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नीतीश सरकार का बड़ा फैसला, किसानों को 1 प्रतिशत ब्याज पर मिलेगा कृषि ऋण

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Bihar की नीतीश सरकार ने किसानों को बड़ी राहत दी है। राज्य के लाखों किसानों के लिए यह फैसला आर्थिक संबल देने वाला माना जा रहा है। सरकार ने कृषि ऋण पर ब्याज बोझ कम करने के उद्देश्य से नई योजना लागू की है। इसके तहत किसानों को अब केवल 1 प्रतिशत ब्याज पर कृषि ऋण की सुविधा मिलेगी। इस पहल को किसान हित और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

कृषि विभाग और नाबार्ड के बीच हुआ समझौता

इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए कृषि विभाग और NABARD के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं। नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक Gautam Kumar Singh और कृषि निदेशक Saurabh Suman Yadav ने इस एमओयू पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते के साथ ही योजना को औपचारिक रूप से लागू करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।

सरकार ने नाबार्ड को इस योजना के लिए राज्य एजेंसी नामित किया है। नाबार्ड बैंकिंग संस्थानों और राज्य सरकार के बीच समन्वय स्थापित करेगा, ताकि किसानों तक समय पर लाभ पहुंचाया जा सके।

कैसे काम करेगी 1 प्रतिशत ब्याज अनुदान योजना

राज्य सरकार पहले से किसानों को 3 प्रतिशत ब्याज अनुदान देती रही है। अब इसके अतिरिक्त राज्य योजना मद से 1 प्रतिशत Interest Subsidy दी जाएगी। इस अतिरिक्त अनुदान के बाद किसानों को प्रभावी रूप से केवल 1 प्रतिशत ब्याज देना होगा। यह सुविधा किसानों को संस्थागत ऋण लेने के लिए प्रोत्साहित करेगी।

यह योजना किसानों के लिए ऋण को सस्ता और सुलभ बनाने के उद्देश्य से लाई गई है। सरकार का मानना है कि कम ब्याज दर से किसान समय पर ऋण चुकाने के लिए भी प्रेरित होंगे।

किन ऋणों पर मिलेगा योजना का लाभ

यह योजना 3 लाख रुपये तक के Crop Loan पर लागू होगी। इसका लाभ वाणिज्यिक बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक और सहकारी बैंकों से लिए गए ऋणों पर मिलेगा। इसके अलावा Kisan Credit Card ऋण और अल्पावधि कृषि उत्पादन ऋण भी इस योजना के दायरे में शामिल हैं।

हालांकि, इस योजना का लाभ उन्हीं किसानों को मिलेगा, जो तय समय सीमा के भीतर ऋण का भुगतान करेंगे। सरकार का उद्देश्य किसानों में वित्तीय अनुशासन को बढ़ावा देना भी है।

वित्तीय वर्ष 2025–26 के लिए बजट प्रावधान

राज्य सरकार ने Financial Year 2025–26 के लिए इस योजना हेतु 5 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। अधिकारियों के अनुसार यह राशि किसानों की मांग और योजना की प्रगति के आधार पर बढ़ाई भी जा सकती है। बजट आवंटन से यह स्पष्ट होता है कि सरकार कृषि क्षेत्र को प्राथमिकता दे रही है।

इस योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों पर ब्याज का बोझ कम करना और उन्हें समय पर बैंक ऋण उपलब्ध कराना है। इससे निजी साहूकारों पर निर्भरता घटने की उम्मीद है।

कृषि मंत्री का बयान

कृषि मंत्री Ram Kripal Yadav ने इस योजना को किसानों के लिए बड़ी सौगात बताया है। उन्होंने कहा कि 1 प्रतिशत ब्याज अनुदान योजना किसानों को आर्थिक मजबूती देगी। कम ब्याज दर से किसान खेती में बेहतर निवेश कर सकेंगे।

उन्होंने यह भी कहा कि बिहार की अर्थव्यवस्था में कृषि की अहम भूमिका है। किसानों को सशक्त बनाकर ही ग्रामीण विकास को गति दी जा सकती है।

आधुनिक खेती को मिलेगा बढ़ावा

कम ब्याज दर पर ऋण मिलने से किसान उन्नत बीज, उर्वरक और कीटनाशी खरीद सकेंगे। इसके साथ ही सिंचाई व्यवस्था और कृषि यंत्रीकरण में भी निवेश बढ़ेगा। इससे उत्पादन क्षमता में सुधार और फसलों की गुणवत्ता बेहतर होने की उम्मीद है।

सरकार का मानना है कि सस्ता ऋण किसानों को आधुनिक तकनीक अपनाने के लिए प्रेरित करेगा। इससे उनकी आय में दीर्घकालीन वृद्धि संभव होगी।

योजना के क्रियान्वयन में नाबार्ड की भूमिका

नाबार्ड इस योजना के तहत बैंकों के साथ समन्वय कर ब्याज अनुदान की प्रक्रिया को सुचारू बनाएगा। पारदर्शिता और समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित करना इसकी प्रमुख जिम्मेदारी होगी। नाबार्ड के अनुभव से योजना के प्रभावी क्रियान्वयन में मदद मिलने की उम्मीद है।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा बल

सरकार का लक्ष्य किसानों को संस्थागत ऋण से जोड़ना है। सस्ता ऋण मिलने से किसान निजी कर्ज के जाल में फंसने से बचेंगे। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में Financial Inclusion को भी बढ़ावा मिलेगा।

यह योजना बिहार सरकार की किसान हितैषी नीतियों का हिस्सा मानी जा रही है। माना जा रहा है कि इससे राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और ग्रामीण समृद्धि को नया आधार प्राप्त होगा।

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