बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कर्पूरी ठाकुर के जन्मस्थान दौरे ने सियासी हलचल बढ़ा दी है। समस्तीपुर जिले के कर्पूरीग्राम पहुंचकर प्रधानमंत्री ने पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत कर्पूरी ठाकुर को श्रद्धांजलि दी और उनके आदर्शों का उल्लेख करते हुए अपनी चुनावी मुहिम की शुरुआत की। वहीं, कांग्रेस ने इस दौरे को लेकर पीएम मोदी और बीजेपी पर तीखा हमला बोला है।
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कांग्रेस ने आरोप लगाया कि 1979 में Jan Sangh, जिससे बीजेपी की नींव पड़ी, ने ही कर्पूरी ठाकुर की सरकार गिरा दी थी। पार्टी का कहना है कि ठाकुर जब OBC आरक्षण लागू कर रहे थे, तब जनसंघ और आरएसएस ने उनके खिलाफ साजिश रची।
कांग्रेस का पीएम मोदी पर तीखा हमला
पीएम मोदी के दौरे के तुरंत बाद कांग्रेस ने बयान जारी कर कहा कि जो लोग कभी कर्पूरी ठाकुर के सामाजिक न्याय की नीति के विरोधी थे, वे आज उनके नाम पर राजनीति कर रहे हैं। कांग्रेस महासचिव Jairam Ramesh ने कहा, “क्या यह सच नहीं है कि जिस जनसंघ से बीजेपी का जन्म हुआ, उसी ने कर्पूरी ठाकुर की सरकार को गिराने की साजिश रची थी? क्या यह सच नहीं है कि उस वक्त आरएसएस और जनसंघ ने OBC आरक्षण का विरोध किया था?”
रमेश ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सामाजिक न्याय की बात करते हैं, लेकिन उनकी सरकार ने न तो जातीय जनगणना की मांग को स्वीकार किया और न ही आरक्षण बढ़ाने की दिशा में कोई कदम उठाया।
1979 का राजनीतिक विवाद फिर चर्चा में
कर्पूरी ठाकुर, जिन्हें “जननायक” कहा जाता है, बिहार की राजनीति में सामाजिक समानता के प्रतीक माने जाते हैं। 1979 में जब उन्होंने पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण की नीति लागू की, तब राज्य की राजनीति में भूचाल आ गया था।
कांग्रेस ने कहा कि ठाकुर की सरकार का पतन जनसंघ और आरएसएस के दबाव का नतीजा था। पार्टी का दावा है कि आज वही ताकतें ठाकुर के नाम का इस्तेमाल कर चुनावी लाभ उठाने की कोशिश कर रही हैं।
जयराम रमेश ने कहा, “प्रधानमंत्री की यह ‘Trouble Engine Sarkar’ नहीं चाहती कि बिहार में SC, ST, OBC और EBC वर्गों को 65% आरक्षण मिले। यह वही सरकार है जिसने जातीय जनगणना की मांग करने वालों को Urban Naxal कहा था।”
पीएम मोदी का कर्पूरीग्राम दौरा और दो बड़ी रैलियां
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को समस्तीपुर के कर्पूरीग्राम पहुंचे और पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर को श्रद्धांजलि दी। इसके बाद उन्होंने Samastipur और Begusarai में दो बड़ी चुनावी रैलियों को संबोधित किया।
पीएम मोदी ने कहा कि केंद्र सरकार ने बीते वर्ष कर्पूरी ठाकुर को Bharat Ratna देकर उन्हें वह सम्मान दिया, जिसके वे लंबे समय से हकदार थे। उन्होंने कहा, “कर्पूरी ठाकुर ने अपना जीवन गरीबों, पिछड़ों और वंचितों के अधिकारों की रक्षा के लिए समर्पित किया था। उनकी सोच आज भी हमारे लिए प्रेरणा है।”
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिहार में पिछड़े वर्ग के मतदाताओं तक पहुंचने के लिए यह दौरा एक रणनीतिक कदम है। चुनाव से पहले बीजेपी कर्पूरी ठाकुर की छवि के माध्यम से सामाजिक न्याय और विकास का संदेश देने की कोशिश में है।
कांग्रेस का आरोप: सरकार ने जातीय जनगणना से किया इनकार
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि प्रधानमंत्री ने बार-बार पिछड़ों के हितों की बात की, लेकिन जातीय जनगणना से पीछे हट गए। उन्होंने कहा, “जब लोगों ने जातीय जनगणना की मांग की, तो बीजेपी सरकार ने उसे Urban Naxal एजेंडा बताया। यहां तक कि संसद में भी यह मुद्दा खारिज कर दिया गया।”
रमेश ने कहा कि बीजेपी और उसके सहयोगी बिहार में 65% आरक्षण लागू करने की बात तक नहीं करते, जबकि तमिलनाडु की कांग्रेस सरकार ने 1994 में ही 69% आरक्षण लागू कर दिया था।
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का सियासी परिदृश्य
बिहार में इस बार दो चरणों में चुनाव होंगे — 6 नवंबर और 11 नवंबर, जबकि 17 नवंबर को नतीजे घोषित किए जाएंगे। 243 विधानसभा सीटों पर इस बार मुकाबला बेहद दिलचस्प माना जा रहा है।
NDA (National Democratic Alliance) की ओर से बीजेपी ने अपने प्रचार अभियान की शुरुआत पीएम मोदी की रैलियों से की है, जबकि INDIA गठबंधन का नेतृत्व RJD और Congress कर रहे हैं।
बीजेपी की रणनीति है कि वह केंद्र सरकार की योजनाओं, विकास और कर्पूरी ठाकुर जैसी शख्सियतों का उल्लेख कर समाज के सभी वर्गों को साधे। वहीं कांग्रेस और आरजेडी सामाजिक न्याय, बेरोजगारी और जातीय जनगणना जैसे मुद्दों पर वोटरों को आकर्षित करने की कोशिश कर रहे हैं।
तेजस्वी यादव का सवाल: NDA का चेहरा कौन?
आरजेडी नेता Tejashwi Yadav ने एनडीए पर निशाना साधते हुए पूछा कि बिहार चुनाव में अब तक मुख्यमंत्री पद का चेहरा क्यों घोषित नहीं किया गया है। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री हर जगह रैलियां कर रहे हैं, लेकिन जनता यह जानना चाहती है कि अगर NDA जीता तो मुख्यमंत्री कौन बनेगा?”
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि बिहार में बीजेपी की रणनीति पीएम मोदी के नेतृत्व के इर्द-गिर्द केंद्रित है ताकि स्थानीय स्तर पर किसी तरह की गुटबाजी न हो।
कर्पूरी ठाकुर की विरासत और परिवार की राजनीतिक उपस्थिति
कर्पूरी ठाकुर को बिहार का सबसे सम्मानित नेता माना जाता है, खासकर पिछड़े और मजदूर वर्ग में उनकी लोकप्रियता आज भी बरकरार है। उनकी नीतियों ने बिहार की राजनीति की दिशा बदल दी थी।
वर्तमान में उनके बेटे Ramnath Thakur राज्यसभा सांसद और केंद्र सरकार में मंत्री हैं। वहीं उनकी पौत्री Jagruti Thakur इस बार मोरवा विधानसभा सीट से Jan Suraaj Party की उम्मीदवार हैं। यह दिखाता है कि कर्पूरी ठाकुर की राजनीतिक विरासत आज भी बिहार की राजनीति में गहराई से जमी हुई है।
कांग्रेस का हमला: ‘Trouble Engine Government’ ने किया सामाजिक न्याय से समझौता
कांग्रेस ने बीजेपी की “Double Engine Government” पर कटाक्ष करते हुए उसे “Trouble Engine Government” कहा। पार्टी ने कहा कि यह सरकार विकास के नाम पर केवल विभाजन की राजनीति कर रही है।
जयराम रमेश ने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी गरीबों और पिछड़ों की बात करते हैं, लेकिन उनकी नीतियां उसी वर्ग के खिलाफ हैं। अगर कर्पूरी ठाकुर आज जीवित होते, तो वे इस सरकार की नीति के सबसे बड़े विरोधी होते।”
पीएम मोदी का संदेश और चुनावी रणनीति
कर्पूरीग्राम से अपनी चुनावी यात्रा की शुरुआत करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि एनडीए सरकार गरीबों के कल्याण के लिए काम कर रही है। उन्होंने PM Awas Yojana, Ayushman Bharat, और शिक्षा योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इन योजनाओं के माध्यम से सरकार समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाने का काम कर रही है।
विपक्ष ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री का यह दौरा पूरी तरह चुनावी रणनीति का हिस्सा है। कांग्रेस और आरजेडी का कहना है कि बीजेपी भावनात्मक प्रतीकों का इस्तेमाल कर रही है, लेकिन रोजगार, शिक्षा और सामाजिक न्याय जैसे असली मुद्दों पर चुप है।
बिहार में सियासी टकराव हुआ तेज
बिहार का चुनावी माहौल अब पूरी तरह गर्म हो चुका है। एक तरफ बीजेपी विकास और राष्ट्रवाद की बात कर रही है, वहीं विपक्षी दल जातीय जनगणना और आरक्षण को लेकर मोर्चा संभाले हुए हैं।
राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार का चुनाव केवल विकास पर नहीं, बल्कि identity politics और सामाजिक न्याय पर भी केंद्रित रहेगा। पीएम मोदी की रैलियों ने बीजेपी को शुरुआती बढ़त दी है, लेकिन विपक्ष इस बढ़त को चुनौती देने की तैयारी में है।
कर्पूरी ठाकुर की विरासत पर सियासी संघर्ष
प्रधानमंत्री मोदी का कर्पूरी ठाकुर के गांव से चुनावी अभियान शुरू करना केवल श्रद्धांजलि नहीं, बल्कि एक राजनीतिक संदेश भी है। बीजेपी इसे पिछड़े वर्ग के सम्मान से जोड़ रही है, जबकि कांग्रेस इसे अवसरवादी राजनीति बता रही है।
कर्पूरी ठाकुर की विचारधारा आज भी बिहार की राजनीति का केंद्र है। यही वजह है कि हर दल उनकी छवि और विरासत से खुद को जोड़ने की कोशिश कर रहा है।
जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं, बिहार की सियासत में इतिहास, आस्था और सत्ता की रणनीति एक बार फिर आमने-सामने खड़ी है।



