मखाना, जिसे फॉक्स नट के नाम से भी जाना जाता है, वर्षों से बिहार की खाद्य संस्कृति का अहम हिस्सा रहा है। परंपरागत रूप से यह गांवों के तालाबों में उगाया जाता रहा है और किसानों को इससे मौसमी आय ही मिल पाती थी। लंबे समय तक मखाना स्थानीय बाजारों तक ही सीमित रहा और इससे जुड़ी आर्थिक संभावनाएं भी सीमित थीं। अब हालात धीरे धीरे बदलते नजर आ रहे हैं।
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देश और दुनिया में healthy food की बढ़ती मांग ने मखाना को नई पहचान दिलाई है। पोषण से भरपूर मखाना अब केवल पारंपरिक खाद्य पदार्थ नहीं रह गया है, बल्कि रोजगार और entrepreneurship का नया माध्यम बनता जा रहा है। बिहार में यह बदलाव ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने लगा है।
मखाना की बढ़ती मांग और बदलता बाजार
स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता ने उपभोक्ताओं की पसंद को बदला है। कम फैट और अधिक प्रोटीन वाला मखाना अब urban market में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी इसकी मांग लगातार बढ़ रही है। इससे मखाना की commercial value में उल्लेखनीय इजाफा हुआ है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जल संसाधनों और अनुकूल जलवायु के कारण बिहार मखाना उत्पादन के लिए स्वाभाविक रूप से उपयुक्त राज्य है। हालांकि, लंबे समय तक इस क्षेत्र में processing, branding और market linkage की कमी रही। इन्हीं चुनौतियों के बीच नए विचारों और निवेश की जरूरत महसूस की जा रही थी।
कटिहार से बदलाव की शुरुआत करने वाले युवा उद्यमी
इस बदलाव की कहानी में कटिहार के युवा उद्यमी Gulfraz की भूमिका अहम मानी जा रही है। उन्होंने वर्ष 2019 में सीमित संसाधनों के साथ अपनी शुरुआत की थी। उनका उद्देश्य स्पष्ट था कि बिहार के स्थानीय उत्पादों को बड़े बाजारों तक पहुंचाया जाए और किसानों को उनका सही मूल्य मिले।
वोकल फॉर लोकल और स्टार्टअप इंडिया जैसे राष्ट्रीय अभियानों से प्रेरित होकर, साथ ही बिहार सरकार की विकास योजनाओं के सहयोग से, उन्होंने मखाना किसानों को सीधे processing और marketing से जोड़ने का प्रयास किया। समय के साथ उनकी पहल को पहचान मिली और यह प्रयास Modi Makhana ब्रांड के रूप में सामने आया।
आधुनिक प्रोसेसिंग से बढ़ी गुणवत्ता
मखाना उद्योग में बड़ा बदलाव आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से आया है। नेशनल मखाना इंडस्ट्री की processing unit अब 7,000 वर्ग फुट से अधिक क्षेत्र में संचालित हो रही है। यहां मखाना की सफाई, ग्रेडिंग और पैकेजिंग आधुनिक मशीनों और पारंपरिक तरीकों के संयोजन से की जाती है।
इस प्रक्रिया से उत्पाद की गुणवत्ता और स्वच्छता में सुधार हुआ है। बेहतर quality control के कारण मखाना अब national और international markets के मानकों पर खरा उतरने लगा है। इससे किसानों को भी सीधा लाभ मिला है, क्योंकि अच्छी गुणवत्ता के बदले उन्हें बेहतर कीमत मिल रही है।
सीधे खरीद से किसानों को मिला फायदा
Gulfraz द्वारा शुरू की गई direct procurement व्यवस्था ने किसानों की स्थिति को मजबूत किया है। बिचौलियों की भूमिका कम होने से किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिलने लगा है। इससे उनकी आय में स्थिरता आई है और उत्पादन के प्रति उनका भरोसा बढ़ा है।
मखाना उद्योग के विस्तार से रोजगार के नए अवसर भी पैदा हुए हैं। processing units में काम करने से लेकर transport, packaging और logistics तक, कई स्तरों पर लोगों को काम मिल रहा है। ग्रामीण युवाओं के लिए यह local employment का अच्छा विकल्प बनता जा रहा है।
युवाओं के लिए नए अवसर और संभावनाएं
Gulfraz का मानना है कि मखाना सेक्टर में युवाओं के लिए अपार संभावनाएं हैं। खेती के साथ साथ processing, branding और export जैसे क्षेत्रों में भी युवा आगे आ सकते हैं। value addition से इस क्षेत्र में आय और रोजगार दोनों बढ़ाए जा सकते हैं।
branding और बेहतर packaging के जरिए मखाना को premium market में पहचान मिल रही है। digital platforms के माध्यम से उत्पादों की पहुंच दूर दूर तक हो रही है। इससे बिहार के मखाना उत्पादों की visibility लगातार बढ़ रही है।
बिहार सरकार का सहयोग बना सहारा
मखाना उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए बिहार सरकार भी सक्रिय भूमिका निभा रही है। कृषि विभाग के माध्यम से मखाना की खेती के विस्तार के लिए subsidy दी जा रही है। किसान official online portal के जरिए आवेदन कर सकते हैं।
DBT portal पर पंजीकृत किसान area expansion scheme के तहत सहायता के पात्र हैं। यह योजना कटिहार, दरभंगा, मधुबनी और मुजफ्फरपुर सहित कुल 16 जिलों में लागू है। प्रति हेक्टेयर 0.97 लाख रुपये की लागत तय की गई है, जिससे बीज, इनपुट और कटाई जैसे खर्चों में मदद मिलती है।
घरेलू और वैश्विक बाजार में बढ़ती पहचान
मखाना के स्वास्थ्य लाभों को लेकर जागरूकता बढ़ने से domestic market में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है। retail chains और online platforms पर भी मखाना उत्पादों की उपलब्धता बढ़ी है। बेहतर processing के चलते export opportunities भी तेजी से खुल रही हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि branding और infrastructure पर इसी तरह काम होता रहा, तो बिहार जल्द ही मखाना उत्पादन और निर्यात का बड़ा केंद्र बन सकता है। इससे राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
परंपरा और आधुनिक सोच का संगम
बिहार में मखाना की यह यात्रा परंपरागत खेती और आधुनिक enterprise के मेल का उदाहरण बन रही है। सरकारी सहयोग, तकनीकी नवाचार और युवा entrepreneurship ने इस क्षेत्र को नई पहचान दी है। किसान अब केवल उत्पादक नहीं, बल्कि growing industry के अहम भागीदार बनते जा रहे हैं।
कटिहार के तालाबों से शुरू होकर global plates तक पहुंचती मखाना की यह कहानी रोजगार, आय और आत्मनिर्भरता की नई उम्मीद जगा रही है। आने वाले समय में यह फसल बिहार की आर्थिक तस्वीर को और मजबूत कर सकती है।
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