Home Bihar बिहार प्रशासन ने निजी स्कूलों की मनमानी पर लगाम कसी ; अब...

बिहार प्रशासन ने निजी स्कूलों की मनमानी पर लगाम कसी ; अब यूनिफॉर्म और किताबें कहीं से भी खरीदी जा सकती हैं।

बिहार में निजी स्कूलों द्वारा यूनिफॉर्म, किताबों, जूतों और स्टेशनरी के नाम पर की जा रही अवैध वसूली पर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। लंबे समय से अभिभावकों की शिकायत थी कि कई निजी स्कूल उन्हें तय दुकानों से ही सामग्री खरीदने के लिए बाध्य कर रहे हैं। इन दुकानों पर सामान सामान्य market दर से कहीं अधिक कीमत पर बेचा जा रहा था।

प्रशासन के अनुसार, कुछ स्कूल प्रबंधन और विक्रेताओं के बीच आपसी सांठगांठ के कारण यह व्यवस्था चल रही थी। इसका सीधा असर अभिभावकों की जेब पर पड़ रहा था। शिक्षा के नाम पर बढ़ते खर्च से परिवारों में असंतोष और आक्रोश बढ़ रहा था। हालात की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने हस्तक्षेप किया।

तय दुकानों से खरीद की बाध्यता पर पूर्ण प्रतिबंध

जांच में सामने आया कि कई निजी स्कूल अभिभावकों पर दबाव बना रहे थे। उन्हें केवल स्कूल द्वारा बताए गए विक्रेताओं से ही किताबें और यूनिफॉर्म खरीदने के निर्देश दिए जाते थे। खुले बाजार से खरीदी गई सामग्री को स्वीकार नहीं किया जाता था। कई मामलों में परोक्ष दबाव की भी शिकायतें मिलीं।

इस व्यवस्था के कारण किताबें, जूते और ड्रेस कई गुना महंगे दामों पर बेचे जा रहे थे। अभिभावकों का कहना था कि मना करने पर बच्चों को परेशानी का सामना करना पड़ता था। इस स्थिति ने शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए।

गरीब और मध्यम वर्ग पर बढ़ा आर्थिक बोझ

इस अवैध वसूली का सबसे अधिक असर गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों पर पड़ा। हर शैक्षणिक सत्र की शुरुआत में खर्च अचानक बढ़ जाता था। पहले से अधिक स्कूल फीस के साथ अतिरिक्त सामग्री की लागत ने परिवारों को आर्थिक रूप से कमजोर किया।

कई अभिभावकों ने बताया कि बच्चों की पढ़ाई जारी रखने के लिए उन्हें उधार लेना पड़ा। घर के जरूरी खर्चों में कटौती करनी पड़ी। सामाजिक स्तर पर भी नाराजगी बढ़ती जा रही थी। प्रशासन ने इसे गंभीर सामाजिक समस्या के रूप में लिया।

धारा 163 के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश लागू

जिला प्रशासन ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 163 के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किया है। इस आदेश के तहत कोई भी निजी स्कूल संचालक, प्राचार्य या प्रबंधन समिति अभिभावकों को किसी एक दुकान से सामग्री खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकेगी।

आदेश में स्पष्ट किया गया है कि अभिभावकों को पूर्ण स्वतंत्रता होगी। वे अपनी सुविधा और क्षमता के अनुसार खुले market से किताबें, यूनिफॉर्म, जूते और स्टेशनरी खरीद सकेंगे। किसी भी प्रकार का प्रत्यक्ष या परोक्ष दबाव आदेश का उल्लंघन माना जाएगा।

पारदर्शिता के लिए स्कूलों पर नई जिम्मेदारियां

प्रशासन ने transparency सुनिश्चित करने के लिए निजी स्कूलों पर कुछ अनिवार्य शर्तें भी लागू की हैं। सभी स्कूलों को निर्धारित समय के भीतर आवश्यक पुस्तकों, यूनिफॉर्म और अन्य सामग्री की सूची सार्वजनिक करनी होगी। यह जानकारी स्कूल की वेबसाइट और परिसर में सूचना पट्ट पर प्रदर्शित करनी होगी।

इससे अभिभावकों को पहले से जानकारी मिल सकेगी। वे विभिन्न दुकानों की कीमतों की तुलना कर सकेंगे। प्रशासन का मानना है कि इससे मनमानी पर अंकुश लगेगा।

तीन साल तक यूनिफॉर्म बदलने पर रोक

अभिभावकों की एक बड़ी शिकायत बार-बार यूनिफॉर्म बदलने को लेकर थी। प्रशासन ने इस पर भी सख्त निर्देश जारी किए हैं। एक बार तय की गई यूनिफॉर्म में कम से कम तीन वर्षों तक कोई बदलाव नहीं किया जाएगा।

इस नियम से अभिभावकों को बार-बार नई ड्रेस खरीदने की मजबूरी नहीं रहेगी। इससे आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है। स्कूलों को इस निर्देश का सख्ती से पालन करना होगा।

आदेश तत्काल प्रभाव से लागू, निगरानी तेज

यह प्रतिबंधात्मक आदेश तत्काल प्रभाव से पूरे जिले में लागू कर दिया गया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आवश्यकता पड़ने पर इसकी अवधि बढ़ाई भी जा सकती है। इस दौरान स्कूलों की नियमित निगरानी की जाएगी।

प्रशासनिक अधिकारी औचक जांच करेंगे। अनुपालन की समीक्षा समय-समय पर की जाएगी। किसी भी शिकायत पर त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।

उल्लंघन पर सख्त कानूनी कार्रवाई की चेतावनी

प्रशासन ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि आदेश का उल्लंघन करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 223 के तहत दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई होगी। इसमें जुर्माने के साथ कारावास का भी प्रावधान है।

यदि किसी स्कूल में आदेश की अवहेलना पाई जाती है, तो प्राचार्य, संचालक, प्रबंधक और प्रबंधन समिति के सदस्य व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे। accountability तय की जाएगी और किसी को भी छूट नहीं मिलेगी।

अभिभावकों में राहत, सकारात्मक बदलाव की उम्मीद

प्रशासन के इस फैसले से अभिभावकों में राहत देखी जा रही है। लोगों का मानना है कि इससे शिक्षा के नाम पर हो रहा आर्थिक शोषण रुकेगा। निजी स्कूलों की मनमानी पर लगाम लगेगी।

शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आदेश का सख्ती से compliance कराया गया, तो यह व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव लाएगा। transparency और accountability बढ़ेगी। यह कदम बिहार की शिक्षा व्यवस्था को अधिक न्यायसंगत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

Read this article in

KKN लाइव WhatsApp पर भी उपलब्ध है, खबरों की खबर के लिए यहां क्लिक करके आप हमारे चैनल को सब्सक्राइब कर सकते हैं।

KKN Public Correspondent Initiative

NO COMMENTS

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Exit mobile version