भोजपुर जिले में शनिवार को शोक की लहर दौड़ गई, जब शहीद सैनिक हरेराम कुंवर का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव पहुंचा। तिरंगे में लिपटा शव जैसे ही बरहरा प्रखंड के नथमलपुर गांव पहुंचा, पूरा गांव गमगीन हो गया। सड़क के दोनों ओर खड़े ग्रामीणों ने नम आंखों से अपने वीर सपूत को अंतिम विदाई दी।
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हरेराम कुंवर जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में ड्यूटी के दौरान शहीद हो गए थे। उनके बलिदान की खबर पहले ही इलाके में शोक फैला चुकी थी। पार्थिव शरीर के गांव पहुंचते ही माहौल पूरी तरह भावुक हो गया। हर चेहरा दुख और गर्व की मिली-जुली भावना को दर्शा रहा था।
गांव में पसरा मातम, हर आंख नम
पार्थिव शरीर के गांव पहुंचते ही नथमलपुर में सन्नाटा छा गया। आसपास के गांवों से भी लोग श्रद्धांजलि देने पहुंचे। बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे सभी हाथ जोड़कर अंतिम दर्शन करते नजर आए। कई लोग अपने आंसू रोक नहीं पाए।
ग्रामीणों ने बताया कि हरेराम कुंवर अनुशासनप्रिय और सरल स्वभाव के व्यक्ति थे। वे हमेशा अपने गांव और देश के प्रति गर्व महसूस करते थे। उनकी शहादत को गांव ने अपनी व्यक्तिगत क्षति बताया।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
शहीद के पार्थिव शरीर को देखकर परिजन बेसुध हो गए। पत्नी खुशबू का रो-रोकर बुरा हाल था। उन्होंने कहा कि उनके पति ने हमेशा साथ निभाने का वादा किया था, लेकिन देश सेवा के लिए उन्होंने सर्वोच्च sacrifice दिया।
परिजन और रिश्तेदार उन्हें सांत्वना देने की कोशिश करते रहे। हर पल दर्द और बिछोह की पीड़ा साफ दिखाई दे रही थी। शहीद के पिता ने आंसुओं के साथ बेटे को श्रद्धांजलि दी और कहा कि उन्हें अपने बेटे की शहादत पर गर्व है।
बच्चों की सलामी ने भावुक किया माहौल
एक बेहद भावुक क्षण तब आया, जब शहीद के छोटे बेटे आदर्श ने अपने पिता को सलामी दी। बच्चे की यह चुपचाप श्रद्धांजलि देखकर मौजूद लोग भावुक हो उठे। यह दृश्य शहादत की कीमत को बयां कर रहा था।
शहीद के बड़े बेटे प्रियांशु अंतिम संस्कार की तैयारियों में बड़ों के साथ नजर आए। वही अपने पिता को मुखाग्नि देंगे। ग्रामीणों ने इस दृश्य को दिल को छू लेने वाला बताया। परिवार का साहस सभी के लिए प्रेरणा बना।
अंतिम यात्रा में गूंजे देशभक्ति के नारे
गांव से श्मशान घाट तक अंतिम यात्रा के दौरान देशभक्ति के नारे गूंजते रहे। लोगों ने भारत माता की जय और शहीद अमर रहें के नारे लगाए। यह नारे nation के प्रति सम्मान और गर्व को दर्शा रहे थे।
पार्थिव शरीर को पूरे honour के साथ ले जाया गया। रास्ते में लोगों ने फूल बरसाए। बड़ी संख्या में ग्रामीण अंतिम यात्रा में शामिल हुए। शोक और गर्व साथ-साथ चल रहे थे।
पूरे राजकीय सम्मान के साथ होगा अंतिम संस्कार
शहीद हरेराम कुंवर का अंतिम संस्कार भोजपुर के महुली घाट पर किया जाएगा। अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान के साथ संपन्न होगा। हजारों लोगों के इसमें शामिल होने की संभावना है।
सेना के अधिकारी शहीद को अंतिम सलामी देंगे। जिला प्रशासन और स्थानीय प्रतिनिधि भी मौजूद रहेंगे। मुखाग्नि शहीद के बड़े बेटे प्रियांशु देंगे। सैन्य परंपराओं के अनुसार सभी औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी।
सेना और प्रशासन ने दी श्रद्धांजलि
शहीद के पार्थिव शरीर के साथ सेना के जवान पूरे समय मौजूद रहे। उन्होंने पूरे सम्मान और अनुशासन के साथ अपनी जिम्मेदारी निभाई। यह उपस्थिति शहीद के प्रति सेना के सम्मान को दर्शाती है।
जिला प्रशासन के अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने भी पुष्पांजलि अर्पित की। अधिकारियों ने परिवार को हर संभव सहायता का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि शहीद का बलिदान कभी भुलाया नहीं जाएगा।
गांव शोक और गर्व में एकजुट
नथमलपुर गांव के लोगों ने कहा कि यह क्षति पूरे गांव की है। कई ग्रामीणों ने शहीद के साथ बिताए पलों को याद किया। उन्होंने उन्हें शांत और कर्तव्यनिष्ठ बताया।
दिनभर गांव में सन्नाटा पसरा रहा। कई दुकानों को बंद रखा गया। घरों पर काले झंडे और रिबन नजर आए। पूरे गांव ने शहीद को मौन श्रद्धांजलि दी।
भोजपुर ने अपने वीर सपूत को किया नमन
हरेराम कुंवर के पार्थिव शरीर की वापसी ने भोजपुर को गहरे दुख में डुबो दिया। इसके साथ ही जिले में गर्व की भावना भी दिखी। लोगों ने कहा कि भोजपुर ने देश को एक बहादुर सपूत दिया है।
ग्रामीणों ने कहा कि ऐसे बलिदान कभी भुलाए नहीं जाने चाहिए। उन्होंने शहीद की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। लोगों का मानना है कि उनकी शहादत आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करेगी।
गांव से आगे भी याद रहेगी शहादत
सामाजिक नेताओं ने कहा कि शहीद की कुर्बानी पीढ़ियों तक याद रखी जाएगी। बच्चों को उनकी कहानी सुनाई जाएगी। गांव में हर साल उनकी शहादत को याद करने की योजना पर भी चर्चा हो रही है।
यह घटना देश की security के लिए दिए जाने वाले बलिदान की याद दिलाती है। सीमाओं की रक्षा में तैनात जवानों की अहम भूमिका को लोग समझ रहे हैं। हरेराम कुंवर की शहादत साहस और कर्तव्य की मिसाल बन गई है।
देश ने झुककर किया अपने शहीद को नमन
भोजपुर के साथ पूरा देश शहीद को नमन कर रहा है। हरेराम कुंवर ने देश की रक्षा करते हुए अपना जीवन न्योछावर किया। उनके तिरंगे में लिपटे पार्थिव शरीर ने honour और sacrifice का प्रतीक प्रस्तुत किया।
परिवार का दुख समय के साथ कम होगा, लेकिन यादें हमेशा रहेंगी। गांव धीरे-धीरे संभलेगा, लेकिन गर्व हमेशा रहेगा। हर्रम कुंवर की शहादत देश की स्मृति में अमर रहेगी।



