बिहार विधानसभा चुनावों के नजदीक आते ही भोजपुरी फिल्म स्टार खेसारी लाल यादव ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने घोषणा की है कि उनकी पत्नी चंदा देवी आगामी बिहार चुनावों में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के टिकट पर चुनावी मैदान में उतरेंगी। खेसारी लाल यादव का यह बयान राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है, क्योंकि उन्होंने इस मौके पर भोजपुरी सिनेमा के अपने साथी अभिनेता पवन सिंह की राजनीति पर भी तंज कसा है, जो हाल ही में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में शामिल हुए हैं।
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खेसारी लाल यादव की पत्नी चंदा देवी राजद से चुनाव लड़ेंगी
पटना में पत्रकारों से बातचीत करते हुए खेसारी लाल यादव ने यह स्पष्ट किया कि उनकी पत्नी चंदा देवी बिहार विधानसभा चुनावों में राजद के टिकट पर चुनाव लड़ेंगी। खेसारी का यह कदम उनके राजनीतिक रिश्तों को और मजबूत कर सकता है, क्योंकि उनका परिवार अब राजनीति में कदम रख रहा है। खेसारी लाल यादव का यह ऐलान राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि उनकी लोकप्रियता का असर बिहार के कई इलाकों में देखा जाता है और उनकी पत्नी की कैंडिडेसी से राजद को भी फायदा हो सकता है।
पवन सिंह पर तंज करते हुए किया कमेंट
खेसारी लाल यादव ने पवन सिंह की राजनीतिक यात्रा पर भी तंज कसा। पवन सिंह, जो भोजपुरी सिनेमा में अपनी दमदार पहचान रखते हैं, हाल ही में बीजेपी में शामिल हुए हैं। खेसारी ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा, “वह पहले गायक थे, लेकिन अब वह राजनीतिज्ञ बन गए हैं। उनका पावर अब वहीं से शुरू होगा।” यह टिप्पणी खेसारी ने एक व्यंग्यात्मक तरीके से की, जो पवन सिंह की राजनीति में प्रवेश को लेकर उनके असंतोष को व्यक्त करता है।
खेसारी की यह टिप्पणी उनके और पवन सिंह के बीच बढ़ते राजनीतिक मतभेदों को भी उजागर करती है, खासकर जब पवन सिंह ने बीजेपी को चुना और खेसारी लाल यादव राजद से जुड़ रहे हैं। खेसारी का यह बयान राजनीति में भावनाओं से परे न केवल एक व्यक्तिगत दृष्टिकोण का प्रतीक है, बल्कि यह भी दिखाता है कि राजनीति में किस तरह से रणनीतिक निर्णय लिए जाते हैं।
पवन सिंह और उपेन्द्र कुशवाहा की मुलाकात पर प्रतिक्रिया
हाल ही में पवन सिंह की एक हाई-प्रोफाइल बैठक उपेन्द्र कुशवाहा से हुई थी, जो राष्ट्रीय लोक मोर्चा के अध्यक्ष और राज्यसभा सदस्य हैं। इस बैठक ने राजनीति में कई सवाल खड़े कर दिए थे, क्योंकि पवन सिंह की राजनीतिक स्थिति को लेकर अटकलें तेज हो गई थीं। खेसारी ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “यह व्यक्तिगत था। वह पहले सही थे, और मुझे लगता है कि वह अब भी सही हैं। उनका अपना विचार है।” इस बयान से यह साफ होता है कि खेसारी ने पवन सिंह के राजनीतिक फैसलों को व्यक्तिगत मामला मानते हुए इसे ज्यादा महत्व नहीं दिया।
खेसारी ने यह भी कहा कि राजनीति में दोस्ती या दुश्मनी का कोई मतलब नहीं होता। उनके अनुसार, राजनीति के फैसले पूरी तरह से व्यक्तिगत और स्वार्थी होते हैं। “राजनीति में न तो भावना होती है, न दर्द। यह सिर्फ व्यापार और सौदा है,” खेसारी ने कहा। उनका यह बयान इस बात को दर्शाता है कि वह राजनीति को एक वास्तविक और व्यापारिक दृष्टिकोण से देखते हैं, जहां व्यक्तिगत भावनाएं नहीं, बल्कि सटीक रणनीति काम करती है।
पवन सिंह की राजनीति और बीजेपी की रणनीति
पवन सिंह का बीजेपी से जुड़ना और उनके संभावित उम्मीदवार के रूप में चुनावी मैदान में उतरने की संभावना ने बिहार की राजनीति में हलचल मचा दी है। पवन सिंह के बीजेपी में शामिल होने को राजपूत वोटों को साधने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। शाहाबाद क्षेत्र से उनकी उम्मीदवारी की चर्चा हो रही है, जहां उनकी प्रभावी मौजूदगी राजनीतिक समीकरणों को बदल सकती है।
बीजेपी में पवन सिंह की एंट्री ने इस चुनावी सत्र में राजनीतिक पानी में हलचल मचा दी है। उनकी फिल्मी लोकप्रियता और भोजपुरी सिनेमा में प्रभाव का फायदा बीजेपी को मिल सकता है, खासकर उन इलाकों में जहां उनका विशेष जनाधार है। यह कदम बीजेपी के लिए रणनीतिक हो सकता है, जो बिहार में एक मजबूत उपस्थिति बनाने की कोशिश कर रही है। पवन सिंह का पार्टी से जुड़ना और चुनावी मैदान में उतरने की संभावना, बीजेपी के लिए एक बड़ा राजनीतिक दांव हो सकता है।
भोजपुरी सितारों का बिहार राजनीति में प्रभाव
बिहार की राजनीति में भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री का एक महत्वपूर्ण स्थान है, और इसमें खेसारी लाल यादव और पवन सिंह जैसे सितारों की भूमिका बड़ी होती जा रही है। दोनों अभिनेता अपने-अपने क्षेत्रों में लोकप्रिय हैं, और उनका राजनीति में आना आम जनता के बीच काफी प्रभाव डाल सकता है। इन सितारों का चुनावी राजनीति में कदम रखना दर्शाता है कि बिहार में मनोरंजन उद्योग और राजनीति के बीच की सीमा अब और भी धुंधली हो गई है।
बीजेपी और राजद जैसी प्रमुख पार्टियों के लिए भोजपुरी सितारे एक महत्वपूर्ण रणनीतिक संपत्ति बन चुके हैं। उनके जनसमर्थन और मीडिया में उपस्थिति का असर चुनावी परिणामों पर सीधे तौर पर पड़ सकता है। भोजपुरी फिल्म उद्योग के इन दिग्गजों की लोकप्रियता का उपयोग राजनीतिक पार्टियां अपने फायदे के लिए करती हैं, ताकि वे अपनी पहचान और संदेश जनता तक प्रभावी तरीके से पहुंचा सकें।
राजनीति: व्यक्तिगत विचार और चुनावी रणनीतियाँ
खेसारी लाल यादव और पवन सिंह के बीच बढ़ती राजनीतिक खींचतान से यह स्पष्ट होता है कि बिहार की राजनीति केवल पार्टियों तक सीमित नहीं रही। अब इसमें फिल्मी हस्तियों का भी महत्वपूर्ण रोल हो गया है। खेसारी ने यह भी स्पष्ट किया कि राजनीति में भावनाएं नहीं होतीं, बल्कि यह एक व्यापार है, जहां फैसला रणनीतिक होता है। पवन सिंह के राजनीतिक निर्णयों को लेकर खेसारी का व्यंग्यात्मक दृष्टिकोण इस बात को प्रमाणित करता है कि चुनावी राजनीति में व्यक्तिगत विचार और निर्णय एक अहम भूमिका निभाते हैं।
इन दोनों अभिनेता की राजनीति में एंट्री यह दिखाती है कि बिहार में चुनावी समीकरण अब फिल्मों और मनोरंजन जगत के प्रभाव में हैं। यह बदलाव राजनीतिक रणनीति में एक नई दिशा दिखाता है, जहां पार्टियां अपनी चुनावी जीत के लिए स्टार पावर का इस्तेमाल करती हैं।
बिहार विधानसभा चुनावों के करीब आते हुए, खेसारी लाल यादव की पत्नी चंदा देवी का राजद के टिकट पर चुनाव लड़ने का फैसला और पवन सिंह की बीजेपी में एंट्री राज्य की राजनीति को और रोमांचक बना रहे हैं। भोजपुरी सिनेमा के ये दो दिग्गज अब राजनीति के मैदान में भी अपनी अलग-अलग पहचान बना रहे हैं। खेसारी के व्यंग्यात्मक टिप्पणियाँ और पवन सिंह की बीजेपी के साथ रणनीतिक जुड़ाव, दोनों ही बिहार की चुनावी राजनीति में नया मोड़ ला रहे हैं।
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि इन सितारों की राजनीतिक यात्रा बिहार की राजनीति को किस दिशा में मोड़ती है। दोनों के पास अपनी-अपनी लोकप्रियता है, और अब वे इस लोकप्रियता को अपनी पार्टी के समर्थन में बदलने की कोशिश करेंगे। इस चुनावी माहौल में भोजपुरी फिल्म उद्योग के ये दिग्गज महत्वपूर्ण राजनीतिक ताकत बनकर उभर सकते हैं।
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