बिहार का मौसम एक बार फिर करवट ले चुका है। सुबह की हल्की ठंडी हवा और आसमान पर छाए काले बादलों के बीच सबसे बड़ी चिंता गंगा और कर्मनाशा नदी का बढ़ता जलस्तर है। बाढ़ की मार से सैकड़ों गाँव डूब चुके हैं और लोगों के सामने रोजमर्रा की ज़िंदगी की चुनौती बढ़ गई है। मानसून की रफ्तार भले ही धीमी हो गई हो लेकिन बारिश का खतरा अब भी बना हुआ है।
मानसून की सुस्ती और अलर्ट जारी
मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार इस समय बिहार में मानसून कमजोर पड़ा है। इसके बावजूद कई जिलों में भारी से मध्यम बारिश की संभावना बनी हुई है। शनिवार को 32 जिलों के लिए यलो अलर्ट जारी किया गया है। यह अलर्ट इस बात का संकेत है कि मौसम अचानक खराब हो सकता है और गरज-चमक के साथ भारी बारिश लोगों की मुश्किलें बढ़ा सकती है।
पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज और भागलपुर जैसे ज़िलों में भारी बारिश का अनुमान है। वहीं, पटना, गया, मुजफ्फरपुर, दरभंगा और पूर्णिया समेत 28 जिलों में मध्यम बारिश हो सकती है। भोजपुर, बक्सर, कैमूर, रोहतास और औरंगाबाद में हल्की बारिश की संभावना जताई गई है। साथ ही तेज हवाओं और बिजली गिरने का भी अंदेशा है।
गंगा और कर्मनाशा का खतरा
Bihar Flood की स्थिति लगातार गंभीर हो रही है। गंगा और कर्मनाशा नदी का जलस्तर बढ़ने से अब तक 502 गाँव बाढ़ की चपेट में आ चुके हैं। पटना और मुंगेर में गंगा का उफान सबसे बड़ी समस्या बन गया है।
मुंगेर में गंगा का पानी चेतावनी स्तर से 59 सेंटीमीटर ऊपर बह रहा है। इसकी वजह से कटाव तेज हो गया है और कई गाँवों पर खतरा मंडरा रहा है। पटना, भोजपुर, वैशाली, भागलपुर, खगड़िया, कटिहार, मधेपुरा और नालंदा जिलों के गाँव भी बाढ़ के पानी में डूब चुके हैं। खेतों से लेकर घरों तक पानी घुसने से लोगों की परेशानी बढ़ गई है।
किसानों पर डबल मार
भारी बारिश और बाढ़ का सबसे बड़ा असर किसानों पर पड़ा है। खरीफ की फसलों का नुक़सान सबसे अधिक हुआ है। पटना ज़िले की 13 प्रखंडों की 115 पंचायतों में 20 हज़ार हेक्टेयर से अधिक फसलें पूरी तरह बर्बाद हो चुकी हैं।
धान, मक्का और सब्जियों की खेती पर सबसे ज़्यादा असर पड़ा है। खेतों में पानी भरने से उत्पादन लगभग असंभव हो गया है। कृषि विभाग ने किसानों से Agricultural Input Grant Scheme (2025-26) के तहत आवेदन माँगे हैं ताकि उन्हें मुआवजा दिया जा सके।
मानसून की कमी और उम्मीदें
इस साल अब तक बिहार में 28 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। मॉनसून ट्रफ लाइन के दूर चले जाने से बारिश की गतिविधियाँ धीमी हो गई हैं। यह कमी किसानों और सरकार दोनों के लिए चिंता का विषय है।
हालांकि, मौसम विभाग का अनुमान है कि 1 सितंबर से मानसून फिर से एक्टिव होगा। इसके बाद पूरे प्रदेश में झमाझम बारिश देखने को मिल सकती है।
सितंबर में राहत की संभावना
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि सितंबर का पहला और दूसरा सप्ताह बेहद अहम रहेगा। यदि इस दौरान अच्छी बारिश होती है तो खरीफ फसलों को बड़ा सहारा मिल सकता है। धान की फसल को सबसे ज़्यादा राहत मिलेगी। हालांकि अगर बाढ़ की स्थिति बनी रही तो बारिश के बावजूद नुकसान की भरपाई मुश्किल होगी।
पटना Weather Update
राजधानी पटना में शनिवार को आंशिक रूप से बादल छाए रहेंगे। हल्की बारिश की संभावना बनी रहेगी लेकिन उमस से राहत नहीं मिलेगी। अधिकतम तापमान 34 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 26 डिग्री सेल्सियस के आसपास रह सकता है।
लोगों की रोजमर्रा की मुश्किलें
बाढ़ और बारिश की वजह से लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। निचले इलाकों के गाँवों से पलायन शुरू हो गया है। लोग सुरक्षित जगहों की तलाश में अपने घर छोड़ने को मजबूर हैं। कई सड़कों पर पानी भरने से यातायात ठप हो गया है और जरूरी सामान की आपूर्ति प्रभावित हो रही है।
गाँवों में पानी भर जाने से स्वास्थ्य संकट भी गहराने लगा है। जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है। प्रशासन राहत कैंप चला रहा है लेकिन प्रभावित लोगों की संख्या इतनी अधिक है कि संसाधन कम पड़ रहे हैं।
शहरी क्षेत्रों में गंगा का डर
गंगा का जलस्तर शहरी इलाकों के लिए भी गंभीर खतरा बन गया है। पटना और मुंगेर में लगातार बढ़ता जलस्तर बाँधों पर दबाव बढ़ा रहा है। कटाव की वजह से नदी किनारे बसे गाँव और कस्बे खतरे में हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि नेपाल और उत्तर प्रदेश के कैचमेंट एरिया में और बारिश हुई तो स्थिति और बिगड़ सकती है।
कृषि और बाढ़ की चुनौती
बाढ़ और बारिश की कमी दोनों मिलकर किसानों को संकट में डाल रही हैं। एक तरफ खेत पानी में डूबे हैं तो दूसरी तरफ कुछ क्षेत्रों में बारिश की कमी से सूखा जैसी स्थिति है। यह हालात साफ बताते हैं कि जलवायु परिवर्तन का असर बिहार के कृषि तंत्र पर गहराता जा रहा है।
सरकारी तैयारियाँ
बिहार सरकार ने सभी जिलों के प्रशासन को अलर्ट पर रखा है। प्रभावित इलाकों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने की योजना बनाई गई है। राहत सामग्री जैसे सूखा राशन, पीने का पानी और दवाइयाँ भेजी जा रही हैं।
किसानों को फसल क्षति की भरपाई के लिए मुआवज़ा देने की घोषणा की गई है। सर्वे टीमों को नुक़सान का आकलन करने का आदेश दिया गया है ताकि सहायता सही लोगों तक पहुँच सके।
लंबी अवधि की चिंता
विशेषज्ञों का कहना है कि बिहार की भौगोलिक स्थिति इसे हर साल बाढ़-प्रवण बनाती है। मानसून की अनिश्चितता और बदलते पैटर्न अब कृषि को और असुरक्षित कर रहे हैं। कभी कम बारिश और कभी अत्यधिक वर्षा के कारण फसल चक्र प्रभावित हो रहा है।
कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि इस समस्या से निपटने के लिए बेहतर सिंचाई व्यवस्था, बाढ़ नियंत्रण उपाय और Crop Insurance को मज़बूत करना होगा।
Bihar Weather Today की तस्वीर बताती है कि राज्य फिलहाल दोहरी मार झेल रहा है। एक ओर गंगा और कर्मनाशा का उफान गाँवों को डुबो रहा है तो दूसरी ओर मानसून की सुस्ती ने बारिश की कमी पैदा कर दी है।
पटना और आसपास के इलाकों में हल्की बारिश तो होगी लेकिन उमस से राहत नहीं मिलेगी। किसानों की उम्मीदें अब सितंबर की बारिश पर टिकी हैं। अगर अगले सप्ताह अच्छी बारिश हुई तो नुकसान की भरपाई कुछ हद तक संभव है, लेकिन बाढ़ का खतरा अब भी बना हुआ है।
Discover more from
Subscribe to get the latest posts sent to your email.