सकता है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों की छात्राओं के लिए यह निर्णय महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

विश्वविद्यालय प्रशासन ने सभी अंगीभूत और संबद्ध कॉलेजों को निर्देश जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पात्र छात्रों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत लाभ दिया जाएगा।

सामान्य पाठ्यक्रमों तक सीमित रहेगा लाभ

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह Fee Waiver केवल सामान्य शैक्षणिक पाठ्यक्रमों पर लागू होगा। व्यावसायिक या व्यावसायिक प्रकृति के कोर्स इसमें शामिल नहीं हैं। यह व्यवस्था राज्य सरकार के संकल्प के अनुरूप लागू की जा रही है।

छात्रों से कहा गया है कि वे आवश्यक दस्तावेज कॉलेज स्तर पर जमा करें। पात्रता की जांच के बाद ही शुल्क माफी का लाभ दिया जाएगा।

कॉपी जांच भुगतान की फाइलें गायब, प्रशासन में हलचल

एक ओर जहां फीस माफी से छात्रों को राहत मिली है, वहीं दूसरी ओर विश्वविद्यालय प्रशासन एक नई समस्या से जूझ रहा है। कॉपी मूल्यांकन से संबंधित भुगतान की फाइलें गायब होने का मामला सामने आया है। इन फाइलों में शिक्षकों के लाखों रुपये के बिल लंबित हैं।

स्नातक और पीजी परीक्षा की कॉपियों की जांच के बाद शिक्षकों ने अपने भुगतान के बिल जमा किए थे। लेकिन अब वे फाइलें नहीं मिल रही हैं। इससे शिक्षकों में नाराजगी बढ़ गई है।

सूत्रों के अनुसार जिस कर्मचारी को बिल की फाइल सौंपी गई थी, उसने फाइल अपने पास होने से इनकार किया है। वहीं अकाउंट शाखा का कहना है कि फाइल उसी कर्मचारी को दी गई थी। इस विरोधाभास ने प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

रजिस्ट्रार प्रो. समीर कुमार शर्मा ने कहा है कि मामले की जांच की जा रही है। दोषी की पहचान कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

शिक्षकों में नाराजगी, भुगतान अब भी लंबित

कॉपी मूल्यांकन का भुगतान नहीं होने से कई शिक्षक असंतोष जता रहे हैं। शिक्षकों का कहना है कि उन्होंने पहले भी भुगतान के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन को पत्र लिखा था। इसके बावजूद अब तक भुगतान नहीं हुआ है।

दिसंबर में विश्वविद्यालय ने संबद्ध कॉलेजों के शिक्षकों के बकाया बिल का भुगतान किया था। लेकिन अंगीभूत कॉलेजों के शिक्षकों का भुगतान अभी भी लंबित है। इससे शिक्षकों में असंतोष की स्थिति बनी हुई है।

शिक्षकों का मानना है कि समय पर भुगतान Academic System की विश्वसनीयता के लिए जरूरी है। मूल्यांकन कार्य विश्वविद्यालय की परीक्षा प्रणाली का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

पेंशन फाइलें भी नहीं मिल रहीं

सूत्रों ने बताया कि केवल मूल्यांकन भुगतान की फाइलें ही नहीं, बल्कि कई पेंशन फाइलें भी गायब हैं। जिन कर्मचारियों की पेंशन फाइल नहीं मिल रही है, उन्हें अनुमान के आधार पर भुगतान किया जा रहा है।

वरिष्ठ अधिकारियों को इस पूरे मामले की जानकारी दे दी गई है। प्रशासनिक स्तर पर दस्तावेज प्रबंधन व्यवस्था की समीक्षा की जा सकती है।

प्रशासन पर बढ़ा दबाव

BRABU में एक तरफ Fee Waiver का निर्णय सकारात्मक संदेश दे रहा है। दूसरी ओर फाइलों के गायब होने की घटना ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।

विश्वविद्यालय प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि जल्द ही स्थिति स्पष्ट की जाएगी। छात्रों और शिक्षकों दोनों की समस्याओं का समाधान प्राथमिकता पर किया जाएगा।

कुल मिलाकर BRABU मुजफ्फरपुर में यह समय महत्वपूर्ण फैसलों और प्रशासनिक चुनौतियों का है। जहां छात्राओं और SC/ST छात्रों को बड़ी राहत मिली है, वहीं लंबित भुगतान और फाइल प्रबंधन का मुद्दा भी गंभीर बना हुआ है। आने वाले दिनों में इस मामले पर आगे की कार्रवाई पर सभी की नजर रहेगी।

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