बिहार सरकार द्वारा शुरू की गई मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना, जिसमें महिलाओं को ₹10,000 की मदद दी जा रही है, ने शहरी क्षेत्रों में महिलाओं के बीच अभूतपूर्व उत्साह उत्पन्न किया है। इस योजना के तहत अब तक 10 लाख से अधिक नई आवेदन शहरी इलाकों से प्राप्त हुए हैं, जो इस महिला रोजगार योजना की भारी लोकप्रियता को दर्शाता है। राज्य विधानसभा चुनावों से पहले यह योजना बिहार की शहरी महिलाओं में रोजगार और स्व-रोजगार के अवसरों को लेकर नई उम्मीदें जगा रही है।
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शहरी इलाकों में आवेदन की बाढ़
शहरी भागीदारी में विस्फोटक वृद्धि
इस योजना का शहरी इलाकों पर प्रभाव बहुत अधिक देखा गया है। योजना की घोषणा के कुछ ही हफ्तों के भीतर शहरी महिलाओं से 10 लाख आवेदन प्राप्त हुए, जो कि एक अभूतपूर्व बदलाव है क्योंकि जीविका कार्यक्रम पहले मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्रों के लिए था।
आवेदन का विवरण:
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कुल आवेदन: 1.14 करोड़ से अधिक महिलाओं ने राज्यभर में आवेदन किया।
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शहरी आवेदन: 10 लाख (कुल आवेदन का लगभग 9%),
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ग्रामीण आवेदन: 1.11 करोड़,
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नए शहरी SHG सदस्यता अनुरोध: 4.04 लाख महिलाएं शहरी समूहों में शामिल होना चाहती हैं।
शहरी विस्तार योजना का सफल होना
सरकार की तीन साल पुरानी शहरी विस्तार रणनीति का यह उभार सरकार के प्रयासों की सफलता को साबित करता है। शहरी विकास विभाग के आंकड़ों के अनुसार, जबकि जीविका कार्यक्रम पारंपरिक रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित होता था, पिछले तीन सालों में इसे बिहार के 264 शहरी स्थानीय निकायों तक सफलतापूर्वक विस्तारित किया गया है।
शहरी जीविका गतिविधियाँ:
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सरकारी अस्पतालों में रसोई संचालन,
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सरकारी कार्यालयों में कैटरिंग सेवाएं,
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शहरी आजीविका कार्यक्रम,
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छोटे पैमाने पर शहरी उद्यम।
योजना के विवरण: क्या है इस योजना में आकर्षण
आर्थिक प्रोत्साहन संरचना
इस योजना के तहत महिलाओं को जो वित्तीय सहायता मिल रही है, वही शहरी महिलाओं का इस योजना में अधिक से अधिक भागीदारी का कारण बन रही है:
मुख्य लाभ:
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₹10,000 की प्रारंभिक राशि, जो सीधे लाभ हस्तांतरण के तहत दी जाएगी (एक बार का भुगतान),
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6 महीने के व्यवसाय मूल्यांकन के बाद ₹2 लाख तक का अतिरिक्त समर्थन,
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12% वार्षिक ब्याज दर पर ऋण (जो काफी सब्सिडी दिया गया है),
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1-3 साल की ऋण चुकौती अवधि।
SHG सदस्यता के लिए पात्रता
शहरी महिलाओं को जीविका SHG सदस्य बनना अनिवार्य है, जिससे शहरी इलाकों में आवेदन की बाढ़ आई है।
अनिवार्य मानदंड:
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महिला का उम्र 18-60 वर्ष के बीच होना चाहिए,
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बिहार की स्थायी निवासी,
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जीविका स्व-सहायता समूह की सदस्य होना आवश्यक,
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आयकरदाता या सरकारी कर्मचारी न होना चाहिए,
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एक परिवार से केवल एक महिला पात्र होगी।
आवेदन प्रक्रिया: शहरी बनाम ग्रामीण
शहरी आवेदन प्रक्रिया
शहरी महिलाओं के लिए आवेदन प्रक्रिया ग्रामीण महिलाओं की तुलना में थोड़ी अधिक जटिल है:
शहरी प्रक्रिया:
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ऑनलाइन आवेदन www.brlps.in पोर्टल के माध्यम से,
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जीविका कर्मचारियों द्वारा घर पर शारीरिक सत्यापन,
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SHG समूह का गठन या मौजूदा समूह में शामिल होना,
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दस्तावेज़ों का सत्यापन और स्वीकृति,
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बैंक खाता लिंक करना और सत्यापन करना।
ग्रामीण आवेदन प्रक्रिया की सरलता
ग्रामीण महिलाओं के लिए आवेदन प्रक्रिया सरल है:
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गांव संगठन की बैठक में सीधे आवेदन करना,
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मौजूदा SHG नेटवर्क के माध्यम से आसान पंजीकरण,
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सामुदायिक-आधारित सत्यापन प्रक्रिया,
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योजना के कार्यान्वयन के लिए स्थापित अवसंरचना।
राजनीतिक प्रभाव: चुनावी रणनीति
चुनाव से पहले का समय
यह योजना बिहार विधानसभा चुनावों से कुछ महीने पहले शुरू की गई है, जिसका स्पष्ट राजनीतिक उद्देश्य नजर आता है।
रणनीतिक लाभ:
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75 लाख महिलाओं को ₹7,500 करोड़ की सीधी नकद राशि हस्तांतरण,
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महिलाओं के वोटरों को लक्षित करना – जो NDA का एक अहम हिस्सा हैं,
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शहरी विस्तार, पारंपरिक ग्रामीण आधार से बाहर,
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“डबल इंजन सरकार” का संदेश।
प्रधानमंत्री मोदी का राष्ट्रीय लिंक
प्रधानमंत्री मोदी ने व्यक्तिगत रूप से इस योजना की शुरुआत की, जिससे इसे राष्ट्रीय कार्यक्रमों से जोड़ा गया है:
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लाखपति दीदी अभियान का विस्तार,
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राष्ट्रीय स्तर पर महिला सशक्तिकरण का संदेश,
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बिहार की महिलाओं के लिए विशेष योजनाएं,
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केंद्रीय-राज्य सहयोग का श्रेय।
कार्यान्वयन में चुनौतियाँ और समाधान
सत्यापन में अड़चनें
शहरी आवेदनों की बाढ़ के कारण प्रक्रिया में चुनौतियाँ उत्पन्न हो रही हैं:
वर्तमान मुद्दे:
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10 लाख आवेदन जिन्हें शारीरिक सत्यापन की आवश्यकता है,
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शहरी जीविका कर्मचारियों की सीमित संख्या,
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नए SHG गठन की आवश्यकता,
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दस्तावेज़ सत्यापन में देरी।
सरकार की प्रतिक्रिया:
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शहरी क्षेत्रों के लिए अतिरिक्त कर्मचारियों की तैनाती,
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सत्यापन प्रक्रिया को सरल बनाना,
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डिजिटल दस्तावेज़ों को स्वीकार करना,
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दिसंबर 26, 2025 तक विस्तारित प्रसंस्करण समय।
आर्थिक प्रभाव: शहरी उद्यमिता को बढ़ावा
व्यवसायों की श्रेणियाँ
यह योजना शहरी आर्थिक गतिविधियों के विभिन्न क्षेत्रों को समर्थन देती है:
पात्र गतिविधियाँ:
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किराना और खुदरा स्टोर,
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सिलाई और वस्त्र सेवाएं,
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ब्यूटी और कॉस्मेटिक सेवाएं,
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खाद्य तैयार करना और कैटरिंग,
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हस्तशिल्प और कारीगरी का काम,
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छोटे पैमाने पर निर्माण कार्य।
बाजार विकास समर्थन
सरकार शहरी हाट-बाजारों की योजना बना रही है ताकि महिलाओं के उत्पादों को बेचा जा सके:
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शहरों में स्थानीय बाजारों का विकास,
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महिला उद्यमियों के लिए बिक्री प्लेटफॉर्म निर्माण,
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उत्पादों के लिए मूल्य श्रृंखला एकीकरण,
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शहरी व्यवसायों के लिए विपणन समर्थन।
सफलता की कहानियाँ और प्रारंभिक प्रभाव
शहरी SHG नेटवर्क में वृद्धि
इस योजना ने शहरी SHG गठन को तेज कर दिया है:
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राज्यभर में कुल सक्रिय SHGs: 3.12 लाख,
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शहरी SHG सदस्यता: तेजी से बढ़ रही है,
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पहले सप्ताह में नए समूहों का गठन: 5.26 लाख,
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कुल महिला सदस्य: 1.34 करोड़।
वित्तीय संस्थान समर्थन
जीविका निधि क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी अतिरिक्त समर्थन प्रदान कर रही है:
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महिलाओं के लिए बैंक जैसी सेवाएं,
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सस्ते ब्याज दर पर ऋण सुविधा,
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वित्तीय साक्षरता कार्यक्रम,
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बचत को बढ़ावा देने के प्रयास।
राष्ट्रीय कार्यक्रमों से तालमेल
केंद्रीय योजनाओं से जुड़ाव
बिहार की योजना राष्ट्रीय महिला सशक्तिकरण पहलों के साथ तालमेल बिठाती है:
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लाखपति दीदी अभियान – ₹1 लाख वार्षिक आय का लक्ष्य,
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मुद्रा योजना – सूक्ष्म उद्यम फाइनेंसिंग,
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ड्रोन दीदी – प्रौद्योगिकी अपनाने के लिए,
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बैंक सखी – वित्तीय सेवाएं।
भविष्य में विस्तार की योजना
क्षमता निर्माण पहल
सरकार की योजना व्यापक समर्थन प्रणालियाँ स्थापित करने की है:
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उद्यमियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम,
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कौशल विकास कार्यशालाएँ,
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प्रौद्योगिकी समर्थन,
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बाजार लिंकज की सुविधा।
इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास
समर्थन संरचना का विकास किया जा रहा है:
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शहरी क्षेत्रों में जीविका के लिए अतिरिक्त केंद्र,
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सेवा वितरण के लिए प्रौद्योगिकी प्लेटफ़ॉर्म,
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वित्तीय सेवाओं का एकीकरण,
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आपूर्ति श्रृंखला विकास।
₹10,000 की मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना ने बिहार की शहरी महिलाओं के आर्थिक योगदान में एक महत्वपूर्ण बदलाव लाया है। 10 लाख शहरी आवेदन केवल आंकड़े नहीं हैं, बल्कि यह इस बात का संकेत हैं कि शहरी महिलाएं अब स्व-रोजगार और उद्यमिता के क्षेत्र में प्रवेश करने के लिए तैयार हैं।
यह योजना शहरी महिलाओं की आर्थिक सशक्तिकरण की आवश्यकता को उजागर करती है और सरकार द्वारा निर्धारित SHG सदस्यता ने इस कार्यक्रम को ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में लोकप्रिय बना दिया है। चुनाव से पहले यह योजना एक सामाजिक कल्याण, आर्थिक सशक्तिकरण और राजनीतिक रणनीति का मिश्रण बन गई है।
मुख्य उपलब्धियाँ:
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10 लाख शहरी आवेदन प्राप्त हुए,
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₹7,500 करोड़ का ट्रांसफर 75 लाख महिलाओं को किया गया,
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शहरी-ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक कार्यक्रमों का एकीकरण,
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महिलाओं के बीच मतदान का समर्थन।
यह योजना अन्य राज्यों के लिए एक मॉडल बन सकती है, जहां महिला सशक्तिकरण को राजनीतिक रणनीति के साथ जोड़ा जा सकता है, और यह दिखाती है कि समाजिक योजनाएं कैसे कई उद्देश्यों को एक साथ पूरा कर सकती हैं, साथ ही महिलाओं के लिए वास्तविक आर्थिक अवसर भी पैदा कर सकती हैं।



