बिहार सरकार की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना (Mukhyamantri Kanya Utthan Yojana) के तहत स्नातक पास छात्राओं को दी जाने वाली ₹50,000 की प्रोत्साहन राशि समय पर नहीं मिल पा रही है। फंड की कमी, विश्वविद्यालय स्तर पर वेरिफिकेशन बैकलॉग और तकनीकी दिक़्क़तों के कारण हज़ारों छात्राओं का इंतज़ार लंबा होता जा रहा है।
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फंड आवंटन और अब तक का वितरण
सरकार ने इस वित्तीय वर्ष में योजना के लिए ₹990 करोड़ का बजट रखा था।
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₹200 करोड़ पहले ही वितरित हो चुके हैं।
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वर्तमान में ₹700 करोड़ का उपयोग वितरण प्रक्रिया में होना है।
लगभग 1.98 लाख छात्राओं को अब तक राशि मिल चुकी है, जबकि योजना का लक्ष्य 5 लाख स्नातक छात्राओं तक पहुँचना है (अप्रैल 2021 से दिसंबर 2024 तक डिग्री पूरी करने वाली)।
लंबित आवेदन और वेरिफिकेशन स्थिति
क़रीब 4 लाख आवेदन अलग-अलग चरणों में अटके हुए हैं:
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कई आवेदन Pending with Education Department पर रुके हुए हैं।
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बड़ी संख्या University Maker/Checker Pending की स्थिति में अटकी है।
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पोर्टल की तकनीकी समस्याओं और वेरिफिकेशन की धीमी रफ्तार से देरी और बढ़ गई है।
भुगतान में देरी के कारण
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फंड संकट –
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केवल 20-30% राशि ही शेष है।
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यह अक्टूबर 2025 तक ही खर्च हो जाएगी।
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विश्वविद्यालय वेरिफिकेशन बैकलॉग –
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प्रमाणपत्र जाँच की गति अलग-अलग विश्वविद्यालयों में अलग है।
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7 दिनों से पोर्टल तकनीकी समस्या झेल रहा है।
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आधार और दस्तावेज़ी गड़बड़ी –
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नाम या स्पेलिंग मिसमैच से Aadhaar Validation असफल।
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Not Seeded Aadhaar वाले छात्राओं का भुगतान अटक गया।
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DBT के लिए बैंक अकाउंट लिंकिंग समस्याएँ।
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तकनीकी सिस्टम समस्याएँ –
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कई अलग-अलग Status Check Links बन गए।
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OTP वेरिफिकेशन की नई प्रक्रिया ने सिस्टम को धीमा कर दिया।
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भुगतान की संभावनाएँ और टाइमलाइन
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तुरंत भुगतान: In Process स्टेटस वाले छात्रों को 24-48 घंटे में राशि मिलने की उम्मीद।
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अगला चरण: दुर्गा पूजा के बाद वेरिफिकेशन फिर शुरू होगा।
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वर्तमान फंड: अक्टूबर 2025 तक ही बाँटे जाएँगे।
क्रिटिकल अपडेट: जिन छात्राओं का आवेदन इस चरण में लंबित रह गया, उन्हें संभवतः 2026 तक इंतज़ार करना पड़ सकता है।
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दुर्गा पूजा के बाद आचार संहिता लागू होगी।
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नई सरकार बनने तक भुगतान स्थगित रह सकता है।
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अगली फंडिंग जनवरी-फरवरी 2026 में संभव।
सरकार और प्रशासन की प्रतिक्रिया
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शिक्षा विभाग ने आश्वासन दिया है कि सभी पात्र छात्राओं को राशि मिलेगी।
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विश्वविद्यालयों को प्रमाणपत्र वेरिफिकेशन तेज़ करने के निर्देश दिए गए हैं।
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UIDAI से अनुमति लेकर विशेष वेरिफिकेशन प्रक्रिया शुरू की गई है।
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हेल्पलाइन नंबर और करेक्शन विंडो खोली गई हैं।
छात्राओं और परिवारों पर असर
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आर्थिक कठिनाई: कई छात्राएँ राशि का इंतज़ार आगे की पढ़ाई, नौकरी खोज या शादी खर्च के लिए कर रही थीं।
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अस्पष्टता: बार-बार बदलते Status Check Portals से छात्राएँ उलझन में हैं।
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भय: दस्तावेज़ी त्रुटियों की वजह से भुगतान न मिलने का डर।
योजना का पृष्ठभूमि और उपलब्धि
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शुरुआत: 2018 में योजना लागू हुई।
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अब तक लाभार्थी: 6 लाख से अधिक छात्राएँ।
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कुल वितरण: ₹2,600 करोड़ से ज़्यादा।
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राशि में बढ़ोतरी: अप्रैल 2021 में प्रोत्साहन राशि ₹25,000 से बढ़ाकर ₹50,000 कर दी गई।
भविष्य की चुनौतियाँ और सुझाव
तुरंत आवश्यक कदम
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इमरजेंसी फंड रिलीज़ कर लंबित मामलों को निपटाया जाए।
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पोर्टल की तकनीकी खराबियों को तुरंत सुधारा जाए।
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वेरिफिकेशन प्रक्रिया सरल और पारदर्शी बनाई जाए।
दीर्घकालिक समाधान
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AI-आधारित वेरिफिकेशन सिस्टम लागू करना।
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वार्षिक नहीं, बल्कि तिमाही आधार पर फंड आवंटन।
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विश्वविद्यालयों और विभागों के बीच बेहतर समन्वय।
कन्या उत्थान योजना ने अब तक लाखों छात्राओं को आर्थिक सहारा दिया है, लेकिन इस समय यह योजना फंड की कमी और प्रशासनिक देरी के कारण गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है।
लगभग 60-80% छात्राओं को भुगतान हो चुका है, लेकिन शेष लाभार्थियों को इंतज़ार करना पड़ रहा है। जिनके आवेदन लंबित हैं, उन्हें शायद 2026 तक इंतज़ार करना पड़े।
छात्राओं के लिए सबसे ज़रूरी है कि वे अपने दस्तावेज़ अपडेट रखें, Aadhaar सही से Seeded हो और समय-समय पर आधिकारिक पोर्टल पर स्टेटस चेक करती रहें।



