बिहार के नवादा जिले में एक 16 वर्षीय किशोर की पुलिस हिरासत में मौत हो गई, जिससे स्थानीय समुदाय में भारी गुस्सा और उथल-पुथल मच गई। इस घटना ने पुलिस की लापरवाही और मिलीभगत के आरोपों को जन्म दिया है, और इसने राज्य में पुलिस हिरासत की सुरक्षा और कस्टोडियल प्रैक्टिसेस पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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घटना: किशोर की गिरफ्तारी और पुलिस हिरासत में मौत
नवादा जिले के काशी चौक ब्लॉक के बौरी गांव के निवासी 16 वर्षीय सनी कुमार को बुधवार की शाम पुलिस ने हिरासत में लिया था। सनी की गिरफ्तारी एक प्रेम प्रसंग के चलते हुई थी, जिसमें आरोप था कि वह बिहार पुलिस के एक कांस्टेबल की बहन प्रीति कुमारी के साथ भाग गया था। सनी और प्रीति के बीच पिछले तीन साल से एक रिश्ते की बात कही जा रही थी, और दोनों ने एक सप्ताह पहले भाग जाने का कदम उठाया था। प्रीति के भाई ने इस मामले में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस ने सनी को बुधवार शाम लगभग 7 बजे गिरफ्तार किया।
गिरफ्तारी के बाद सनी को काशीचक पुलिस स्टेशन में रातभर हिरासत में रखा गया। अगले दिन गुरुवार सुबह करीब 7 बजे पुलिस स्टेशन में उसकी लाश मिली। सनी के शरीर पर गले के पास रस्सी के निशान पाए गए, जो उसके परिवार और स्थानीय लोगों के बीच संदेह का कारण बने। यह निशान संभावित रूप से साजिश या पुलिस की लापरवाही को दर्शाते हैं। परिवार के सदस्य और स्थानीय लोग आरोप लगा रहे हैं कि यह घटना किसी दुर्घटना का परिणाम नहीं हो सकती, और पुलिस व प्रीति के परिवार के बीच मिलीभगत हो सकती है।
परिवार का आरोप: लापरवाही या साजिश?
सनी के परिवार ने इसकी कड़ी निंदा की और कहा कि किशोर की मौत आत्महत्या या दुर्घटना के रूप में नहीं हो सकती। परिवार का कहना है कि सनी को पुलिस द्वारा ठीक से निगरानी में नहीं रखा गया, और यह सब एक साजिश का हिस्सा हो सकता है। परिवार ने आरोप लगाया कि इस मौत में पुलिस की लापरवाही के साथ-साथ प्रीति के परिवार का हाथ हो सकता है, जो उसे नुकसान पहुँचाने की कोशिश कर रहा था।
इस घटना के बाद नवादा में हिंसक प्रदर्शन शुरू हो गए। लोग पुलिस स्टेशन के बाहर इकट्ठा हो गए और एक पुलिस वाहन को तोड़ दिया, साथ ही एक इमरजेंसी सेवा वाहन के टायर भी पंक्चर कर दिए। इस प्रदर्शन ने इलाके में तनाव बढ़ा दिया और सुबह से ही पुलिस और स्थानीय लोगों के बीच टकराव की स्थिति पैदा कर दी। लोग न्याय की मांग करने लगे और पुलिस के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की बात कहने लगे।
पुलिस का बयान और जांच की प्रक्रिया
नवादा के डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (डीएसपी) राकेश कुमार ने किशोर की मौत की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि इस मामले में एक प्रेम प्रसंग से संबंधित मामला दर्ज किया गया था और सनी को हिरासत में लिया गया था। उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस ने CCTV फुटेज की समीक्षा शुरू कर दी है और मामले की जांच जारी है।
हालांकि, अधिकारियों ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि जांच के दौरान किसी पुलिसकर्मी को निलंबित किया गया है या नहीं। इस मामले में कोई सख्त कार्रवाई न होने से लोगों के बीच और भी शंका और गुस्सा बढ़ गया है।
बिहार में पुलिस कस्टडी सुरक्षा पर सवाल
सनी कुमार की मौत ने एक बार फिर बिहार में पुलिस कस्टडी की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह घटना इस बात का प्रतीक बन गई है कि बिहार में कई बार पुलिस कस्टोड में लोगों की सुरक्षा खतरे में रहती है। ऐसी घटनाओं ने स्थानीय और मानवाधिकार संगठनों के बीच गहरी चिंता का माहौल बना दिया है। पुलिस पर आरोप हैं कि उन्होंने सनी को उचित सुरक्षा प्रदान नहीं की और उसकी जान को जोखिम में डाला।
लोगों ने पुलिस से पारदर्शिता की मांग की और कहा कि घटना के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। इसके साथ ही, पुलिस बल में सुधार की आवश्यकता को लेकर भी आवाजें उठने लगीं। यह घटना दर्शाती है कि पुलिस की कार्यप्रणाली में सुधार और निगरानी की आवश्यकता है ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ और जन आक्रोश
यह घटना राज्य में राजनीति का हिस्सा बन गई है, जहाँ विपक्षी दलों ने राज्य सरकार और पुलिस विभाग की कड़ी आलोचना की है। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार अपने पुलिस विभाग को सही तरीके से नियंत्रित नहीं कर पा रही है, जिससे इस तरह की घटनाएं घट रही हैं।
नवादा में लोग अब सनी कुमार के परिवार के साथ खड़े हैं और न्याय की मांग कर रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि इस मामले में जल्द ही न्याय मिलेगा और दोषियों को सजा मिलेगी।
सनी कुमार की पुलिस हिरासत में मौत ने बिहार में पुलिस व्यवस्था और कस्टडी सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठाए हैं। इस घटना ने यह साबित कर दिया है कि बिहार पुलिस में सुधार की आवश्यकता है और यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि हिरासत में लिए गए व्यक्तियों को पूरी सुरक्षा मिले।
स्थानीय पुलिस को मामले में पूरी पारदर्शिता बरतनी चाहिए और सनी की मौत के दोषियों को सजा दिलवानी चाहिए। इस घटना ने यह संदेश दिया है कि बिहार के कानून-व्यवस्था के तंत्र में तत्काल सुधार की जरूरत है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।



