बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ने वर्ष 2026 की बोर्ड परीक्षाओं को लेकर सुरक्षा व्यवस्था को पहले से अधिक मजबूत कर दिया है। बोर्ड ने साफ कर दिया है कि परीक्षा के दौरान किसी भी तरह की लापरवाही या फर्जीवाड़े को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इंटरमीडिएट की परीक्षाएं 1 फरवरी से शुरू होंगी, जबकि मैट्रिक की परीक्षाएं 17 फरवरी से आयोजित की जाएंगी। इन परीक्षाओं को देखते हुए बोर्ड ने सभी परीक्षा केंद्रों पर कड़े इंतजाम किए हैं।
Article Contents
बोर्ड के अनुसार, परीक्षा केंद्रों पर पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारियों की तैनाती की जाएगी। परीक्षा प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए multi-layer security system लागू किया गया है। हर परीक्षा केंद्र पर CCTV surveillance की व्यवस्था होगी और कंट्रोल रूम से लगातार निगरानी की जाएगी।
डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ी गई पूरी परीक्षा प्रक्रिया
इस बार बिहार बोर्ड ने परीक्षा की पूरी प्रक्रिया को digital monitoring से जोड़ दिया है। ऑनलाइन आवेदन भरने से लेकर परीक्षा परिणाम जारी होने तक हर चरण को डिजिटल बनाया गया है। बोर्ड का मानना है कि इससे मैनुअल गड़बड़ियों की संभावना कम होगी और पारदर्शिता बढ़ेगी।
डिजिटल सिस्टम के जरिए छात्रों की उपस्थिति, रिपोर्टिंग और अन्य जानकारियों पर नजर रखी जाएगी। किसी भी तरह की अनियमितता होने पर उसे तुरंत चिन्हित किया जा सकेगा। बोर्ड अधिकारियों का कहना है कि इससे प्रशासनिक कार्यों में भी तेजी आएगी।
परीक्षा हॉल में इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पर पूरी तरह रोक
बिहार बोर्ड ने परीक्षा केंद्रों पर इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पर सख्त प्रतिबंध लगाया है। परीक्षा हॉल में मोबाइल फोन, स्मार्टवॉच, ब्लूटूथ डिवाइस, कैमरा या किसी भी तरह का इलेक्ट्रॉनिक गैजेट ले जाना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। प्रवेश द्वार पर सघन जांच की जाएगी।
बोर्ड ने चेतावनी दी है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले छात्रों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। ऐसे मामलों में परीक्षा रद्द की जा सकती है और आगे की परीक्षाओं में बैठने पर भी रोक लग सकती है। छात्रों और अभिभावकों को पहले ही इन नियमों की जानकारी दे दी गई है।
फर्जीवाड़ा रोकने के लिए AI system का इस्तेमाल
इस बार बिहार बोर्ड ने परीक्षा प्रणाली में AI system को शामिल किया है। यह तकनीक फर्जी दस्तावेजों और किसी दूसरे की जगह परीक्षा देने वाले अभ्यर्थियों की पहचान करने में मदद करेगी। पहले कई बार ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां छात्र फर्जी सर्टिफिकेट के आधार पर परीक्षा में शामिल हुए।
AI तकनीक के जरिए छात्रों के नाम, जन्मतिथि, फोटो, हस्ताक्षर, पता और आधार से जुड़ी जानकारी का मिलान किया जाएगा। यदि कोई छात्र नाम बदलकर या पहचान छुपाकर दोबारा परीक्षा देने की कोशिश करेगा, तो उसे तुरंत पकड़ा जा सकेगा।
पुराने प्रमाण पत्रों की भी होगी जांच
बिहार बोर्ड के अध्यक्ष आनंद किशोर पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि AI system के माध्यम से वर्ष 1985-86 तक के पुराने प्रमाण पत्रों की जांच की जा सकती है। इस प्रक्रिया में छात्र के सभी रिकॉर्ड को डिजिटल डेटाबेस से मिलाया जाएगा।
अगर किसी भी जानकारी में गड़बड़ी पाई जाती है, तो सिस्टम तुरंत अलर्ट देगा। इससे फर्जी दस्तावेजों की पहचान तेजी से हो सकेगी और मैनुअल जांच में लगने वाला समय भी बचेगा।
परीक्षा केंद्रों पर पुलिस तैनाती और कंट्रोल रूम से निगरानी
परीक्षा के दौरान हर केंद्र पर पर्याप्त पुलिस बल तैनात रहेगा। जिला स्तर के अधिकारी परीक्षा व्यवस्था की निगरानी करेंगे। इसके साथ ही उड़नदस्ते भी बनाए गए हैं, जो अचानक निरीक्षण करेंगे।
कंट्रोल रूम से सभी परीक्षा केंद्रों पर नजर रखी जाएगी। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना मिलते ही तुरंत कार्रवाई की जाएगी। परीक्षा केंद्रों के बाहर भीड़ नियंत्रण के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं।
छात्रों और अभिभावकों के लिए बोर्ड की सलाह
बिहार बोर्ड ने परीक्षा में शामिल होने वाले छात्रों के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। छात्रों को सलाह दी गई है कि वे समय से पहले परीक्षा केंद्र पर पहुंचें और अपने सभी जरूरी दस्तावेज साथ रखें। परीक्षा केंद्र पर अनुशासन बनाए रखना अनिवार्य होगा।
अभिभावकों से भी अपील की गई है कि वे परीक्षा केंद्रों के आसपास अनावश्यक भीड़ न लगाएं और प्रशासन का सहयोग करें। बोर्ड का कहना है कि परीक्षा के सफल आयोजन में सभी का सहयोग जरूरी है।
नियम तोड़ने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई
बोर्ड ने दो टूक शब्दों में कहा है कि परीक्षा नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसमें परीक्षा निरस्त करना, भविष्य की परीक्षाओं से वंचित करना और गंभीर मामलों में कानूनी कार्रवाई भी शामिल हो सकती है।
बोर्ड अधिकारियों का कहना है कि इन कड़े कदमों का उद्देश्य ईमानदार छात्रों के हितों की रक्षा करना है। गलत तरीकों से परीक्षा देने वालों के खिलाफ सख्ती जरूरी है।
पारदर्शिता और विश्वसनीयता बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम
बिहार बोर्ड का मानना है कि digital monitoring और AI आधारित निगरानी से परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और विश्वसनीयता बढ़ेगी। इससे छात्रों और अभिभावकों का भरोसा भी मजबूत होगा।
बोर्ड ने इसे परीक्षा सुधार की दिशा में एक बड़ा कदम बताया है। परीक्षा की तैयारियां अंतिम चरण में हैं और सभी व्यवस्थाएं लगभग पूरी कर ली गई हैं। छात्रों को सलाह दी गई है कि वे नियमों का पालन करते हुए पूरी ईमानदारी से परीक्षा में शामिल हों।
Read this article in
KKN लाइव WhatsApp पर भी उपलब्ध है, खबरों की खबर के लिए यहां क्लिक करके आप हमारे चैनल को सब्सक्राइब कर सकते हैं।
Share this:
- Click to share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp
- Click to share on Facebook (Opens in new window) Facebook
- Click to share on X (Opens in new window) X
- Click to share on LinkedIn (Opens in new window) LinkedIn
- Click to share on Threads (Opens in new window) Threads
- Click to share on Telegram (Opens in new window) Telegram



