Home Bihar मोकामा से हुई अनंत सिंह की धमाकेदार जीत

मोकामा से हुई अनंत सिंह की धमाकेदार जीत

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के परिणामों में मोकामा सीट पर जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के उम्मीदवार अनंत कुमार सिंह ने शानदार जीत हासिल की है। उन्हें कुल 81,692 वोट मिले, जबकि उनकी निकटतम प्रतिद्वंद्वी, राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) की उम्मीदवार वीणा देवी को 51,982 वोट मिले। अनंत सिंह ने वीणा देवी को 29,710 वोटों के अंतर से हराया, जो उनकी चुनावी ताकत और क्षेत्र में प्रभाव को दर्शाता है।

इस सीट पर अनंत सिंह की जीत राजनीतिक दृष्टि से खास रही, क्योंकि चुनाव प्रचार के दौरान वह कई विवादों से घिरे हुए थे। उनके खिलाफ एक हत्या मामले में आरोप थे, लेकिन इसके बावजूद उनकी बढ़ती लोकप्रियता और समर्थकों की निरंतरता ने उन्हें इस चुनाव में सफलता दिलाई।

मोकामा सीट और अनंत सिंह का दबदबा

मोकामा विधानसभा क्षेत्र में अनंत कुमार सिंह का परिवार पिछले 35 वर्षों से प्रभावशाली भूमिका निभा रहा है। अनंत सिंह के बड़े भाई दिलीप सिंह ने 1990 और 1995 के विधानसभा चुनावों में इस सीट से जीत हासिल की थी। हालांकि, 2005 में अनंत सिंह ने इस क्षेत्र में अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू की और तब से लगातार चुनाव जीत रहे हैं।

अनंत सिंह की पहचान बाहुबली नेता के रूप में भी रही है, और उनका राजनीतिक कद लगातार बढ़ता गया है। उन्होंने जेडीयू से पहले आरजेडी में भी काम किया और निर्दलीय रूप से भी चुनाव लड़ा, लेकिन हर बार वह जीतने में सफल रहे।

अनंत सिंह के खिलाफ कानूनी विवाद

अनंत सिंह को 2020 में एक आर्म्स एक्ट मामले में अयोग्य घोषित किया गया था, जब उनके घर से एके-47 राइफल और विस्फोटक सामग्री बरामद हुई थी। हालांकि, 2024 में उन्हें इस मामले में रिहा कर दिया गया और जेडीयू ने उन्हें फिर से पार्टी का उम्मीदवार बनाया।

इस विवाद के बावजूद, अनंत सिंह की लोकप्रियता मोकामा में कम नहीं हुई और वह इस चुनाव में विजयी हुए। उनके खिलाफ हत्या के आरोपों के बावजूद उनकी पार्टी जेडीयू ने उन्हें अपनी पार्टी का उम्मीदवार बनाकर समर्थन दिया।

वीणा देवी और उनका राजनीतिक संघर्ष

आरजेडी ने मोकामा सीट पर बाहुबली नेता सूरजभान सिंह की पत्नी वीणा देवी को अपना उम्मीदवार बनाया था। सूरजभान सिंह, जो 2008 में हत्या के एक मामले में दोषी ठहराए गए थे, चुनाव नहीं लड़ सकते थे। इसके बावजूद, वीणा देवी ने अपने पति के राजनीतिक करियर को आगे बढ़ाने की कोशिश की।

वीणा देवी के लिए यह चुनावी मैदान चुनौतीपूर्ण था, क्योंकि उनके पति के साथ जुड़े विवादों ने उनकी छवि को प्रभावित किया। इसके बावजूद, वीणा देवी ने बहुत संघर्ष किया, लेकिन वह अनंत सिंह के सामने पराजित हो गईं।

मोकामा का राजनीतिक इतिहास

मोकामा विधानसभा सीट का राजनीतिक इतिहास काफी दिलचस्प रहा है। यह क्षेत्र हमेशा से ही संघर्षों और बदलावों का गवाह रहा है। अनंत सिंह का परिवार मोकामा में लगभग तीन दशकों से राजनीतिक प्रभाव बनाए हुए है। सन 2000 के विधानसभा चुनाव में सूरजभान सिंह ने अनंत सिंह के भाई दिलीप सिंह को हराया था, और इस चुनाव ने मोकामा की राजनीति में नई दिशा दी थी।

सूरजभान सिंह का प्रभाव और वीणा देवी की उम्मीदवारी

सूरजभान सिंह के राजनीतिक प्रभाव का काफी असर वीणा देवी की उम्मीदवारी पर पड़ा। सूरजभान सिंह, जिनके खिलाफ कई गंभीर आरोप थे, ने अपने राजनीतिक वर्चस्व को अपनी पत्नी वीणा देवी के जरिए जारी रखा। हालांकि, उनके खिलाफ कानूनी मामलों ने उनकी पत्नी की चुनावी मुहिम को कठिन बना दिया था। फिर भी, वीणा देवी ने चुनावी प्रचार में पूरा जोर लगाया और मोकामा की जनता से समर्थन की उम्मीद की।

अनंत सिंह की जीत और भविष्य की राजनीति

अनंत सिंह की जीत मोकामा में उनकी मजबूत पकड़ को दर्शाती है। इस सीट पर उनका दबदबा पिछले कई सालों से बना हुआ है। उनका परिवार मोकामा की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुका है और उनकी इस जीत से यह साफ हो गया कि मोकामा में उनका राजनीतिक प्रभाव बरकरार है।

वह पहले भी जेडीयू के सदस्य रहे हैं और फिर निर्दलीय चुनाव लड़ा था। इस बार उनकी पार्टी जेडीयू ने उन्हें अपना उम्मीदवार बनाया और वह फिर से मोकामा में जीतने में सफल रहे। यह जीत उनके परिवार की राजनीतिक विरासत को और भी मजबूत बनाती है और मोकामा में जेडीयू की स्थिति को स्पष्ट करती है।

मोकामा विधानसभा चुनाव 2025 में अनंत सिंह की जीत ने यह साबित कर दिया कि उनके राजनीतिक प्रभाव में कोई कमी नहीं आई है। हालांकि उनके खिलाफ कई गंभीर आरोप थे, लेकिन उनके समर्थकों और पार्टी के पक्ष में काम करने वाली ताकतों ने उनकी जीत सुनिश्चित की।

इस चुनाव में वीणा देवी की हार और अनंत सिंह की जीत, मोकामा के राजनीतिक समीकरण को बदलने वाली घटना रही। अनंत सिंह ने इस बार अपनी पुरानी सीट को फिर से जीतकर अपने प्रतिद्वंद्वियों को हराया और मोकामा में अपनी पकड़ और मजबूत की। अब यह देखना होगा कि मोकामा की इस जीत के बाद बिहार के राजनीतिक परिदृश्य में किस तरह के बदलाव होते हैं।

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