मुज़फ्फरपुर इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी (MIT) के एक उज्जवल और दृढ़ नायक छात्र आयुष कुमार ने भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) में प्रोबेशनरी इंजीनियर के रूप में 13 लाख रुपये वार्षिक पैकेज के साथ प्रतिष्ठित पद प्राप्त कर एक अहम मील का पत्थर हासिल किया है। हालांकि, उनकी यात्रा आसान नहीं रही। एक साधारण पृष्ठभूमि से आने वाले आयुष का सफलता की ओर बढ़ना उनकी समर्पण, परिश्रम और उनके परिवार व शिक्षकों के समर्थन का प्रतीक है।
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इंजीनियर बनने का सपना
आयुष बचपन से ही इंजीनियर बनने का सपना देख रहे थे। यह सपना उनके भीतर बचपन से गहरे रूप में समाया हुआ था, और कई चुनौतियों का सामना करने के बावजूद उन्होंने कभी भी अपने लक्ष्य को छोड़ने का विचार नहीं किया। आयुष के जीवन में एक कठिन मोड़ तब आया जब उनके पिता, राजू प्रसाद गुप्ता, का निधन हो गया। इस अपार दुख के बावजूद आयुष ने अपनी परिस्थितियों को अपने सपनों की राह में आड़े नहीं आने दिया। उनकी मां, Anita Gupta, जो एक गृहिणी हैं, हमेशा उनके लिए मजबूत सहारा बनीं, और जीवन की कठिनाइयों से निपटने में उन्होंने हमेशा आयुष का मार्गदर्शन किया।
आयुष ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा DAV स्कूल से प्राप्त की और इसके बाद अपने उच्च माध्यमिक शिक्षा के लिए मदनपुर के सरकारी कॉलेज में दाखिला लिया। मजबूत शैक्षिक आधार के साथ, उन्होंने MIT मुज़फ्फरपुर से इलेक्ट्रॉनिक्स और कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में अपनी इंजीनियरिंग डिग्री पूरी की। छोटे शहर से एक प्रमुख इंजीनियरिंग कॉलेज तक का उनका सफर उनके लक्ष्य को प्राप्त करने के दृढ़ संकल्प का परिणाम था।
MIT में प्रवेश और GATE की तैयारी
आयुष का MIT में प्रवेश JEE Mains परीक्षा में उनके प्रदर्शन के आधार पर हुआ। उन्होंने 2020-2024 बैच में MIT में दाखिला लिया और वहीं से GATE (ग्रेजुएट एप्टीट्यूड टेस्ट इन इंजीनियरिंग) की तैयारी शुरू कर दी। उनका उद्देश्य बड़ा था, और उन्होंने सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में, खासकर BEL जैसी कंपनियों में अवसर तलाशने की कोशिश की।
GATE में पहले प्रयास में आयुष वो रैंक नहीं प्राप्त कर सके, जिसकी उन्हें उम्मीद थी, जिससे वे अपनी पसंदीदा संस्थाओं में प्रवेश नहीं पा सके। हालांकि, इस असफलता ने उन्हें निराश नहीं किया। इसके बजाय, यह उनकी और भी अधिक मेहनत करने के लिए प्रेरणा बनी। आयुष ने अपनी तैयारी को और भी मजबूत किया, और अगले GATE परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन करने के लिए पूरे समर्पण के साथ तैयारी शुरू की।
BEL के साथ मील का पत्थर
आयुष की मेहनत रंग लाई जब उन्होंने दूसरे प्रयास में GATE में एक अच्छी रैंक प्राप्त की और IIT दिल्ली में प्रवेश पाने में सफल रहे। लेकिन इस दौरान, आयुष ने भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) से अपनी पहली कोशिश में ही नौकरी का प्रस्ताव प्राप्त कर लिया था। 13 लाख रुपये का आकर्षक पैकेज और बेंगलुरु में पद मिलने के बाद आयुष ने IIT दिल्ली को छोड़कर BEL के प्रस्ताव को स्वीकार करने का निर्णय लिया। यह उनके करियर का एक महत्वपूर्ण पल था, क्योंकि उन्हें यह महसूस हुआ कि यह अवसर उनके सपनों को साकार करने के लिए आदर्श था।
हालांकि आयुष को कॉलेज प्लेसमेंट ड्राइव के दौरान 4.5 लाख रुपये के पैकेज में भी ऑफर मिला था, उन्होंने इसे ठुकरा दिया और GATE की तैयारी पर ध्यान केंद्रित किया, ताकि एक बेहतर अवसर की तलाश कर सकें। यह अवसर उन्हें BEL के रूप में मिला।
परिवार और शिक्षकों का समर्थन
आयुष अपने सफर में मिली सफलता का श्रेय अपनी मां और अपने शिक्षकों को देते हैं। वह कहते हैं कि उनकी मां हमेशा उनके साथ थीं, हर मुश्किल वक्त में भावनात्मक और मानसिक रूप से उनका समर्थन करतीं। MIT में उनके इलेक्ट्रॉनिक्स और कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग विभाग के शिक्षकों ने भी उनकी प्रेरणा को बनाए रखने और उनके लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित रखने में अहम भूमिका निभाई। आयुष हमेशा मानते हैं कि अनुशासन, मेहनत और ईमानदारी से सफलता जरूर मिलती है।
उन्होंने अपने मेंटर्स का भी आभार व्यक्त किया, जिन्होंने उन्हें सकारात्मक रहने और कठिनाईयों के बावजूद मेहनत करने के लिए प्रोत्साहित किया। उनके विश्वास ने आयुष को सफलता की ओर बढ़ने में मदद की, भले ही कई बार चीजें उनके अनुसार नहीं हो रही थीं।
साथियों के लिए एक संदेश
आयुष अब देश भर के छात्रों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गए हैं। वह दूसरों को अपने लक्ष्यों के प्रति स्पष्ट होने और अपनी मेहनत में अनुशासन बनाए रखने की सलाह देते हैं। वह यह बताते हैं कि सफलता की राह आसान नहीं होती, लेकिन अगर किसी का समर्पण, मेहनत और लक्ष्य पर स्पष्ट फोकस हो, तो सफलता निश्चित रूप से मिलती है। आयुष की कहानीPersistence की शक्ति और कभी हार न मानने के महत्व को साबित करती है।
MIT फैकल्टी से सम्मान
आयुष की सफलता को MIT, मुज़फ्फरपुर में बड़ी शान से मनाया गया है, जहाँ उनकी सफलता ने पूरे संस्थान को गर्वित किया है। MIT के निदेशक प्रोफेसर (डॉ.) मिथिलेश कुमार झा ने आयुष को उनकी सफलता पर बधाई दी, इसे कॉलेज के लिए गर्व का पल बताया। इसके साथ ही, प्रशिक्षण और प्लेसमेंट अधिकारी प्रोफेसर दीपक कुमार चौधरी, रजिस्ट्रार प्रोफेसर राजनिश कुमार और उनके विभाग के सभी शिक्षकों ने आयुष की इस शानदार उपलब्धि पर उन्हें बधाई दी।
बड़ा सपना और भविष्य की आकांक्षाएं
आयुष के लिए यह सिर्फ शुरुआत है। हालांकि BEL में 13 लाख रुपये वार्षिक पैकेज वाली नौकरी प्राप्त करना एक बड़ी सफलता है, उनका असल लक्ष्य अपने करियर में और अधिक ऊंचाइयां हासिल करना है और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में योगदान देना है। वह छोटे शहरों के छात्रों को प्रेरित करने की इच्छा रखते हैं, ताकि वे भी अपने सपनों को साकार करने के लिए प्रेरित हों, जैसा उन्होंने किया।
आयुष की कहानी यह साबित करती है कि कोई भी सपना बहुत बड़ा नहीं होता है, चाहे आप जिन परिस्थितियों में पैदा हुए हों। एक छोटे से गांव से लेकर BEL जैसी प्रमुख कंपनी तक पहुंचने की उनकी यात्रा परिश्रम, सहनशीलता और स्पष्ट दृष्टिकोण की ताकत का प्रतीक है।
आयुष कुमार की यात्रा केवल एक प्रतिष्ठित नौकरी प्राप्त करने की नहीं है, बल्कि यह व्यक्तिगत संघर्षों को पार करने, अपने लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित करने और परिवार और शिक्षकों के महत्व को दिखाती है। अपने पिता को बचपन में खोने से लेकर BEL में एक सपनों की नौकरी पाने तक, आयुष का जीवन यह दिखाता है कि अगर समर्पण और कड़ी मेहनत हो, तो सफलता जरूर मिलती है।
उनकी BEL में 13 लाख रुपये के पैकेज के साथ प्राप्त की गई सफलता किसी साधारण पृष्ठभूमि से आए किसी व्यक्ति के लिए एक बड़ा कदम है। यह कहानी यह भी बताती है कि अगर आप अपनी पसंद को और अपने लक्ष्यों को सही दिशा में रखें, तो सफलता आपके कदम चूमेगी। आयुष की यह यात्रा हर छात्र के लिए प्रेरणा का एक उदाहरण बन सकती है कि किस तरह सही मानसिकता और समर्थन से कोई भी चुनौती पार की जा सकती है।
जैसे ही आयुष बेंगलुरु में BEL के साथ अपने नए अध्याय की शुरुआत करेंगे, उनकी यात्रा भविष्य में और अधिक छात्रों को प्रेरित करती रहेगी।



