बिहार में एक महत्वपूर्ण बदलाव की शुरुआत हो रही है क्योंकि राज्य सरकार ने गंगा के किनारे तीन प्रमुख सड़क परियोजनाओं को मंजूरी दे दी है। इन परियोजनाओं का कुल बजट 17,000 करोड़ रुपये है और इनका उद्देश्य राज्य में कनेक्टिविटी, औद्योगिक विकास और पर्यटन को बढ़ावा देना है। यह परियोजनाएं 119 किलोमीटर तक फैली हुई हैं, और ये बिहार के बुनियादी ढांचे के विकास में एक अहम कदम साबित होंगी। इन परियोजनाओं से राज्य की आर्थिक प्रगति में तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है।
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गंगा सड़क परियोजनाओं का विवरण
गंगा के किनारे जिन तीन प्रमुख सड़क परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है, वे राज्य के विभिन्न इलाकों को जोड़ने में अहम भूमिका निभाएंगी। इन परियोजनाओं का उद्देश्य बिहार के उन हिस्सों को जोड़ना है, जो अभी तक बेहतर कनेक्टिविटी से वंचित थे। जिन तीन प्रमुख सड़क परियोजनाओं को मंजूरी दी गई हैं, वे निम्नलिखित हैं:
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दीघा-शेरपुर-बिहटा-कोइलवर सड़क (35.65 किलोमीटर)
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मुंगेर-सुलतानगंज सड़क (42 किलोमीटर)
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सुलतानगंज-भागलपुर-साबौर सड़क (41.33 किलोमीटर)
इन परियोजनाओं का मुख्य उद्देश्य विभिन्न औद्योगिक केंद्रों, जैसे बिहटा, कोइलवर, मुंगेर और भागलपुर, को जोड़ना है। इससे स्थानीय उद्योगों को भी फायदा मिलेगा और साथ ही साथ पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। इस योजना से समुचित यातायात के कारण माल का परिवहन और पर्यटकों की यात्रा दोनों के लिए रास्ते खोलेंगे।
हाइब्रिड एनीटी मॉडल (HAM) के तहत वित्तपोषण
इन परियोजनाओं के लिए वित्तपोषण का तरीका भी एक नया प्रयोग है। बिहार राज्य सरकार ने इन परियोजनाओं के लिए हाइब्रिड एनीटी मॉडल (HAM) का चयन किया है। यह बिहार में पहली बार है जब इस मॉडल का उपयोग बड़े पैमाने पर सड़क निर्माण के लिए किया जा रहा है। इस मॉडल के तहत, राज्य सरकार परियोजनाओं के 40% खर्च का वहन करेगी, जबकि शेष 60% निजी डेवलपर्स द्वारा प्रदान किया जाएगा। इन डेवलपर्स को अनुबंध की अवधि के दौरान एनीटी भुगतान किए जाएंगे।
यह वित्तपोषण संरचना इन परियोजनाओं को तेजी से पूरा करने में मदद करेगी और राज्य में निजी निवेश को आकर्षित करेगी। HAM मॉडल बिहार के लिए एक नई दिशा में कदम रखेगा और भविष्य में अन्य परियोजनाओं में भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है।
परियोजना लागत और विभाजन
तीन परियोजनाओं की लागत अलग-अलग है, जो उनकी संरचना और निर्माण में उपयोग होने वाली संसाधनों की आवश्यकता के आधार पर निर्धारित की गई है। प्रत्येक परियोजना का बजट निम्नलिखित है:
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दीघा-शेरपुर-बिहटा-कोइलवर: 6,495.79 करोड़ रुपये
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मुंगेर-सुलतानगंज सड़क: 5,119.80 करोड़ रुपये
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सुलतानगंज-भागलपुर-साबौर सड़क: 4,849.83 करोड़ रुपये
इन परियोजनाओं की कुल लागत 17,000 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है, जो बिहार में बेहतर कनेक्टिविटी, औद्योगिक वृद्धि और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए इस्तेमाल की जाएगी।
कनेक्टिविटी और आर्थिक विकास पर प्रभाव
इन सड़कों के निर्माण से बिहार के विभिन्न हिस्सों में कनेक्टिविटी में महत्वपूर्ण सुधार होगा। ये सड़कें औद्योगिक केंद्रों जैसे बिहटा, कोइलवर, मुंगेर और भागलपुर को आपस में जोड़ेंगी, जिससे स्थानीय उद्योगों को फायदा होगा। बेहतर सड़कों के माध्यम से माल का परिवहन भी अधिक कुशल तरीके से हो सकेगा, जिससे इन उद्योगों की उत्पादकता में वृद्धि होगी।
इसके अलावा, ये सड़कें यात्रा के समय को भी कम करेंगी, जिससे आर्थिक कार्यकुशलता में वृद्धि होगी। बेहतर कनेक्टिविटी से बिहार के उद्योगों और व्यापार को लाभ होगा, और यह राज्य को निवेश के लिए और अधिक आकर्षक बनाएगा।
इन परियोजनाओं के चलते नए उद्योगों को आकर्षित करने की संभावना भी है, क्योंकि बेहतर यातायात सुविधा से व्यापार और निवेश को बढ़ावा मिलेगा। इस प्रकार, यह परियोजना बिहार के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान देगी।
पर्यटन को बढ़ावा देने में सहायक
इन सड़क परियोजनाओं से पर्यटन के क्षेत्र में भी सुधार होगा। बिहार, जिसमें गंगा के किनारे कई ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल स्थित हैं, अब अधिक सुगम और सुलभ होगा। बेहतर सड़क कनेक्टिविटी से पर्यटकों के लिए यात्रा करना आसान होगा, जिससे राज्य में पर्यटन गतिविधियां बढ़ सकती हैं।
बिहार में कई महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल हैं, जैसे पटना, बोधगया में महाबोधि मंदिर, और मुंगेर जैसे ऐतिहासिक शहर। गंगा पट मार्ग के बनने से पर्यटकों को इन स्थानों तक पहुंचने में आसानी होगी, जिससे राज्य में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है।
बेहतर कनेक्टिविटी के कारण पर्यटन स्थलों पर यात्रा करने के लिए लोगों को अधिक सुविधाएं मिलेंगी, जिससे पर्यटन उद्योग को भी मजबूती मिलेगी। यह राज्य की अर्थव्यवस्था को और भी सशक्त बनाने में मदद करेगा।
गंगा पट मार्ग: भविष्य के लिए एक दृष्टिकोण
इन परियोजनाओं का उद्देश्य गंगा के किनारे एक रिंग रोड बनाने की दिशा में कदम बढ़ाना है। इसका अंततः उद्देश्य पटना और आसपास के जिलों में यातायात की जाम की समस्या को हल करना है। बेहतर सड़क कनेक्टिविटी और परिवहन व्यवस्था से पटना और उसके आस-पास के क्षेत्रों में यातायात की स्थिति में सुधार होगा।
गंगा पट मार्ग योजना से पटना के ट्रैफिक सिस्टम पर दबाव कम होगा और राज्य के अन्य हिस्सों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी। यह परियोजना राज्य के समग्र विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगी और भविष्य में राज्य की उद्योग और पर्यटन वृद्धि को बढ़ावा देने का एक प्रभावी तरीका साबित होगी।
प्रमुख तिथियां और आगामी मील के पत्थर
इन तीन परियोजनाओं के लिए टेंडर प्रक्रिया पहले ही पूरी हो चुकी है और निर्माण के लिए आवश्यक भूमि तैयार है। 4 अक्टूबर 2025 को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एक परियोजना का शिलान्यास करेंगे, जो गंगा पट पहल के अगले चरण की शुरुआत को औपचारिक रूप से चिह्नित करेगा।
यह शिलान्यास बिहार के बुनियादी ढांचे में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा और राज्य के विकास में एक नया अध्याय शुरू करेगा। इस परियोजना के पूरा होने से बिहार को एक नई पहचान मिलेगी और राज्य की कनेक्टिविटी, आर्थिक वृद्धि और पर्यटन को भी एक नई दिशा मिलेगी।
सरकार की बुनियादी ढांचे में निवेश की प्रतिबद्धता
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार सरकार ने हमेशा बुनियादी ढांचे के विकास को प्राथमिकता दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में, बिहार राज्य की कनेक्टिविटी, औद्योगिक विकास और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए काम कर रहा है। इन परियोजनाओं से राज्य को नए निवेश आकर्षित करने और औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी।
यह पहल बिहार को बेहतर तरीके से आर्थिक विकास और कनेक्टिविटी के मामले में देश के अन्य राज्यों के साथ प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम बनाएगी। इस तरह के बड़े विकासात्मक कदम बिहार के भविष्य में आर्थिक सफलता की दिशा में एक अहम कदम साबित हो सकते हैं।
बिहार के सड़क ढांचे में महत्वपूर्ण कदम
इन तीन परियोजनाओं के अनुमोदन के साथ, बिहार सड़क बुनियादी ढांचे के विकास में एक बड़ा कदम उठाने जा रहा है। गंगा पट मार्ग परियोजना न केवल परिवहन की तस्वीर को बदलने वाली है, बल्कि यह राज्य को औद्योगिक और पर्यटन विकास में भी एक अहम स्थान दिलाने में मदद करेगी।
जैसे-जैसे इन परियोजनाओं का निर्माण होगा, यह बिहार के भविष्य को उज्जवल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा। बेहतर कनेक्टिविटी, औद्योगिक विकास और पर्यटन वृद्धि से बिहार के आर्थिक ढांचे में नई जान आएगी, और राज्य को एक मजबूत और प्रतिस्पर्धी क्षेत्रीय केंद्र बना देगी।
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