सर्दियों के मौसम में पटना का प्राकृतिक नजारा और भी जीवंत हो गया है। शहर के मुख्य सचिवालय के पास स्थित राजधानी जलाशय इन दिनों हजारों प्रवासी और स्थानीय पक्षियों का ठिकाना बना हुआ है। जलाशय में पक्षियों की चहचहाहट और उनकी उड़ान ने इस पूरे क्षेत्र को एक अनोखी पहचान दे दी है। यह दृश्य न केवल मनमोहक है, बल्कि पर्यावरण प्रेमियों और Bird Watching के शौकीनों के लिए खास आकर्षण बन गया है।
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जैसे ही सुबह की धूप जलाशय की सतह पर पड़ती है और शाम को सूरज ढलता है, चारों ओर पक्षियों का कलरव गूंजने लगता है। इस वर्ष सर्दियों की शुरुआत से ही राजधानी जलाशय में करीब चार से पांच हजार प्रवासी पक्षियों की मौजूदगी दर्ज की गई है। पर्याप्त जलस्तर, स्वच्छ वातावरण और प्राकृतिक भोजन की उपलब्धता ने इस जलाशय को पक्षियों के लिए सुरक्षित और अनुकूल स्थान बना दिया है।
हरियाली और शांति ने बनाया सुरक्षित आश्रय
जलाशय के चारों ओर फैली हरियाली और शांत वातावरण प्रवासी पक्षियों को यहां लंबे समय तक ठहरने के लिए प्रेरित कर रहा है। खुले जल क्षेत्र और आसपास के पेड़-पौधे पक्षियों को आराम, भोजन और सुरक्षा प्रदान करते हैं। यही वजह है कि हर साल सर्दियों में यह इलाका पक्षियों से गुलजार हो जाता है।
यहां प्रमुख रूप से कांब डक, लालसर, गडवाल, कूट, पिनटेल और लेसर विसलिंग डक जैसी प्रजातियां देखी जा रही हैं। इनके अलावा स्थानीय पक्षियों में हाउस क्रो, कॉमन मैना, एशियन कोयल, स्पॉटेड डव और कॉलर्ड डव की भी अच्छी संख्या मौजूद है। इन सभी पक्षियों की सामूहिक आवाजें जलाशय की प्राकृतिक सुंदरता को और बढ़ा देती हैं।
रूस से ब्राज़ील तक के पक्षियों की मौजूदगी
राजधानी जलाशय की सबसे खास बात यह है कि यहां केवल आसपास के इलाकों से ही नहीं, बल्कि रूस, चीन, तिब्बत, नॉर्थ यूरोप, ब्राज़ील, ईरान, अफगानिस्तान और उत्तरी अमेरिका जैसे दूर-दराज के क्षेत्रों से भी पक्षी पहुंच रहे हैं। यह दर्शाता है कि यह जलाशय अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रवासी पक्षियों के लिए एक महत्वपूर्ण ठहराव स्थल बन चुका है।
पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, पक्षी Migration के दौरान उन स्थानों का चयन करते हैं जहां उन्हें अनुकूल मौसम, भोजन और सुरक्षा मिल सके। राजधानी जलाशय इन सभी मानकों पर खरा उतरता है। यहां मानव हस्तक्षेप अपेक्षाकृत कम है, जिससे पक्षियों को प्राकृतिक वातावरण में रहने का अवसर मिलता है।
जल और जैव विविधता का गहरा संबंध
विशेषज्ञ बताते हैं कि जलाशय में पानी की पर्याप्त मात्रा से जलीय वनस्पतियों और कीट-पतंगों का प्राकृतिक विकास होता है। यही जीव पक्षियों के लिए मुख्य भोजन का स्रोत बनते हैं। इस प्रकार जलाशय का पारिस्थितिकी तंत्र पक्षियों के जीवन चक्र को सहारा देता है।
शांत वातावरण और भोजन की उपलब्धता के कारण कई पक्षी यहां पूरे सर्दी मौसम में ठहरते हैं। कुछ पक्षी आगे की यात्रा से पहले यहां विश्राम करते हैं। इससे यह जलाशय न केवल अस्थायी, बल्कि महत्वपूर्ण विश्राम स्थल बन गया है।
प्रकृति प्रेमियों के लिए पसंदीदा स्थान
राजधानी जलाशय अब केवल पक्षियों का ठिकाना ही नहीं रहा, बल्कि यह प्रकृति प्रेमियों, मॉर्निंग वॉक करने वालों और फोटोग्राफरों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बन गया है। हर सुबह और शाम लोग दूरबीन और कैमरों के साथ यहां पहुंचते हैं और विभिन्न प्रजातियों के पक्षियों को निहारते हैं।
इस गतिविधि से स्थानीय लोगों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता भी बढ़ रही है। बच्चे और युवा प्रकृति को करीब से देखने और समझने का अवसर पा रहे हैं, जिससे उनमें जैव विविधता के प्रति संवेदनशीलता विकसित हो रही है।
लंबी यात्रा के बाद मिलता है सुकून
प्रवासी पक्षियों की यात्रा बेहद लंबी और चुनौतीपूर्ण होती है। हजारों किलोमीटर की उड़ान के बाद वे ऐसे स्थानों की तलाश करते हैं, जहां मौसम अनुकूल हो और भोजन आसानी से उपलब्ध हो सके। इस वर्ष राजधानी जलाशय में ठंड का स्तर और जल की स्थिति पक्षियों के लिए अनुकूल रही, जिससे उन्होंने यहां ठहराव किया।
इसके अलावा जलाशय के आसपास हरियाली होने से पक्षियों को सुरक्षित आश्रय और घोंसले बनाने की सुविधा भी मिलती है। यह स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने में सहायक है।
शहर में प्रकृति का जीवंत उदाहरण
राजधानी जलाशय का यह दृश्य स्थानीय लोगों के लिए बेहद आनंददायक है। सुबह और शाम पक्षियों की उड़ान और उनके समूह लोगों को मंत्रमुग्ध कर देते हैं। यह अनुभव न केवल मानसिक शांति देता है, बल्कि शहर के बीच प्रकृति की मौजूदगी का अहसास भी कराता है।
फोटोग्राफर यहां आकर विभिन्न प्रजातियों के पक्षियों की तस्वीरें और वीडियो रिकॉर्ड कर रहे हैं। यह स्थान अब Patna के उन चुनिंदा इलाकों में शामिल हो गया है, जहां प्रकृति और शहर का सुंदर संगम देखने को मिलता है।
संरक्षण से बढ़ेगा आकर्षण
पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि यदि राजधानी जलाशय का संरक्षण इसी तरह किया जाता रहा, तो आने वाले वर्षों में यहां पक्षियों की संख्या और प्रजातियां दोनों बढ़ सकती हैं। जल की स्वच्छता और शांत वातावरण बनाए रखना इसके लिए बेहद जरूरी है।
संक्षेप में कहा जाए तो राजधानी जलाशय इन दिनों प्रवासी और स्थानीय पक्षियों के लिए आदर्श स्थल बन चुका है। रूस, ब्राज़ील और अन्य देशों से आए ये विदेशी मेहमान न केवल पटना की सुंदरता बढ़ा रहे हैं, बल्कि यह भी साबित कर रहे हैं कि यदि प्रकृति का सही तरीके से संरक्षण किया जाए, तो शहरी क्षेत्र भी जैव विविधता से भरपूर बन सकते हैं।
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