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अडानी ग्रुप के शेयरों में जबरदस्त उछाल, SEBI के निर्णय और स्टॉक स्प्लिट से निवेशकों में फिर आया भरोसा

अडानी पावर के स्टॉक स्प्लिट ने बाजार को किया आकर्षित

सोमवार को अडानी ग्रुप के शेयरों में भारी तेजी दर्ज हुई, जिसमें सबसे आगे रहा अडानी पावर। कंपनी के पांच-अनुपात-एक स्टॉक स्प्लिट के लागू होने के बाद केवल एक दिन में अडानी पावर के शेयर करीब 20 प्रतिशत तक बढ़ गए। आमतौर पर स्टॉक स्प्लिट जैसी पहल शेयर को ज्यादा निवेशकों के लिए सुलभ बनाती है और लिक्विडिटी में इज़ाफा करती है। कम कीमत पर मिलने वाले शेयर नए और मौजूदा दोनों ही निवेशकों को आकर्षित करते हैं, जिससे बाजार में ट्रेडिंग वॉल्यूम बढ़ता है।

इस तेजी का एक बड़ा कारण वह सकारात्मक निर्णय भी रहा, जिसमें भारत के बाजार नियामक, सेबी ने अडानी ग्रुप पर लगे स्टॉक मैनिपुलेशन और एकाउंटिंग फर्जीवाड़े के कुछ आरोपों से राहत दी। इसकी वजह से निवेशकों के बीच विश्वास का माहौल फिर से पैदा हुआ है, खासकर उन दिनों के बाद जब ग्रुप पर गंभीर आरोप लगे थे।

SEBI की जांच में आंशिक राहत, बाकी मामलों की जांच जारी

पिछले सप्ताह भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने अडानी ग्रुप के खिलाफ लगे कई आरोपों में से कुछ को खारिज करते हुए समूह को बड़ी राहत दी। ये वो आरोप थे जो 2023 में अमेरिका स्थित शॉर्ट-सेलर हिंडनबर्ग रिसर्च द्वारा लगाए गए थे, जिसकी वजह से अडानी के शेयरों में बड़ी गिरावट आई थी।

सेबी की रिपोर्टों के अनुसार, जांच पूरी तरह खत्म नहीं हुई है और समूह के खिलाफ दर्जनभर से अधिक मुद्दों पर प्रक्रिया अभी जारी है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक दो अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि अभी सभी आरोपों पर निर्णय होना बाकी है।

फिलहाल जो राहत मिली है, उसने बाजार की सेंटिमेंट को बदल डाला है। इससे निवेशकों में यह विश्वास लौटा है कि अडानी ग्रुप पर लगे हर आरोप में सच्चाई नहीं है और रेग्युलेटरी बॉडी का सपोर्ट लंबे समय के लिए स्टॉक की स्थिति को मजबूत कर सकता है।

हिंडनबर्ग रिपोर्ट का अडानी ग्रुप पर असर

2023 के जनवरी में हिंडनबर्ग रिसर्च ने अडानी ग्रुप पर बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी, स्टॉक मैनिपुलेशन और अकाउंटिंग में गड़बड़ी के आरोप लगाए थे। इसका सीधा असर यह हुआ कि ग्रुप के बाजार पूंजी में कुछ ही दिनों में 100 अरब डॉलर से भी अधिक की गिरावट आ गई।

रिपोर्ट के अनुसार, ग्रुप पर आय में हेराफेरी, शेल कंपनियों का दुरुपयोग और बाजार में शेयर कीमतों को प्रभावित करने के आरोप थे। अडानी ग्रुप ने इन सभी आरोपों को निराधार बताया, लेकिन इसका प्रभाव महीनों तक बना रहा और विभिन्न क्षेत्रों में कंपनी के शेयरों में भारी गिरावट आई।

हालांकि, समय के साथ कुछ शेयरों में सुधार नजर आया, लेकिन इन आरोपों की छाया लंबे समय तक बनी रही। सोमवार को सेबी के आंशिक क्लीनचिट के बाद आई तेजी दर्शाती है कि समूह अब धीरे-धीरे उस संकट से निकलता दिखाई दे रहा है।

ग्रुप के बाकी शेयरों में भी सकारात्मक रुझान

सिर्फ अडानी पावर ही नहीं बल्कि ग्रुप की अन्य कंपनियों ने भी सोमवार को अच्छा प्रदर्शन किया। अडानी टोटल गैस में लगभग 15 प्रतिशत की तेजी आई, जो कंपनी के ऊर्जा कारोबार में निवेशकों की बढ़ती रुचि को दर्शाता है। अडानी ग्रीन एनर्जी के शेयरों में करीब 7 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई, जो रिन्यूएबल एनर्जी (Renewable Energy) में समूह के बढ़ते निवेश की वजह से है। अडानी पोर्ट्स एंड SEZ में लगभग 1.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जो कंपनी के इंफ्रास्ट्रक्चर बिजनेस के प्रति सकारात्मक सोच का संकेत है।

इस समूहव्यापी तेजी ने साफ़ कर दिया कि निवेशकों की सोच सकारात्मक दिशा में बदली है। मार्केट विशेषज्ञों का मानना है कि रेगुलेटरी क्लैरिटी जैसे अवसर, खासकर तब जब बाजार में लंबे समय से नकारात्मकता हो, बड़े बदलाव लेकर आते हैं।

विश्लेषकों की राय: निवेशकों का पुनः विश्वास

बजाज ब्रोकिंग रिसर्च के अनुसार सेबी के क्लीनचिट के बाद अडानी ग्रुप में निवेशकों का भरोसा दोबारा बना है। विश्लेषण में बताया गया कि रेगुलेटरी ऑर्डर ने शेयरों में नई खरीददारी का माहौल बनाया है, जिसे सिर्फ शॉर्ट टर्म ट्रेडिंग नहीं बल्कि दीर्घकालिक निवेशकों के विश्वास के रूप में देखा जा रहा है।

मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि हिंडनबर्ग केस की जांच अभी भी चल रही है, लेकिन जिन आरोपों को निरस्त किया गया है वे ये दिखाते हैं कि हर शॉर्ट-सेलर आरोप का कोई ठोस आधार जरूरी नहीं होता।

अडानी ग्रुप का दीर्घकालिक विकास और विस्तार

विवादों के बावजूद अडानी ग्रुप भारत की सबसे बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर और एनर्जी कंपनियों में शामिल है। समूह का कारोबार पावर जनरेशन, रिन्यूएबल एनर्जी, नेचुरल गैस, लॉजिस्टिक्स, पोर्ट्स, एयरपोर्ट्स और इंडस्ट्रियल जोन्स तक फैला है।

पिछले एक दशक में कंपनी ने भारत और विदेशों में आक्रामक विस्तार किया है। पावर सेक्टर में अडानी पावर की रणनीति और हालिया स्टॉक स्प्लिट का फैसला छोटे निवेशकों को आकर्षित करता है। देश में एनर्जी की बढ़ती डिमांड के बीच अडानी पावर का निवेश भविष्य के अनुरूप सही ठहरता है।

इसी तरह, रिन्यूएबल एनर्जी के क्षेत्र में अडानी ग्रीन एनर्जी बड़ी संभावनाएं देखती है। हरित उर्जा (Green Energy) में निरंतर विस्तार के साथ निवेशक इसकी दीर्घकालिक ग्रोथ को लेकर आश्वस्त हैं।

अडानी पोर्ट्स एवं एसईजेड भी देश के लॉजिस्टिक्स नेटवर्क का अहम हिस्सा है। सोमवार की तेजी ने संकेत दिया कि इंफ्रास्ट्रक्चर सेगमेंट में भी धीरे-धीरे स्थिति सुधर रही है।

शेयर बाजार में बदलता नजरिया और निवेशकों के लिए संकेत

निवेशकों के लिए सोमवार की तेजी मुख्य संकेत है कि लम्बे समय में रेगुलेटरी क्लैरिटी सबसे ज़रूरी होती है। जब तक जांच पूरी नहीं होती तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव रह सकता है, लेकिन सीबीआई या सेबी का स्पष्ट निर्णय आते ही निवेशकों की सोच बदलती है।

अडानी ग्रुप के शेयर आगामी हफ्तों में भी फोकस में रह सकते हैं क्योंकि रेगुलेटर की अन्य जांचें अभी पूरी नहीं हुई हैं। शेयरों की कीमत, सेबी के निर्णय और कंपनी के भविष्य के प्लान्स इस समूह के स्टॉक्स की दिशा तय करेंगे।

अभी के लिए, अदाणी पावर के पांच-अनुपात-एक स्टॉक स्प्लिट और सेबी की तरफ से कुछ आरोपों में मिली राहत दोहरे सकारात्मक संकेत साबित हुए हैं। इसकी वजह से समूह ने शेयर बाजार में खोया भरोसा फिर से हासिल किया और साथ ही ‘रिटेल इन्वेस्टर्स’ का आधार भी बढ़ाया है।

संक्षेप में

सोमवार को अडानी ग्रुप के शेयरों में आई रिकॉर्ड तेजी समूह के लिए एक महत्वपूर्ण क्षण साबित हुई है। स्टॉक स्प्लिट और रेगुलेटरी राहत से बाजार ने कंपनी के प्रति भरोसा फिर से जताया है।

हालांकि हिंडनबर्ग के आरोप पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं, फिर भी शुरुआती तेजी संकेत देती है कि अडानी ग्रुप फिर से बाजार में वापसी के रास्ते पर है।

अडानी पावर की 20 प्रतिशत की तेज बढ़त, अडानी टोटल गैस, अडानी ग्रीन एनर्जी और अडानी पोर्ट्स में भी निवेशकों की दिलचस्पी का असर साफ़ दिखाई दिया। रेगुलेटर की क्लीनचिट ने समूह की छवि को नया जीवन दिया है, जिसका असर लॉन्ग टर्म निवेश और बाजार में समूह की ग्रोथ पर पड़ेगा।

आगामी महीनों में ग्रुप के भविष्य पर सेबी की चल रही जांच और बाज़ार का रिस्पांस अहम रहेगा। फिलहाल, निवेशकों की उम्मीदें और अडानी ग्रुप की रणनीतिक पहलें समूह को दोबारा फोकस में ला रही हैं।

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