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सौ साल के राम सुतार को महाराष्ट्र भूषण पुरस्कार से सम्मानित किया गया

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प्रसिद्ध मूर्तिकार राम सुतार को शुक्रवार को महाराष्ट्र भूषण पुरस्कार से सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार उन्हें महाराष्ट्र सरकार द्वारा उनके नोएडा स्थित घर पर दिया गया। इस सम्मान समारोह में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उपमुख्यमंत्री अजीत पवार और संस्कृति मंत्री आशीष शैलार उपस्थित थे। उन्होंने राम सुतार को कला के क्षेत्र में उनके असाधारण योगदान के लिए सराहा।

महाराष्ट्र भूषण पुरस्कार और सम्मान

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 20 मार्च को विधानसभा में यह घोषणा की थी कि राम सुतार को राज्य का सर्वोच्च नागरिक सम्मान, ‘महाराष्ट्र भूषण’ दिया जाएगा। इस पुरस्कार के अंतर्गत उन्हें 25 लाख रुपये और एक स्मृति चिह्न भी दिया गया। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें गर्व है कि राम सुतार मूल रूप से महाराष्ट्र के निवासी हैं और अपनी कला के दम पर उन्होंने पूरी दुनिया में अपनी एक अलग पहचान बनाई। उन्होंने कहा कि राम सुतार की मूर्तियां ना केवल भारत में बल्कि विदेशों में भी प्रमुख स्थानों पर स्थापित हैं, और उनके नाम पर कई रिकॉर्ड दर्ज हैं।

स्वास्थ्य कारणों से घर पर दिया गया सम्मान

राम सुतार की तबीयत इन दिनों ठीक नहीं है, और वह बिस्तर से उठने में असमर्थ हैं। इसलिए महाराष्ट्र सरकार के प्रतिनिधि उनके नोएडा स्थित घर गए और सम्मान समारोह संपन्न किया। राम सुतार ने इस सम्मान को स्वीकार करते हुए सभी का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर स्थानीय सांसद डॉ. महेश शर्मा भी उपस्थित थे। राम सुतार के बेटे और मूर्तिकार अनिल सुतार ने कहा कि वह महाराष्ट्र सरकार के आभारी हैं, जिन्होंने उनके पिता को घर पर आकर सम्मानित किया।

सौ साल का जीवन और कड़ी मेहनत

राम सुतार ने 2025 में फरवरी महीने में सौ साल की उम्र पूरी की। उनका जन्म 19 फरवरी 1925 को महाराष्ट्र के गोंडूर गांव में एक गरीब परिवार में हुआ था। वह 1990 से नोएडा में अपने स्टूडियो में काम कर रहे हैं। पद्मश्री और पद्मभूषण से सम्मानित राम सुतार ने कई ऐतिहासिक मूर्तियां और स्मारक बनाए हैं। महात्मा गांधी की 350 से अधिक मूर्तियां उन्होंने बनाई हैं। इसके अलावा, उन्होंने अजंता-एलोरा की गुफाओं में कई प्राचीन मूर्तियों के जीर्णोद्धार में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा का शिल्पकार

राम सुतार ने गुजरात में दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा, सरदार पटेल की ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ का डिजाइन किया है, जिसकी ऊंचाई 182 मीटर है। यह प्रतिमा भारत के लौह पुरुष, सरदार पटेल को श्रद्धांजलि है और भारत के एकता का प्रतीक मानी जाती है।

इसके अलावा, राम सुतार ने संसद भवन में महात्मा गांधी की प्रतिमा बनाई है, जो न केवल भारत में, बल्कि दुनिया के विभिन्न देशों में भी भेंट की गई है। राम सुतार ने 251 मीटर ऊंची भगवान श्रीराम की प्रतिमा का भी डिजाइन किया है, जो अयोध्या में स्थित है। इस प्रतिमा का उद्घाटन जल्द ही होने वाला है और यह भारत की सबसे ऊंची धार्मिक प्रतिमा होगी।

अलौकिक मूर्तियां और स्मारक

राम सुतार ने अन्य महत्वपूर्ण मूर्तियां भी बनाई हैं। इनकी सूची में बेंगलुरु में स्थित भगवान शिव की 153 फीट ऊंची प्रतिमा, मोशी, पुणे में स्थित छत्रपति संभाजी महाराज की 100 फीट ऊंची प्रतिमा और पटना में गांधी मैदान पर महात्मा गांधी की दो बच्चों के साथ मूर्ति प्रमुख हैं। इन मूर्तियों को उनके अद्वितीय शिल्प और आकार के कारण प्रतिष्ठित स्थानों पर स्थापित किया गया है।

भारत और दुनिया में प्रसिद्धि

राम सुतार की मूर्तियां न केवल भारत में बल्कि कई देशों में स्थापित हैं। उनकी कलाकृतियों को वैश्विक स्तर पर सराहा गया है, और उनका काम भारत के समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक बन चुका है। उनके द्वारा बनाई गई मूर्तियां, चाहे वह गांधी जी की हों या अन्य ऐतिहासिक और धार्मिक व्यक्तित्वों की, भारतीय कला के गौरव को बढ़ाती हैं।

राम सुतार का जीवन और उनके कार्य भारतीय कला और संस्कृति का एक अभिन्न हिस्सा बन चुके हैं। महाराष्ट्र भूषण पुरस्कार से उन्हें जो सम्मान मिला है, वह उनकी कला के प्रति योगदान का प्रमाण है। इस सम्मान के साथ ही राम सुतार ने भारतीय मूर्तिकला की दुनिया में अपना नाम और भी ऊंचा किया है। उनकी मूर्तियां आज भी भारतीय कला के प्रति उनके समर्पण और उत्कृष्टता को दर्शाती हैं। राम सुतार की कला एक जीवित किंवदंती बन चुकी है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी।

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