बिहार के भागलपुर जिले में गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है और हालात फिर से चिंताजनक हो गए हैं। जल संसाधन विभाग के अनुसार शनिवार शाम पांच बजे जलस्तर 33.62 मीटर तक पहुंच गया, जो खतरे के निशान 33.68 मीटर से महज छह सेंटीमीटर नीचे था। बीते 24 घंटे में गंगा 15 सेंटीमीटर बढ़ी जबकि 25 अगस्त से 30 अगस्त के बीच जलस्तर लगभग एक मीटर ऊपर गया।
जल संसाधन विभाग के कार्यपालक अभियंता आदित्य प्रकाश ने कहा कि गंगा का जलस्तर रविवार को भी बढ़ेगा और इसके खतरे के निशान पार करने की आशंका है। हालांकि उन्होंने उम्मीद जताई कि एक-दो दिनों में जलस्तर स्थिर होगा और उसके बाद कमी आनी शुरू होगी।
निचले इलाकों में पानी भरने से लोगों की परेशानी
गंगा के बढ़ते जलस्तर ने भागलपुर शहर और आसपास के निचले इलाकों में स्थिति गंभीर कर दी है। बूढ़ानाथ, दीपनगर, मानिक सरकार घाट, किलाघाट और टीएमबीयू प्रशासनिक भवन के पीछे तक बाढ़ का पानी पहुंच गया है। कई घरों की चारदीवारी तक पानी भर गया है, जिससे लोगों को मुख्य सड़कों तक आने-जाने में दिक्कत हो रही है।
सुल्तानगंज में गंगा का जलस्तर 35.42 मीटर रिकॉर्ड किया गया, जो खतरे के निशान 34.50 मीटर से 92 सेंटीमीटर ऊपर है। वहीं कहलगांव में जलस्तर 32 मीटर तक पहुंच गया, जो खतरे के निशान से 91 सेंटीमीटर ऊपर है।
कटाव स्थिर लेकिन दबाव बढ़ा
सबौर प्रखंड क्षेत्र में गंगा कटाव पिछले दो दिनों से स्थिर है, लेकिन जलस्तर बढ़ने से दबाव लगातार बना हुआ है। कहलगांव में गंगा अपने रौद्र रूप में इस्माईलपुर-बिंदटोली के तटबंध के पास बह रही है। अधिकारी मानते हैं कि पिछले चार-पांच दिनों में लगातार बढ़ते जलस्तर ने तटबंध पर दबाव बढ़ा दिया है, लेकिन विभाग लगातार निगरानी कर रहा है।
बुद्धूचक से बिंदटोली के बीच कई जगह खतरा किसी भी समय बढ़ सकता है। इसी वजह से विभाग ने 24 घंटे निगरानी के लिए अलग-अलग टीमें तैनात की हैं।
गांवों और स्कूलों में घुसा बाढ़ का पानी
कहलगांव के ग्रामीण इलाकों जैसे प्रशस्तिडीह, कोदवार, घोघा, जानीडीह, भोलसर, एकचारी और ओगरी पंचायतों के निचले हिस्सों में बाढ़ का पानी घरों में घुस गया है। भोलसर उच्च माध्यमिक विद्यालय में चार से पांच फीट तक पानी भर गया। शनिवार तक पढ़ाई-लिखाई की प्रक्रिया जारी रही, लेकिन अब हालात सामान्य शिक्षा व्यवस्था के लिए मुश्किल बन गए हैं।
इस साल तीसरी बार गंगा का जलस्तर बढ़ा
नाथनगर दियारा क्षेत्र के शंकरपुर, रत्तीपुर बैरिया, श्रीरामपुर और गोसाईंदासपुर गांवों की सड़कों पर फिर से पानी भर गया है। 20 से 25 अगस्त के बीच पानी घटने पर लोगों को उम्मीद थी कि अब राहत मिलेगी, लेकिन जलस्तर बढ़ने से निराशा गहरी हो गई है।
टीएनबी कॉलेजिएट मैदान में शरण लिए बच्ची यादव ने कहा कि इस साल गंगा तीसरी बार बढ़ रही है। पानी घटने का नाम ही नहीं ले रहा और लगता है कि दशहरा तक लोग यहीं रहेंगे।
कोसी नदी भी उफान पर
गंगा के साथ-साथ कोसी नदी का जलस्तर भी तेजी से बढ़ रहा है। नवगछिया सीमा पर स्थित कुरसेला में शनिवार दोपहर दो बजे कोसी का जलस्तर 30.55 मीटर रिकॉर्ड किया गया। यह खतरे के निशान 30 मीटर से 55 सेंटीमीटर ऊपर था।
इससे नवगछिया अनुमंडल के तटबंधों पर पानी का दबाव बढ़ गया है। शाहकुंड प्रखंड के निचले इलाकों में भी बाढ़ का पानी फैलना शुरू हो गया है। किसानों की चिंताएं बढ़ गई हैं क्योंकि धान की फसल पहले ही नष्ट हो चुकी है और जो थोड़ी बची है वह भी डूबने के कगार पर है।
दैनिक जीवन और खेती पर असर
लगातार बढ़ते जलस्तर से लोगों का सामान्य जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। कई सड़कें डूब चुकी हैं और आवागमन बाधित हो गया है। प्रभावित इलाकों में दुकानें जल्दी बंद हो रही हैं और लोग सुरक्षित स्थानों की तलाश में हैं।
खेती पर भी गहरा असर पड़ा है। शाहकुंड और नवगछिया में धान की फसल पूरी तरह से डूब गई है। पशुपालकों के सामने चारे की समस्या खड़ी हो गई है क्योंकि चरागाह पानी में डूब चुके हैं।
प्रशासन की तैयारी और राहत कार्य
जल संसाधन विभाग ने सभी बांधों और तटबंधों पर निगरानी बढ़ा दी है। अभियंता और बाढ़ प्रबंधन टीमें लगातार सक्रिय हैं। कार्यपालक अभियंता आदित्य प्रकाश ने कहा कि विभाग पूरी तरह सतर्क है और हर स्थिति पर नजर रख रहा है।
राहत शिविरों में विस्थापित परिवारों को अस्थायी ठिकाना दिया गया है। भोजन और चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है, लेकिन लोगों का कहना है कि संसाधन अभी भी पर्याप्त नहीं हैं।
भागलपुर और आसपास का इलाका गंगा और कोसी की बढ़ती धारा से एक बार फिर प्रभावित हो गया है। लगातार बढ़ते जलस्तर ने हजारों लोगों की जिंदगी को प्रभावित किया है। प्रशासन उम्मीद जता रहा है कि आने वाले दो दिनों में जलस्तर स्थिर होगा, लेकिन तब तक लोग भय और असुरक्षा के बीच जीने को मजबूर हैं।
Discover more from
Subscribe to get the latest posts sent to your email.