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बिहार के सरकारी स्कूलों में जनवरी और फरवरी में बच्चों को अंडा और मौसमी फल देने का फैसला

बिहार सरकार ने सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए एक अहम निर्णय लिया है। सर्दी के मौसम में बच्चों को अतिरिक्त पोषण देने के उद्देश्य से जनवरी और फरवरी माह में मिड डे मील के साथ अंडा और मौसमी फल भी उपलब्ध कराए जाएंगे। सरकार का मानना है कि ठंड के मौसम में बच्चों की पोषण जरूरत बढ़ जाती है।

यह व्यवस्था अस्थायी रूप से केवल दो महीनों के लिए लागू की गई है। शिक्षा विभाग के अनुसार, मार्च से मिड डे मील की पुरानी व्यवस्था और दरें फिर से प्रभावी हो जाएंगी।

शिक्षा विभाग ने तय की अस्थायी दरें

इस फैसले को लागू करने के लिए शिक्षा विभाग ने अंडा और मौसमी फल की अस्थायी दरें तय कर दी हैं। यह दरें सिर्फ जनवरी और फरवरी माह के लिए निर्धारित की गई हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि इन दो महीनों के बाद पहले से तय दरों पर ही खरीद की जाएगी।

मिड डे मील योजना के निदेशक विनायक मिश्र ने इस संबंध में राज्य के सभी जिला कार्यक्रम अधिकारियों को पत्र जारी किया है। पत्र में निर्देश दिया गया है कि जनवरी और फरवरी में अंडा और मौसमी फल की खरीद अधिकतम छह रुपये प्रति यूनिट की दर से की जाए।

कम दर मिलने पर सस्ती खरीद की अनुमति

निदेशक विनायक मिश्र ने यह भी साफ किया है कि यह दर अधिकतम सीमा है। जिन जिलों में अंडा या मौसमी फल इससे कम कीमत पर उपलब्ध हैं, वहां कम दर पर ही खरीद की जाएगी। इसका उद्देश्य योजना पर अनावश्यक आर्थिक बोझ को रोकना है।

शिक्षा विभाग का कहना है कि स्थानीय बाजार की स्थिति को ध्यान में रखते हुए जिलों को लचीलापन दिया गया है। इससे Mid Day Meal योजना का संचालन बिना किसी बाधा के किया जा सकेगा।

अतिरिक्त खर्च की भरपाई की व्यवस्था

निर्देशों में यह भी उल्लेख किया गया है कि यदि किसी जिले में विशेष परिस्थितियों के कारण छह रुपये प्रति यूनिट तक की दर पर खरीद करनी पड़ती है, तो उससे होने वाले अतिरिक्त खर्च की प्रतिपूर्ति उपलब्ध राशि से की जाएगी।

विभाग ने यह सुनिश्चित किया है कि अतिरिक्त व्यय के कारण योजना के क्रियान्वयन में कोई रुकावट न आए। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि बच्चों को समय पर भोजन उपलब्ध कराया जाए।

सर्दियों में क्यों जरूरी है अतिरिक्त पोषण

शिक्षा विभाग का मानना है कि winter season में बच्चों को अतिरिक्त पोषण की आवश्यकता होती है। ठंड के कारण बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो सकती है। अंडा और मौसमी फल बच्चों को जरूरी ऊर्जा और पोषक तत्व प्रदान करते हैं।

अंडा प्रोटीन का अच्छा स्रोत माना जाता है, जबकि मौसमी फल शरीर की immunity को मजबूत करने में मदद करते हैं। इससे बच्चों के शारीरिक विकास के साथ-साथ पढ़ाई में एकाग्रता भी बढ़ती है।

पढ़ाई और सेहत दोनों पर पड़ेगा सकारात्मक असर

सरकारी अधिकारियों का कहना है कि बेहतर पोषण मिलने से बच्चों की उपस्थिति और सीखने की क्षमता में सुधार होगा। सर्दी के मौसम में बीमार पड़ने वाले बच्चों की संख्या कम होने की उम्मीद है।

शिक्षकों का भी मानना है कि संतुलित आहार मिलने से छात्र अधिक सक्रिय रहते हैं। इससे कक्षा में उनकी भागीदारी और ध्यान केंद्रित करने की क्षमता बढ़ती है।

मार्च से फिर लागू होंगी पुरानी दरें

शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह व्यवस्था पूरी तरह अस्थायी है। फरवरी के बाद, यानी मार्च माह से अंडा और मौसमी फल की दर फिर से पांच रुपये प्रति यूनिट कर दी जाएगी। इसके बाद Mid Day Meal की नियमित व्यवस्था लागू होगी।

हालांकि, विभाग का मानना है कि यह पहल बच्चों के स्वास्थ्य के प्रति सरकार की गंभीरता को दर्शाती है।

लाखों बच्चों को मिलेगा लाभ

बिहार के सरकारी स्कूलों में लाखों बच्चे प्रतिदिन मिड डे मील योजना का लाभ लेते हैं। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह योजना बच्चों के पोषण का एक अहम आधार है।

सर्दियों में अंडा और फल शामिल होने से बच्चों को अतिरिक्त सुरक्षा मिलेगी। इससे अभिभावकों में भी सरकार की योजनाओं को लेकर भरोसा मजबूत होगा।

बच्चों के भविष्य पर सरकार का फोकस

कुल मिलाकर, यह फैसला दिखाता है कि राज्य सरकार बच्चों की सेहत और भविष्य को लेकर सजग है। पोषण और शिक्षा को जोड़कर देखने की यह सोच लंबे समय में सकारात्मक परिणाम दे सकती है।

जनवरी और फरवरी में बदला हुआ Mid Day Meal मेन्यू बच्चों को सर्दी के मौसम में स्वस्थ रखने में मदद करेगा। यह पहल न केवल nutrition support सुनिश्चित करेगी, बल्कि सरकारी स्कूलों की भूमिका को भी मजबूत बनाएगी।

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