26 सितंबर 2025 को भारतीय शेयर बाजार एक बार फिर गिरावट के साथ खुला। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सेंसेक्स 80800 अंक से नीचे गिरकर 80749 अंक तक पहुंच गया, जिसमें 410 अंकों की गिरावट आई। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 50 सूचकांक 118 अंक घटकर 24771 पर ट्रेड कर रहा था। इस गिरावट का मुख्य कारण अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा दवाओं पर लगाए गए नए टैरिफ का ऐलान था। इसके चलते भारतीय फार्मा कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट देखने को मिली, जिनमें सन फार्मा, सिप्ला, लुपिन और अन्य प्रमुख फार्मा कंपनियां शामिल थीं। इन कंपनियों के शेयर 3% से अधिक गिर गए। निफ्टी फार्मा इंडेक्स 2.6% गिर गया, जबकि अन्य प्रमुख कंपनियां जैसे एशियन पेंट्स, इन्फोसिस और टेक महिंद्रा में 1.38% से लेकर 2.69% तक की गिरावट आई।
Article Contents
अमेरिकी टैरिफ के कारण भारतीय फार्मा शेयरों में भारी गिरावट
सुबह 9:45 बजे तक, सन फार्मा, सिप्ला, लुपिन, नैटको फार्मा, लॉरस लैब्स और अन्य फार्मा शेयरों में 3% से अधिक की गिरावट देखी गई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की कि 1 अक्टूबर से ब्रांडेड और पेटेंट फार्मास्यूटिकल्स पर 100% आयात शुल्क लगाया जाएगा, जब तक कंपनियां अमेरिका में एक विनिर्माण संयंत्र स्थापित नहीं करतीं। इससे भारतीय फार्मा कंपनियों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा, और उनका बाजार मूल्य तेजी से गिरा। इसके साथ ही निफ्टी फार्मा इंडेक्स में भी 2.6% की गिरावट दर्ज की गई।
सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट जारी
सुबह के समय, सेंसेक्स 203 अंकों की गिरावट के साथ 80956 के स्तर पर खुला, जबकि निफ्टी 50 सूचकांक 72 अंक नीचे 24818 के स्तर से ट्रेड कर रहा था। यह गिरावट वैश्विक संकेतों और ट्रंप के टैरिफ निर्णय के कारण आई। यह गिरावट भारतीय बाजारों के लिए चिंता का कारण बनी हुई है, क्योंकि निवेशकों को यह अंदेशा है कि आने वाले दिनों में और गिरावट हो सकती है।
गुरुवार का व्यापार और पिछले दिन की गिरावट
गुरुवार को भी भारतीय शेयर बाजार में गिरावट का रुख बना रहा। निफ्टी 50 सूचकांक 24900 के स्तर से नीचे फिसल गया। सेंसेक्स में 555.95 अंकों (0.68%) की गिरावट आई, और यह 81159.68 पर बंद हुआ। निफ्टी 50 में 166.05 अंकों (0.66%) की गिरावट आई, और यह 24890.85 के स्तर पर बंद हुआ। यह लगातार पांचवां दिन था जब भारतीय शेयर बाजार गिरावट में था।
वैश्विक संकेत और उनके प्रभाव
शेयर बाजार में गिरावट के लिए वैश्विक संकेत जिम्मेदार हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा 1 अक्टूबर से दवाओं, फर्नीचर और भारी ट्रकों पर नए आयात शुल्क (टैरिफ) लगाए जाने की घोषणा ने वैश्विक बाजारों को प्रभावित किया। इससे भारतीय बाजार भी प्रभावित हुए और गिरावट का सामना करना पड़ा।
एशियाई बाजारों में भी गिरावट
एशियाई बाजारों में भी गिरावट का रुख देखा गया। जापान का निक्केई 225 सूचकांक 0.28% गिरा, जबकि दक्षिण कोरिया का कोस्पी सूचकांक 1.54% गिर गया। हांगकांग के हेंग सेंग इंडेक्स के फ्यूचर्स भी कमजोर शुरुआत का संकेत दे रहे थे। इस तरह के कमजोर संकेत वैश्विक बाजारों से आ रहे थे, जो भारतीय बाजारों में गिरावट का कारण बने।
गिफ्ट निफ्टी और भारतीय बाजारों का संकेत
गिफ्ट निफ्टी (जो भारतीय बाजारों का संकेतक होता है) 24902 के स्तर पर ट्रेड कर रहा था, जो पिछले बंद भाव से 66 अंक नीचे था। यह भारतीय शेयर बाजार के लिए एक नकारात्मक संकेत था, और इसकी शुरुआत भी गिरावट के साथ हुई। इसके चलते भारतीय शेयर बाजार में और गिरावट की आशंका जताई जा रही थी।
अमेरिकी बाजारों का प्रदर्शन और उसकी स्थिति
अमेरिकी शेयर बाजार भी गुरुवार को गिरावट के साथ बंद हुआ। डॉ. जोन्स 0.38% और नैस्डैक 0.50% गिरा। अमेरिकी बाजारों में गिरावट का मुख्य कारण मजबूत आर्थिक आंकड़ों की उपस्थिति थी, जिसने फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों को कमजोर किया। यह असमंजस अमेरिकी निवेशकों के लिए चिंता का कारण बना, और इसका प्रभाव भारतीय शेयर बाजार पर भी पड़ा।
अमेरिकी आर्थिक आंकड़े और उनका प्रभाव
अमेरिकी अर्थव्यवस्था के आंकड़े मिले-जुले रहे। जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) की वृद्धि दर दूसरी तिमाही में 3.8% रही, जो पहले के अनुमान 3.3% से बेहतर थी। बेरोजगारी भत्ते के नए दावों की संख्या घटकर 218,000 हो गई, जो अनुमान से कम थी। टिकाऊ सामानों के ऑर्डर में अगस्त में 2.9% की वृद्धि हुई, जबकि उम्मीद थी कि इसमें गिरावट आएगी। ये सकारात्मक आंकड़े कुछ हद तक अमेरिकी बाजारों को सहारा देने वाले थे, लेकिन उनके साथ आने वाले जोखिमों ने बाजार को प्रभावित किया।
ट्रंप के टैरिफ और उनके प्रभाव
राष्ट्रपति ट्रंप ने घोषणा की कि 1 अक्टूबर से दवाओं, फर्नीचर और भारी ट्रकों पर आयात शुल्क बढ़ाया जाएगा। दवाओं पर यह शुल्क 100%, फर्नीचर पर 30% और भारी ट्रकों पर 25% होगा। इस घोषणा से फार्मा कंपनियों, विशेषकर भारतीय फार्मा कंपनियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा। ये कंपनियां पहले से ही अमेरिकी बाजार में अपने उत्पादों की बिक्री पर निर्भर हैं, और इस कदम से उनकी व्यापारिक स्थिति पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
एक्सेंचर के नतीजे और उनके प्रभाव
एक्सेंचर, एक प्रमुख कंसल्टिंग कंपनी, ने जून-अगस्त तिमाही के लिए 7% का राजस्व बढ़ाकर 17.60 बिलियन डॉलर तक पहुंचने का ऐलान किया। हालांकि, कंपनी ने अगले साल के लिए विकास दर का अनुमान 2% से 5% के बीच रखा, जो विश्लेषकों के अनुमान 5.3% से थोड़ा कम था। इसके बावजूद कंपनी के परिणाम बेहतर रहे, लेकिन विकास दर के अनुमान में कमी ने कुछ निराशा पैदा की।
सोना और डॉलर: बाजार की अनिश्चितता के बीच
अमेरिकी आंकड़ों और ब्याज दर में कटौती की उम्मीदों में कमी के कारण डॉलर मजबूत हुआ, जिससे सोने की कीमतों में गिरावट आई। हालांकि, सप्ताह के दौरान सोना अब भी 1.7% ऊपर है। डॉलर की मजबूती ने निवेशकों को सुरक्षित संपत्तियों से दूर कर दिया, और इससे सोने की कीमतें कम हुईं।
आने वाले दिनों का बाजार आउटलुक
आने वाले दिनों में भारतीय शेयर बाजार के लिए स्थिति चुनौतीपूर्ण हो सकती है। फार्मा क्षेत्र पर ट्रंप के टैरिफ के प्रभाव को देखते हुए, यह संभावना है कि इस क्षेत्र में और गिरावट आए। हालांकि, अगर अमेरिकी आर्थिक आंकड़े बेहतर आते हैं या फेडरल रिजर्व ब्याज दर में कटौती करता है, तो बाजार में कुछ सुधार हो सकता है।
26 सितंबर 2025 को भारतीय शेयर बाजार वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के कारण अस्थिरता का सामना कर रहा है। अमेरिकी टैरिफ के कारण फार्मा कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट आई है, और इस क्षेत्र के भविष्य पर सवाल खड़े हो गए हैं। इसके अलावा, अमेरिकी केंद्रीय बैंक के नीतिगत फैसले और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों के कारण निवेशकों के लिए आने वाले दिनों में चुनौतियां बनी रह सकती हैं। इस समय निवेशकों को सतर्क रहकर वैश्विक संकेतों पर नजर रखनी चाहिए और शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव के बावजूद सही निवेश रणनीति अपनानी चाहिए।
Read this article in
KKN लाइव WhatsApp पर भी उपलब्ध है, खबरों की खबर के लिए यहां क्लिक करके आप हमारे चैनल को सब्सक्राइब कर सकते हैं।
Share this:
- Click to share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp
- Click to share on Facebook (Opens in new window) Facebook
- Click to share on X (Opens in new window) X
- Click to share on LinkedIn (Opens in new window) LinkedIn
- Click to share on Threads (Opens in new window) Threads
- Click to share on Telegram (Opens in new window) Telegram



