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बिहार में राहुल गांधी और तेजस्वी यादव की Voter Rights Yatra, भाजपा-EC पर बड़े आरोप

कांग्रेस नेता राहुल गांधी और आरजेडी नेता तेजस्वी यादव की Voter Rights Yatra मंगलवार को तीसरे दिन नवादा पहुंची। यहां राहुल गांधी ने एक बड़ी सभा को संबोधित किया और भाजपा तथा Election Commission पर गंभीर आरोप लगाए।

उन्होंने दावा किया कि बिहार में लाखों मतदाताओं के नाम voter list से हटा दिए गए हैं। राहुल गांधी के अनुसार यह कदम सुनियोजित तरीके से उठाया गया है ताकि लोकतंत्र को कमजोर किया जा सके।

राहुल गांधी का आरोप – संविधान से छीने जा रहे अधिकार

राहुल गांधी ने अपने संबोधन में कहा कि भारतीय संविधान हर नागरिक को समान अधिकार देता है, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह इन अधिकारों को छीन रहे हैं। उन्होंने इसे लोकतंत्र पर सीधा हमला बताया।

उन्होंने यह भी कहा कि महाराष्ट्र में करीब एक करोड़ वोटों की चोरी हुई है। Election Commission यह नहीं बता पा रहा कि जिनका नाम हटाया गया है, वे कौन लोग हैं। राहुल गांधी ने जोर देकर कहा कि बिहार में अब इस तरह की गड़बड़ियों को सफल नहीं होने दिया जाएगा।

नवादा के सुबोध सिंह से मुलाकात

यात्रा के दौरान राहुल गांधी ने काशीचक निवासी सुबोध सिंह से मुलाकात की। सिंह का नाम SIR ड्राफ्ट voter list से हटा दिया गया है। राहुल गांधी ने इसे एक बड़ा उदाहरण बताते हुए कहा कि यह समस्या केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है बल्कि पूरे बिहार में फैली हुई है।

उन्होंने जनता से अपील की कि वे अपने अधिकारों के लिए आवाज़ उठाएं और लोकतंत्र को बचाने की लड़ाई में शामिल हों।

विपक्ष की रणनीति

राहुल गांधी और तेजस्वी यादव की यह संयुक्त यात्रा विपक्ष की बड़ी रणनीति का हिस्सा है। दोनों नेता मिलकर बिहार के अलग-अलग जिलों में जनता से सीधा संवाद कर रहे हैं।

तेजस्वी यादव ने भी राहुल गांधी के साथ मंच साझा किया और कहा कि राज्य के गरीब और ग्रामीण मतदाता इस voter list manipulation से सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। विपक्ष का मानना है कि यह मुद्दा आने वाले चुनावों में निर्णायक साबित हो सकता है।

भाजपा और Election Commission पर सीधा हमला

राहुल गांधी ने स्पष्ट कहा कि भाजपा और Election Commission की साझेदारी से ही यह voter list हटाने का खेल चल रहा है। उनके मुताबिक यह किसी clerical mistake का नतीजा नहीं बल्कि राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है।

उन्होंने कहा कि जब तक भाजपा और आयोग को झुकाया नहीं जाएगा, विपक्ष अपनी लड़ाई जारी रखेगा।

जनता की प्रतिक्रिया

नवादा की सभा में भारी भीड़ उमड़ी। कई लोग मंच से अपनी समस्याएं साझा करने आगे आए। कुछ लोगों ने कहा कि उनके परिवार के सदस्यों के नाम भी voter list से हटाए गए हैं।

राहुल गांधी ने यह भरोसा दिलाया कि यह लड़ाई किसी एक पार्टी की नहीं बल्कि पूरे देश की है। उनका कहना था कि यह भारत के लोकतंत्र की जड़ें मजबूत करने की जंग है।

महाराष्ट्र से बिहार तक का मुद्दा

राहुल गांधी द्वारा महाराष्ट्र का जिक्र करना इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर ले जाने की कोशिश माना जा रहा है। उन्होंने कहा कि जब महाराष्ट्र जैसे बड़े राज्य में एक करोड़ वोट हट सकते हैं तो बिहार में लाखों वोटों का गायब होना कोई बड़ी बात नहीं है।

इस बयान ने सभा में मौजूद लोगों को गहराई से प्रभावित किया और उन्होंने जोरदार समर्थन जताया।

यात्रा का प्रतीकात्मक महत्व

Voter Rights Yatra केवल एक राजनीतिक अभियान नहीं बल्कि एक प्रतीकात्मक यात्रा भी है। राहुल गांधी और तेजस्वी यादव गांव-गांव जाकर उन लोगों से मिल रहे हैं जिनका नाम voter list से गायब कर दिया गया है।

इससे न केवल स्थानीय लोगों में जागरूकता बढ़ रही है बल्कि यह मुद्दा राष्ट्रीय बहस का भी हिस्सा बन रहा है।

बिहार की राजनीति पर असर

बिहार में आने वाले चुनावों के लिहाज से यह मुद्दा बेहद अहम हो गया है। विपक्ष इसे भाजपा सरकार की बड़ी नाकामी के रूप में पेश कर रहा है।

राहुल गांधी और तेजस्वी यादव दोनों ने जनता से वादा किया कि वे लोकतंत्र और voter rights की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाएंगे। उनका मानना है कि यही मुद्दा लोगों को विपक्ष के साथ जोड़ सकता है।

राहुल गांधी का संदेश

सभा के अंत में राहुल गांधी ने कहा कि भाजपा और Election Commission को झुकाए बिना यह लड़ाई खत्म नहीं होगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह का नाम सीधे लेकर उन्होंने जनता के सामने यह साफ किया कि वे जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटेंगे।

उनका कहना था कि विपक्ष लोकतंत्र के लिए हर कीमत पर संघर्ष करेगा और जनता को उसके अधिकार वापस दिलाएगा।

नवादा में राहुल गांधी और तेजस्वी यादव की Voter Rights Yatra का तीसरा दिन विपक्ष के लिए मजबूत संदेश लेकर आया।

जनता के बीच सुबोध सिंह जैसे उदाहरण ने साफ कर दिया कि voter list से नाम हटाए जाने का मामला वास्तविक और गंभीर है। विपक्ष इस मुद्दे को राज्य से बाहर भी ले जाने की तैयारी कर रहा है।

अब देखना यह होगा कि आने वाले दिनों में यह अभियान कितना प्रभाव डालता है और बिहार की राजनीति की दिशा किस ओर मोड़ता है।

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