बिहार सरकार की स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना राज्य के युवाओं के लिए उच्च शिक्षा का बड़ा सहारा बनी है। इस योजना के माध्यम से आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन मेधावी छात्रों को पढ़ाई के लिए सरकारी लोन दिया जाता है। छात्र किसी भी मान्यता प्राप्त कॉलेज या विश्वविद्यालय में नामांकन लेकर पढ़ाई कर सकते हैं।
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योजना का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पैसों की कमी शिक्षा में बाधा न बने। बीते वर्षों में इस योजना से लाखों छात्रों को लाभ मिला है। इसके बावजूद अब loan repayment को लेकर गंभीर चिंताएं सामने आई हैं। सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती डिफॉल्टर छात्रों की बढ़ती संख्या है।
ब्याज माफी से छात्रों को मिली राहत
राज्य सरकार ने छात्रों का वित्तीय बोझ कम करने के लिए बड़ा निर्णय लिया। वर्ष 2018 के बाद स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड के तहत लोन लेने वाले छात्रों को interest waiver दिया गया। जिन छात्रों ने पहले ही ब्याज सहित किस्तें चुका दी थीं, उन्हें राशि वापस नहीं की जाएगी।
हालांकि, जिन छात्रों पर केवल मूलधन बाकी है, उनसे अब ब्याज नहीं लिया जाएगा। इस फैसले से छात्रों को loan repayment में काफी राहत मिली है। पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी तलाश रहे युवाओं के लिए यह कदम मददगार साबित हुआ।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार राज्य में कुल 3,89,363 छात्रों का ब्याज माफ किया गया है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में छात्र अब भी लोन लौटाना शुरू नहीं कर सके हैं।
62 हजार से अधिक छात्र अभी भी डिफॉल्टर
ब्याज माफी के बाद भी 62,436 छात्रों ने loan repayment शुरू नहीं की है। इसे लेकर प्रशासन की चिंता बढ़ गई है। ऐसे सभी छात्रों की पहचान जिला स्तर पर की जा चुकी है।
डिफॉल्टर छात्रों की सूची जिला निबंधन सह परामर्श केंद्र द्वारा तैयार की गई है। सरकार की योजना है कि जनवरी के अंत तक सभी 38 जिलों में इनके खिलाफ certificate case दर्ज किए जाएं। जरूरत पड़ने पर एफआईआर की कार्रवाई भी हो सकती है।
सरकार का मानना है कि सख्ती से ही योजना में अनुशासन कायम किया जा सकता है। इससे अन्य छात्रों को भी समय पर भुगतान का संदेश जाएगा।
Patna में सबसे ज्यादा डिफॉल्टर
राजधानी पटना की स्थिति सबसे ज्यादा चिंताजनक बताई जा रही है। यहां 6,938 छात्रों ने अब तक लोन लौटाने की प्रक्रिया शुरू नहीं की है। यह संख्या राज्य में सबसे अधिक है।
Bihar State Financial Corporation के अनुसार पटना जिले में करीब 5,000 छात्रों को स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड के तहत लोन दिया जा चुका है। शेष आवेदनों की जांच अभी चल रही है।
अधिकारियों का कहना है कि pending applications को भी तेजी से निपटाया जा रहा है। पटना में बढ़ते डिफॉल्ट को देखते हुए निगरानी और काउंसलिंग बढ़ाई जा रही है।
किन छात्रों को मिलता है स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड लोन
स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना का लाभ केवल बिहार के स्थायी निवासियों को मिलता है। इसके लिए छात्र का बिहार से इंटर पास होना अनिवार्य है। योजना का फोकस उन छात्रों पर है, जो पढ़ाई में अच्छे हैं लेकिन आर्थिक रूप से कमजोर हैं।
लोन केवल मान्यता प्राप्त संस्थानों में पढ़ाई के लिए दिया जाता है। इससे यह सुनिश्चित किया जाता है कि राशि का उपयोग सही उद्देश्य के लिए हो। सरकार समय-समय पर संस्थानों की जांच भी करती है।
loan repayment की शर्तें स्पष्ट
योजना के तहत loan repayment की शर्तें पहले से तय हैं। पढ़ाई पूरी होने के एक वर्ष बाद से लोन चुकाना जरूरी होता है। यह समय छात्रों को नौकरी या आय का साधन खोजने का मौका देता है।
यदि किसी छात्र ने चार लाख रुपये तक का लोन लिया है, तो उसे दस साल में मूलधन चुकाना होगा। इससे कम राशि लेने वालों के लिए सात साल की अवधि तय है। इन नियमों का उद्देश्य repayment को आसान बनाना है।
अधिकारी लगातार छात्रों को समय पर भुगतान के लिए प्रेरित कर रहे हैं। इससे योजना लंबे समय तक चल सकेगी।
online application और सत्यापन प्रक्रिया
स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के लिए आवेदन पूरी तरह online application प्रक्रिया के तहत होता है। छात्रों को आवेदन के समय सभी जरूरी दस्तावेज अपलोड करने होते हैं। इससे प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहती है।
दस्तावेजों का सत्यापन बैंक और शिक्षा विभाग द्वारा किया जाता है। सत्यापन पूरा होने के बाद ही लोन स्वीकृत होता है। इसके बाद छात्र को स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड जारी किया जाता है।
आवश्यक दस्तावेजों में आधार कार्ड, पैन कार्ड, शैक्षणिक प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र और कॉलेज का fee structure शामिल है।
परामर्श केंद्रों से बढ़ाई जा रही जागरूकता
राज्य सरकार ने विभिन्न जिलों में परामर्श केंद्र स्थापित किए हैं। यहां छात्रों और उनके अभिभावकों को loan repayment और शर्तों की जानकारी दी जाती है। इन केंद्रों के माध्यम से awareness बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।
अधिकारियों का मानना है कि सही जानकारी से डिफॉल्ट की स्थिति कम हो सकती है। परिवारों को भी भुगतान प्रक्रिया में सहयोग करने की सलाह दी जाती है।
सख्ती और सहयोग के बीच संतुलन
बिहार सरकार का कहना है कि स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना एक कल्याणकारी पहल है। लेकिन सार्वजनिक धन की सुरक्षा भी जरूरी है। इसलिए डिफॉल्टर छात्रों के खिलाफ सख्त कार्रवाई पर विचार किया जा रहा है।
सरकार का उद्देश्य दंड देना नहीं, बल्कि repayment सुनिश्चित करना है। यदि समय पर लोन लौटाया गया, तो योजना का लाभ आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचेगा।
योजना की सफलता repayment पर निर्भर
स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना ने बिहार में उच्च शिक्षा के रास्ते खोले हैं। इसने हजारों युवाओं को आगे बढ़ने का मौका दिया है। interest waiver जैसे फैसलों से छात्रों को बड़ी राहत मिली है।
अब सबसे बड़ी चुनौती है loan repayment को समय पर पूरा कराना। यदि छात्र जिम्मेदारी निभाते हैं, तो यह योजना और मजबूत होगी। इससे युवाओं में financial discipline भी विकसित होगा।



