बिहार के नवादा जिले में एक पुलिस कांस्टेबल का शव उनके किराए के घर में मिला, जिसे authorities आत्महत्या के रूप में संदिग्ध मान रही हैं। अमित कुमार, जो 2021 बैच के अधिकारी थे और औरंगाबाद जिले के हसपुरा के निवासी थे, शनिवार को नरेंद्र नगर सेक्टर ए में अपने घर में लटके हुए पाए गए।
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उत्पीड़न और जातिवाद आधारित भेदभाव के आरोप
अमित कुमार की मौत को उनके वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा किए गए उत्पीड़न के कारण माना जा रहा है। घटनास्थल से प्राप्त एक सुसाइड नोट में अमित ने दो वरिष्ठ अधिकारियों पर उत्पीड़न का आरोप लगाया है। इनमें से एक अधिकारी, इंस्पेक्टर मनोज सिन्हा, जो स्थानीय पुलिस लाइन्स में प्रशिक्षण के प्रभारी हैं, को जांच के दौरान निलंबित कर दिया गया है।
सुसाइड नोट में अमित ने आरोप लगाया कि उनके द्वारा ली गई छुट्टी को पहले तो मंजूरी दी गई थी, लेकिन बाद में उन्हें बार-बार छुट्टी लेने से रोक दिया गया। इसके अलावा, उनका कहना था कि उन्हें वरिष्ठ अधिकारियों के निजी कामों को करने के लिए मजबूर किया गया। इन आरोपों को उनके सहकर्मियों ने भी सत्यापित किया, जिन्होंने कहा कि अमित लगातार मानसिक उत्पीड़न का शिकार हो रहे थे। कुछ अधिकारियों ने जातिवाद आधारित भेदभाव की भी पुष्टि की, जो अमित की मानसिक स्थिति को और बिगाड़ने में सहायक था।
अमित के व्यक्तिगत संघर्ष और आत्महत्या से पहले की स्थिति
अमित कुमार की हाल ही में शादी हुई थी, और उनकी दुखद मौत ने उनके दोस्तों, परिवार और सहयोगियों को सदमे में डाल दिया है। मामले से जुड़े स्रोतों ने बताया कि अमित आत्महत्या से कुछ दिन पहले मानसिक तनाव से गुजर रहे थे। उन्होंने अपने जीवन के कठिन दौर को चुपचाप सहा था, जो उनके फैसले के पीछे की एक वजह हो सकती है।
शनिवार की सुबह अमित के दोस्तों ने उनका शव पाया और तुरंत स्थानीय authorities को सूचित किया। पुलिस घटनास्थल पर पहुंची और मामले की जांच शुरू की।
पुलिस और अधिकारियों की प्रतिक्रिया
घटना के बाद, नवादा के पुलिस अधीक्षक (SP) अभिनव धीमान, सदर एसडीपीओ हलस कुमार और अन्य स्थानीय पुलिस स्टेशन के अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे और जांच शुरू की। इसके अलावा, मगध रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (IG) क्षत्रानिल सिंह भी मौके पर पहुंचे और जांच की निगरानी की।
एसपी अभिनव धीमान ने कहा कि अमित की मौत के कारणों की गहन जांच की जा रही है। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि अगर किसी अधिकारी द्वारा कोई गलती पाई जाती है, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
जांच और भविष्य की कार्रवाई
जांच के साथ-साथ अब यह मुद्दा भी उठ रहा है कि पुलिस कर्मचारियों के कामकाजी माहौल में सुधार की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में ऐसे मामलों को रोका जा सके। इंस्पेक्टर मनोज सिन्हा का निलंबन इस बात का संकेत है कि authorities आरोपों को गंभीरता से ले रही हैं और अमित कुमार को न्याय दिलाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह जांच पुलिस विभाग के अंदर काम करने वाले कर्मचारियों के अधिकारों और मानसिक स्वास्थ्य पर एक महत्वपूर्ण सवाल उठाती है।
यह मामला पुलिस कांस्टेबल्स के बीच उत्पीड़न और भेदभाव की समस्याओं की गंभीरता को उजागर करता है, जो न केवल उनके मानसिक स्वास्थ्य पर असर डालता है, बल्कि उनके कार्य प्रदर्शन और व्यक्तिगत जीवन को भी प्रभावित करता है। अधिकारियों का कहना है कि वे इस मामले की पूरी गंभीरता से जांच करेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि भविष्य में इस तरह की घटनाएं नहीं हों।
इस मामले से यह भी प्रतीत होता है कि पुलिस विभाग में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए मानसिक स्वास्थ्य और कार्यस्थल पर उत्पीड़न से निपटने के लिए तत्काल कदम उठाने की जरूरत है।



