बिहार कन्या उत्थान योजना की स्नातक योजना में वर्तमान में महत्वपूर्ण देरी हो रही है। फॉर्म बार-बार लंबित स्थिति में फंसे हुए हैं, जिनकी वजह से वेरिफिकेशन प्रक्रिया और फंड की कमी जैसी समस्याएँ उत्पन्न हो रही हैं। इस समय बिहार के विश्वविद्यालयों और संस्थानों में 3 लाख से अधिक छात्रा स्नातक आवेदन लंबित हैं, जिनमें से अधिकांश मुजफ्फरपुर स्थित बीआरए बिहार विश्वविद्यालय में फंसे हुए हैं।
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क्यों बार-बार फॉर्म लंबित हो रहे हैं?
लंबित स्थिति के प्रमुख कारण:
वेरिफिकेशन में देरी: फॉर्म “शिक्षा विभाग में लंबित” स्थिति में दिख रहे हैं क्योंकि वेरिफिकेशन प्रक्रिया को अस्थायी रूप से रोक दिया गया है। शिक्षा विभाग ने पिछले एक सप्ताह से फंड आवंटन की समस्याओं के कारण फॉर्म वेरिफिकेशन को स्थगित कर दिया है।
विश्वविद्यालय से अनुमोदन अड़चन: आवेदन “यूनिवर्सिटी मेकर और चेकर्स” वेरिफिकेशन के लिए प्रतीक्षारत हैं, जिसके लिए विश्वविद्यालयों को दुर्गा पूजा की छुट्टियों के बाद फिर से खोलने की आवश्यकता है। यह प्रक्रिया 6 अक्टूबर 2025 से फिर से शुरू होगी।
दस्तावेज संबंधित समस्याएँ: कई फॉर्म दस्तावेजों में गलत निवास प्रमाण पत्र, अवैध पिता के नाम, गलत जन्म तिथि, या गलत मार्कशीट नंबर के कारण लंबित हैं। इस प्रकार की समस्याओं का समाधान करने के लिए छात्रों को अपनी संबंधित विश्वविद्यालयों या कॉलेजों से संपर्क करना होगा।
सिस्टम ओवरलोड: 3 लाख से अधिक आवेदन की भारी मात्रा ने वेरिफिकेशन सिस्टम को दबाव में डाल दिया है, जिससे प्रोसेसिंग में देरी हो रही है।
फंड की कमी संकट
वर्तमान वित्तीय स्थिति:
70% बजट खर्च हो चुका है: शिक्षा विभाग ने कन्या उत्थान योजना के लिए निर्धारित बजट का 70% पहले ही रिलीज कर दिया है, और केवल 30% बचा है। इस वजह से नए भुगतान प्रोसेसिंग में गंभीर सीमाएँ उत्पन्न हो गई हैं।
भुगतान प्रक्रिया निलंबित: जिन छात्रों के फॉर्म पहले से “Ready for Payment” स्थिति में हैं, उन्हें प्रतिदिन 10-25 छात्रों तक भुगतान मिल रहा है। नए फॉर्म वेरिफिकेशन को मुख्य रूप से रोका गया है, ताकि शेष फंड का प्रबंधन किया जा सके।
बजट आवंटन: योजना के लिए सालाना ₹300 करोड़ का बजट है, लेकिन इस बजट की मांग ने उपलब्ध संसाधनों से अधिक खपत की है।
भुगतान प्रक्रिया और अपेक्षाएँ
भुगतान कब फिर से शुरू होगा:
तत्काल भुगतान: जिन छात्रों के फॉर्म “Ready for Payment” या “In Process for Payment” स्थिति में हैं, उन्हें इस सप्ताह के अंत तक भुगतान मिलने की संभावना है, बशर्ते फंड की उपलब्धता हो।
हॉलिडे के बाद वेरिफिकेशन: दुर्गा पूजा की छुट्टियों के बाद 6 अक्टूबर 2025 से फॉर्म वेरिफिकेशन प्रक्रिया फिर से शुरू होगी, लेकिन फंड की सीमाओं के कारण भुगतान में देरी हो सकती है।
नया फंड रिलीज: अगला फंड ट्रांसफर आगामी चुनावों के बाद, शायद दिसंबर 2025 या जनवरी-फरवरी 2026 में किया जाएगा। चुनावों के दौरान लागू होने वाला मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट इसकी वजह है।
सरकारी बजट चक्र: बड़ी फंड रिलीज़ आमतौर पर नए वित्तीय वर्ष में या महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाओं के बाद होती है।
लंबित स्थिति को ठीक कैसे करें?
लंबित आवेदन का समाधान करने के लिए कदम:
आवेदन स्थिति की जांच करें: आधिकारिक Medhasoft पोर्टल पर जाकर छात्र अपनी आवेदन स्थिति की जांच करें – छात्रों को विशेष त्रुटि संदेश या लंबित कारणों को देखना चाहिए।
दस्तावेज सुधार: नाम, पिता का नाम, जन्म तिथि जैसी डेटा संबंधित त्रुटियों के लिए संबंधित विश्वविद्यालय या कॉलेज से संपर्क करें।
सिस्टम प्रोसेसिंग का इंतजार करें: अगर स्थिति “शिक्षा विभाग में लंबित” दिख रही है और कोई विशेष त्रुटि नहीं है, तो छात्रों को वेरिफिकेशन प्रक्रिया के फिर से शुरू होने का इंतजार करना होगा।
अंतिम रूप से आवेदन पूरा करें: जिन छात्रों ने अभी तक अपने आवेदन को अंतिम रूप नहीं दिया है, उन्हें तुरंत प्रक्रिया पूरी करनी चाहिए, हालांकि यह भुगतान में तत्काल राहत नहीं देगा क्योंकि फंड की कमी बनी रहेगी।
विश्वविद्यालय से संपर्क करें: तकनीकी समस्याओं के लिए छात्रों को अपनी संबंधित विश्वविद्यालय के परीक्षा या छात्रवृत्ति विभाग से संपर्क करना चाहिए।
आधिकारिक अपडेट्स और भविष्यवाणियाँ
सरकारी संवाद:
उच्च शिक्षा निदेशालय ने सभी विश्वविद्यालयों को पत्र लिखकर लंबित आवेदन अनुमोदन प्रक्रिया को तेज करने का अनुरोध किया है, ताकि छात्र इस योजना से लाभ उठा सकें। हालांकि, वास्तविकता यह है कि फंड की उपलब्धता मुख्य समस्या बनी हुई है।
मुख्य अधिकारियों के बयान: शिक्षा विभाग के सूत्रों के अनुसार, जबकि सभी पात्र आवेदन eventually प्रोसेस किए जाएंगे, समयसीमा पूरी तरह से राज्य सरकार द्वारा अगले बजट आवंटन के स्वीकृति पर निर्भर करती है।
छात्रों के लिए सलाह: अधिकारियों का सुझाव है कि छात्रों को अपनी स्थिति की नियमित रूप से जांच करते रहना चाहिए और धैर्य रखना चाहिए, क्योंकि भुगतान प्रक्रिया नए फंड आवंटन के बाद फिर से शुरू होगी, लेकिन इसमें कुछ महीने लग सकते हैं।
यह स्थिति उन चुनौतियों को उजागर करती है जो बड़े पैमाने पर छात्रवृत्ति योजनाओं को लागू करने में सामने आती हैं, जहाँ मांग प्रारंभिक बजट अनुमानों से कहीं अधिक होती है। ऐसे में अतिरिक्त सरकारी आवंटन की आवश्यकता होती है ताकि सभी पात्र लाभार्थियों को उनकी पूरी राशि का वितरण किया जा सके।
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