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मुजफ्फरपुर में कर्ज में डूबी महिला ने दो बेटों के साथ नदी में कूदकर लिया खौफनाक कदम

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बिहार के मुजफ्फरपुर जिले से एक सनसनीखेज घटना सामने आई है, जिसमें एक महिला ने कर्ज के बोझ तले दबकर ऐसा कदम उठाया कि इलाके में हड़कंप मच गया। पीयर थाना क्षेत्र के हरपुर पिलखी पुल के नीचे स्थित श्मशान घाट के पास महिला ने अपने दो बेटों के साथ बूढ़ी गंडक नदी में कूदकर आत्महत्या करने की कोशिश की। इस घटना ने न केवल उसके परिवार को बल्कि पूरे इलाके को गहरे सदमे में डाल दिया।

महिला को मछुआरों ने नदी से बाहर निकाल लिया, लेकिन उसके दो बेटे – आठ साल का अभिराज और छह साल का सचिन मेहता – नदी की तेज धारा में बह गए। दोनों बच्चों की तलाश में एसडीआरएफ (State Disaster Response Force) की टीम ने अभियान शुरू किया, लेकिन अब तक दोनों बच्चों का कोई सुराग नहीं मिला है।

महिला का कर्ज और मानसिक तनाव

महिला की पहचान नीलम देवी के रूप में हुई है, जो सिमरा पंचायत के वार्ड 10 की निवासी हरिशचंद्र मेहता की पत्नी हैं। नीलम देवी ने पुलिस को बताया कि वह तीन महिला समूहों से लगभग दो लाख रुपए का कर्ज ले चुकी थी और कर्ज चुकाने में असमर्थ थी। उनका कहना था कि पति की आमदनी भी परिवार के खर्चों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं थी। इसके अलावा, नीलम देवी के पति की जमीन को लेकर परिवार के अन्य सदस्य उनसे विवाद कर रहे थे। ये तमाम समस्याएं मिलकर मानसिक तनाव का कारण बनीं, जिससे महिला ने आत्महत्या जैसा खौफनाक कदम उठाया।

नीलम देवी ने पुलिस को बताया कि उनके पति के पांच भाई हैं और लंबे समय से उनके बीच जमीन को लेकर विवाद चल रहा है। परिवार के अन्य सदस्य उनके हिस्से की जमीन हड़पना चाहते थे, जिससे आर्थिक स्थिति और भी खराब हो गई थी। इन हालात में नीलम देवी ने खुद को बुरी तरह से फंसा हुआ महसूस किया और कर्ज चुकाने के लिए कोई रास्ता न देखकर इस आत्मघाती कदम को उठाया।

घटना और बचाव अभियान

बुधवार, 24 सितंबर 2025 को दोपहर करीब 3 बजे नीलम देवी अपने दो बच्चों के साथ श्मशान घाट के पास स्थित बूढ़ी गंडक नदी में कूद गई। जैसे ही स्थानीय मछुआरों को इसकी सूचना मिली, उन्होंने तुरंत नदी में कूदकर नीलम देवी को बचा लिया। हालांकि, दोनों बच्चे नदी की तेज धारा में बह गए। मछुआरों ने नीलम देवी को तो बाहर निकाल लिया, लेकिन बच्चों का कुछ पता नहीं चला।

स्थानीय पुलिस और एसडीआरएफ की टीम ने बच्चों की तलाश में पूरी रात अभियान चलाया, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली। बच्चों के लापता होने के बाद, पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एक बार फिर से खोजबीन शुरू की। गुरुवार सुबह, एसडीआरएफ की टीम ने पुनः अभियान चलाया, लेकिन बच्चों के जिंदा होने की उम्मीद कम होती जा रही है।

परिवार की स्थिति और प्रशासन का समर्थन

नीलम देवी और उसके परिवार की स्थिति बेहद कठिन हो गई है। उनके पति, हरिशचंद्र मेहता, का रो-रोकर बुरा हाल है। वह अपनी पत्नी और बच्चों के साथ हुए इस हादसे को पचा नहीं पा रहे हैं। नीलम देवी स्वयं बच्चों के बारे में सोचकर बेहद उदास और परेशान हैं, और पुलिस हिरासत में होने के बावजूद उनकी आँखों में बच्चों के खो जाने का गहरा दर्द साफ नजर आता है।

पुलिस प्रशासन ने इस मामले में पूरी सहायता देने का आश्वासन दिया है। सीओ अंकुर राय ने कहा कि एसडीआरएफ की टीम बच्चों की तलाश में जुटी हुई है और उनके मिलने तक खोजबीन जारी रखी जाएगी। प्रशासन ने पीड़ित परिवार को हर संभव सहायता प्रदान करने का भरोसा दिया है।

पीयर थाना के थानाध्यक्ष रजनीकांत ने भी कहा कि महिला द्वारा लिए गए कर्ज से संबंधित मामले की जांच की जा रही है। इस मामले में नीलम देवी से पूछताछ जारी है और पुलिस उसकी मानसिक स्थिति का भी आकलन कर रही है।

कर्ज और आर्थिक समस्याएं: एक गंभीर मुद्दा

नीलम देवी की इस दुखद घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि बिहार के ग्रामीण इलाकों में कर्ज की समस्या कितनी गंभीर हो सकती है। महिला समूहों से लिए गए कर्ज की राशि का बोझ उठाना एक बड़ा संकट बन जाता है, खासकर जब परिवार की आमदनी कम हो और आर्थिक स्थिति अत्यधिक खराब हो।

गांवों में महिलाएं अक्सर छोटे व्यवसायों या दैनिक जरूरतों के लिए कर्ज लेती हैं, लेकिन ब्याज की दरें और चुकाने के दबाव से यह कर्ज कभी-कभी अत्यधिक बढ़ जाता है। ऐसे में कई बार महिलाएं मानसिक दबाव में आकर अपने परिवार को भी नुकसान पहुंचा देती हैं, जैसा कि नीलम देवी के मामले में हुआ।

प्रशासनिक पहल और भविष्य की जरूरत

यह घटना प्रशासन के लिए एक चेतावनी है कि ग्रामीण इलाकों में वित्तीय सहायता और कर्ज की प्रबंधन व्यवस्था पर गंभीर ध्यान दिया जाए। ग्रामीण परिवारों को सही तरीके से कर्ज लेने और उसे चुकाने के बारे में जानकारी दी जाए, साथ ही ब्याज दरों को नियंत्रित करने के उपाय किए जाएं, ताकि इस तरह की घटनाएं न हों।

नीलम देवी की दुखद स्थिति ने यह साबित कर दिया कि महिलाओं के लिए वित्तीय शिक्षा और मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना अत्यंत आवश्यक है। साथ ही, ग्रामीण इलाकों में कर्ज की पुनर्वास योजना और आत्महत्या से बचाव के लिए काउंसलिंग की सुविधा भी दी जानी चाहिए।

मुजफ्फरपुर की यह घटना न केवल नीलम देवी के परिवार के लिए एक अपूरणीय क्षति है, बल्कि पूरे समाज के लिए एक चेतावनी है। इस घटना ने यह दिखाया कि कर्ज के बोझ तले दबे लोग मानसिक रूप से कितनी कठिन परिस्थितियों से गुजर रहे होते हैं। राज्य और प्रशासन को इस मुद्दे को गंभीरता से लेने की आवश्यकता है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके और ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक सहायता प्रणाली को और अधिक सुदृढ़ किया जा सके।

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