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दिल्ली बाढ़ 2025: यमुना के बढ़ते जलस्तर से ट्रेन, मेट्रो और बस सेवाएं ठप

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राजधानी दिल्ली इस समय यमुना नदी की बाढ़ से जूझ रही है। पानी का स्तर बढ़ने से रेल, मेट्रो और बस सेवाओं पर सीधा असर पड़ा है। लोहे के पुल पर ट्रेनों की आवाजाही लगातार दूसरे दिन भी रोकनी पड़ी, जिससे कुल 99 ट्रेनों के परिचालन पर असर पड़ा। हजारों यात्री प्रभावित हुए और कई को सफर रद्द करना पड़ा।

ट्रेन सेवाएं सबसे ज्यादा प्रभावित

उत्तर रेलवे के मुताबिक, 99 प्रभावित ट्रेनों में से 40 ट्रेनों को रद्द करना पड़ा जबकि 34 को डायवर्ट कर चलाया जा रहा है। इनमें दिल्ली से गाजियाबाद, सोनीपत, पानीपत, सहारनपुर और शामली जाने वाली ज्यादातर ट्रेनें शामिल हैं। जम्मूतवी-शालीमार एक्सप्रेस जैसी लंबी दूरी की ट्रेनें भी प्रभावित हुईं।

अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा कारणों से लोहे का पुल बंद करना पड़ा। जब तक जलस्तर सामान्य नहीं होता, सेवाएं फिर से शुरू नहीं हो पाएंगी। यात्रियों से अपील की गई है कि वे यात्रा से पहले अपडेट लेते रहें।

यमुना बैंक मेट्रो स्टेशन बंद

दिल्ली मेट्रो की ब्लू लाइन (नोएडा से द्वारका) पर आने वाले यमुना बैंक मेट्रो स्टेशन को भी गुरुवार को प्रभावित किया गया। यहां प्रवेश और निकास पूरी तरह रोक दिया गया।

हालांकि, ट्रेनें स्टेशन से चलती रहीं और इंटरचेंज की सुविधा भी बनी रही। लेकिन पूरे दिन यात्री स्टेशन से बाहर या अंदर नहीं जा सके। इस वजह से रोजाना सफर करने वालों को काफी परेशानी उठानी पड़ी।

दिल्ली–देहरादून एक्सप्रेसवे पर लोगों का विरोध

उत्तर-पूर्वी दिल्ली में जाम से परेशान लोगों ने बुधवार रात दिल्ली–सहारनपुर–देहरादून एक्सप्रेसवे का एक हिस्सा खुद खोल दिया। शास्त्री पार्क चौक के पास दोपहिया चालकों ने लूप पर रखे पत्थर हटा दिए और बाइकर सीधे एक्सप्रेसवे पर चढ़ गए।

यह कदम स्थानीय लोगों की बेबसी और गुस्से को दिखाता है। भारी जाम और वैकल्पिक रास्तों की कमी ने ट्रैफिक व्यवस्था बिगाड़ दी है।

कश्मीरी गेट बस अड्डा डूबा

देश के सबसे व्यस्त बस अड्डों में से एक, कश्मीरी गेट ISBT भी बाढ़ से प्रभावित हुआ। बारिश का पानी परिसर में भर गया और बसों को पानी में ही खड़ा करना पड़ा।

यात्रियों को पानी भरे परिसर में बसों तक पहुंचने में कठिनाई हुई। लगातार दूसरे दिन पानी नहीं निकाला जा सका और बस अड्डे का संचालन बाधित रहा। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और हरियाणा जाने वाले यात्रियों को सबसे ज्यादा दिक्कत हुई।

डीटीसी मुख्यालय और डिपो भी जलमग्न

यमुना के बढ़े जलस्तर को रोकने के लिए डीटीसी मुख्यालय के पास बहने वाले नाले को बंद कर दिया गया था। गुरुवार को यही नाला ओवरफ्लो हो गया और गंदा पानी पूरे मुख्यालय में भर गया।

इस वजह से डीटीसी कार्यालय बंद करना पड़ा। जब तक पानी नहीं निकलेगा, कामकाज ठप रहेगा। मुख्यालय के पास स्थित इंद्रप्रस्थ डिपो भी जलमग्न हो गया, जिससे बसों की आवाजाही बाधित हो गई।

दिल्ली में जनजीवन अस्त-व्यस्त

यमुना की बाढ़ ने दिल्लीवासियों की रोजमर्रा की जिंदगी को बुरी तरह प्रभावित किया है। ट्रेन रद्द होने, मेट्रो में प्रवेश रोकने और बस अड्डों के डूबने से यात्री परेशान हैं।

निचले इलाकों में लोग घर छोड़कर राहत शिविरों में शरण ले रहे हैं। वहीं, कामकाजी लोग और छात्र घंटों जाम और देरी में फंसे हुए हैं। यह स्थिति एक बार फिर दिल्ली के इंफ्रास्ट्रक्चर की कमजोरी और Flood Management की कमी को उजागर करती है।

प्रशासनिक कदम और चुनौतियां

उत्तर रेलवे लगातार यात्रियों को कैंसिल और डायवर्जन की जानकारी दे रहा है। दिल्ली मेट्रो ने प्रभावित स्टेशनों की निगरानी के लिए टीमें तैनात की हैं। दिल्ली सरकार ने पानी निकालने के लिए पंप और राहतकर्मी लगाए हैं।

सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे बाढ़ग्रस्त इलाकों से दूर रहें। राहत कार्यों पर फोकस किया जा रहा है, लेकिन हालात सामान्य होने में समय लगेगा।

लंबी अवधि की चिंता

यमुना की हर साल की बाढ़ ने राजधानी की तैयारी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि बेहतर Drainage System, Embankment और Disaster Preparedness जरूरी है।

जलवायु परिवर्तन के दौर में ऐसी घटनाएं और बढ़ सकती हैं। दिल्ली को लंबे समय के लिए ठोस योजना बनानी होगी, वरना हर मानसून में यही स्थिति दोहराई जाएगी।

सितंबर 2025 की बाढ़ ने दिल्ली की Transport System को ठप कर दिया है। 40 ट्रेनें रद्द हुईं, 34 डायवर्ट हुईं, यमुना बैंक मेट्रो स्टेशन बंद हुआ और कश्मीरी गेट ISBT पानी में डूबा। डीटीसी मुख्यालय भी बंद करना पड़ा।

सरकारी एजेंसियां राहत और बचाव कार्य में जुटी हैं, लेकिन यात्रियों और आम लोगों की मुश्किलें बनी हुई हैं। यह आपदा एक बार फिर बताती है कि राजधानी को मजबूत Flood Management और Urban Planning की सख्त जरूरत है।

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