बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय (BRABU) हमेशा अपनी अनोखी घटनाओं के लिए चर्चा में रहता है। इस बार, विश्वविद्यालय में स्नातक सेमेस्टर-2 (सत्र 2024-28) की परीक्षा की कॉपियों ने शिक्षकों को हैरान कर दिया। जब परीक्षक उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन कर रहे थे, तो उन्हें कॉपियों में उत्तर के बजाय शादी की मिन्नतें, रिश्वत देने के लालच और प्रेम पत्र जैसी बातें मिलीं।
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शादी की मिन्नतें और प्रेम पत्रों ने उड़ाए शिक्षकों के होश
इस बार परीक्षा में एक छात्र ने कॉपी में इमोशनल कार्ड खेलते हुए लिखा, “गुरुजी, अगर आपने मुझे पास नहीं किया तो मेरी शादी नहीं हो पाएगी। मेरी शादी की उम्र हो गई है। अगर आप मुझे पास कर देंगे, तो गुरु दक्षिणा के तौर पर आपको मिठाई खिलाऊंगा।” छात्र की इस गुहार ने सोशल मीडिया पर भी खूब सुर्खियां बटोरीं और चर्चा का विषय बन गई। शिक्षकों का यह कहना था कि छात्र पढ़ाई की बजाय शादी की चिंता में डूबे हुए हैं, जो एक गंभीर संकेत है।
कॉपियों में भारी ब्लंडर और अतरंगी जवाब
छात्रों की लापरवाही और उनके ज्ञान की स्थिति भी स्पष्ट रूप से सामने आई। एक छात्र ने प्रश्न के उत्तर में भारी गलती करते हुए पद्मावत के लेखक (मलिक मोहम्मद जायसी) का नाम पूछे जाने पर भारत के पहले राष्ट्रपति ‘डॉ. राजेंद्र प्रसाद’ का नाम लिख दिया। एक और छात्र ने तो उत्तर पुस्तिका को ही प्रेम पत्र में बदल दिया और उसमें “आई लव यू पूजा” लिख डाला। इस तरह के अतरंगी और गैर-शैक्षिक जवाबों ने शिक्षकों को चौंका दिया।
हिंदी विषय के अलावा छात्रों में इमोशनल ब्लैकमेलिंग की प्रवृत्ति
कॉपियों की जांच कर रहे परीक्षकों का कहना है कि इस तरह के अजीब जवाब उन छात्रों की कॉपियों में ज्यादा मिले हैं, जिनका मुख्य विषय हिंदी नहीं है। एक परीक्षक ने यह बताया कि छात्र अब उत्तर लिखने की बजाय पास होने के लिए इमोशनल ब्लैकमेलिंग का सहारा ले रहे हैं। मिठाई देने का वादा और निजी जीवन की बातों का उल्लेख अब कॉपियों में आम हो गया है।
शिक्षा प्रणाली और छात्रों की गंभीरता पर सवाल
यह घटना न केवल छात्रों की गंभीरता पर सवाल उठाती है, बल्कि यह वर्तमान शिक्षा प्रणाली की स्थिति को भी दर्शाती है, जहां छात्र बिना किसी तैयारी के परीक्षा हॉल में पहुंच रहे हैं। इस प्रकार की घटनाएं यह दिखाती हैं कि छात्र अपनी पढ़ाई को लेकर गंभीर नहीं हैं और इसीलिए परीक्षा के दौरान ऐसी स्थिति उत्पन्न हो रही है।
विश्वविद्यालय प्रशासन के लिए चुनौती
इस घटना ने विश्वविद्यालय प्रशासन के लिए एक चुनौती पेश की है। अब यह सवाल उठता है कि विश्वविद्यालय इस प्रकार की विसंगतियों को कैसे ठीक करेगा और परीक्षा की शुचिता को बनाए रखेगा। प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि छात्र परीक्षा में सच्चाई से भाग लें और इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जाएं।
बिहार के शिक्षा जगत में एक नई बहस
इन अजीब घटनाओं ने बिहार के शिक्षा जगत में एक नई बहस शुरू कर दी है। शिक्षकों, छात्रों और अभिभावकों के बीच इस विषय पर चर्चा हो रही है कि क्या इस तरह के व्यवहार को सही ठहराया जा सकता है। यह घटना यह सवाल भी खड़ा करती है कि क्या छात्रों को सही दिशा में शिक्षा दी जा रही है और क्या वे अपनी जिम्मेदारी समझ रहे हैं।
बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय में हुई यह घटना बिहार के शिक्षा व्यवस्था में गंभीर समस्याओं को उजागर करती है। छात्रों की लापरवाही, इमोशनल ब्लैकमेलिंग, और गैर-शैक्षिक उत्तरों ने शिक्षकों को हद से ज्यादा हैरान कर दिया है। विश्वविद्यालय प्रशासन को इस प्रकार की घटनाओं को गंभीरता से लेकर कदम उठाने होंगे। छात्रों को यह समझाना होगा कि शिक्षा और परीक्षा का उद्देश्य केवल अच्छे अंक प्राप्त करना नहीं है, बल्कि यह उनके भविष्य के निर्माण का महत्वपूर्ण हिस्सा है।



