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Trump Tariff War पर कोर्ट का झटका, भारत को भी मिल सकती है राहत

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अमेरिका की अपील अदालत ने पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए कई टैरिफ को अवैध करार दिया है। यह फैसला Trump Tariff War के बीच आया है और इसका सीधा असर भारत समेत कई देशों पर पड़ सकता है।

अदालत ने कहा कि IEEPA (International Emergency Economic Powers Act) के तहत लगाए गए ज्यादातर टैरिफ संवैधानिक रूप से सही नहीं हैं। हालांकि, इन टैरिफ को 14 अक्टूबर तक लागू रहने दिया जाएगा ताकि ट्रंप प्रशासन सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सके।

भारत के लिए यह फैसला राहत की खबर हो सकता है क्योंकि हाल ही में अमेरिका ने कई भारतीय उत्पादों पर 50% तक Import Duties लगा दी थीं।

अदालत का फैसला और संवैधानिक तर्क

अमेरिकी अदालत ने अपने आदेश में साफ कहा कि संविधान के अनुसार कर और टैरिफ लगाने का अधिकार केवल कांग्रेस के पास है।

जजों का कहना था कि यह मानना मुश्किल है कि कांग्रेस ने IEEPA Law बनाते समय राष्ट्रपति को असीमित टैरिफ लगाने का अधिकार देना चाहा होगा। अदालत ने यह भी कहा कि आपातकालीन शक्तियों का इस्तेमाल विदेशी नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए किया जा सकता है, लेकिन व्यापार नीति में असीमित दखल नहीं दिया जा सकता।

भारत पर असर

भारत पर अमेरिकी टैरिफ का सीधा असर हो रहा है। अमेरिका ने पहले ही भारतीय निर्यात पर 25% प्रतिशोधात्मक टैरिफ और रूस से आयातित तेल पर अतिरिक्त 25% शुल्क लगाया था।

अदालत के फैसले से इन दोनों शुल्कों पर असर पड़ सकता है। लेकिन ट्रंप द्वारा Section 232 Trade Expansion Act 1962 के तहत स्टील और एल्युमिनियम पर लगाया गया 50% शुल्क फिलहाल यथावत रहेगा।

इसका मतलब है कि भारत को आंशिक राहत मिल सकती है, लेकिन स्टील और एल्युमिनियम सेक्टर को अभी भी भारी दबाव झेलना पड़ेगा।

मुकदमे और कानूनी पृष्ठभूमि

यह फैसला दो मुकदमों पर आधारित है, जिन्हें छोटे कारोबारियों और अमेरिकी राज्यों के गठबंधन ने अप्रैल में दायर किया था।

इससे पहले Court of International Trade (CIT) ने भी मई में इन टैरिफ को अवैध करार दिया था। लेकिन अपील लंबित रहने के कारण उस फैसले को लागू नहीं किया गया। अब अपील अदालत ने साफ संकेत दे दिया है कि ट्रंप का कदम संवैधानिक दायरे से बाहर था।

ट्रंप प्रशासन ने क्यों चुना IEEPA

अमेरिकी वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लटनिक ने अदालत में कहा था कि राष्ट्रपति के पास सीमित विकल्प हैं।

  • Section 232 में जांच और निर्णय प्रक्रिया लगभग एक साल लंबी होती है।

  • Section 301 (Trade Act 1974) में भी जांच और प्रवर्तन जटिल और समय लेने वाला है।

  • इसके उलट, IEEPA राष्ट्रपति को तुरंत कार्रवाई का अधिकार देता है, अगर राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला हो।

ट्रंप प्रशासन का तर्क था कि तेजी से बदलती अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में यह विकल्प बेहद जरूरी था।

विशेषज्ञों की राय

अंतरराष्ट्रीय कानून विशेषज्ञ मार्कस वाग्नर ने कहा कि IEEPA का इस्तेमाल शुरुआत से ही सही रास्ता नहीं था। उन्होंने लिखा था कि ट्रंप प्रशासन को पता था कि अदालत इसे अवैध करार देगी, लेकिन असली मकसद समय को टालना था।

वाग्नर का मानना है कि अमेरिका की रणनीति में कोई बदलाव नहीं हुआ है। असली सवाल यह है कि बाकी देश कैसे प्रतिक्रिया देंगे।

क्या देश मौजूदा टैरिफ को मान्य रखेंगे या फिर अमेरिकी कदमों से हुए नुकसान को कम करने के उपाय खोजेंगे?

भारत की रणनीति

भारत के लिए यह फैसला उम्मीद की किरण है। सरकार अब इस आधार पर अमेरिका के साथ कूटनीतिक बातचीत कर सकती है।

हालांकि, स्टील और एल्युमिनियम पर Section 232 Duties बने रहने से बड़ी राहत अभी नहीं मिली है। भारत को अब अपने निर्यात बाजारों का विविधीकरण करना होगा ताकि अमेरिकी टैरिफ का असर कम किया जा सके।

Trump Tariff War पर अमेरिकी अदालत का यह फैसला बेहद अहम है। भारत को कुछ हद तक राहत मिल सकती है, लेकिन 50% Import Duties अब भी चुनौती बने हुए हैं।

यह मामला दिखाता है कि वैश्विक व्यापार नीति में कानूनी और संवैधानिक संतुलन कितना महत्वपूर्ण है। आने वाले दिनों में सुप्रीम कोर्ट का फैसला तय करेगा कि यह राहत स्थायी होगी या फिर टैरिफ का बोझ वापस आ जाएगा।

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