बिहार में साइबर फ्रॉड का बड़ा खुलासा हुआ है। पकड़े गए आरोपितों में मास्टरमाइंड अखिलेश वह शख्स है जिसने कभी इंजीनियरिंग की पढ़ाई शुरू की थी लेकिन बीच में ही पढ़ाई छोड़कर अपराध की दुनिया में कदम रख दिया। पढ़ाई छोड़ने के बाद उसने साइबर ठगी का धंधा शुरू किया और धीरे-धीरे एक बड़ा नेटवर्क तैयार कर लिया।
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नए सदस्यों की भर्ती और गिरोह का तरीका
अखिलेश हर दिन गिरोह में नए सदस्यों को जोड़ता था। जो लोग गिरोह से जुड़ते थे उन्हें अपने बैंक खाते का नंबर और उससे जुड़े मोबाइल नंबर का सिम उपलब्ध कराना होता था। इसके बदले उन्हें हर हफ्ते 10 से 15 हजार रुपये दिए जाते थे। इस तरीके से अखिलेश ने न केवल बड़ी टीम बनाई बल्कि साइबर ठगी से अकूत संपत्ति भी अर्जित कर ली।
गिरफ्तारियां और पुलिस की कार्रवाई
साइबर डीएसपी अभिनव परासर ने बताया कि पकड़े गए आरोपितों से पूछताछ के बाद उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया है। वहीं अन्य सदस्यों की गिरफ्तारी के लिए कई जगहों पर लगातार छापेमारी हो रही है। जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह से जुड़े आनंद नामक शख्स के खाते में रोजाना 30 से 40 हजार रुपये आते थे। इसी तरह अन्य खातों में भी मोटी रकम जमा होती थी।
पाकिस्तान कनेक्शन और NIA की पूछताछ
दिल्ली से राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की टीम भी मोतिहारी पहुंची और गिरफ्तार साइबर फ्रॉड से कई घंटे तक पूछताछ की। जांच के दौरान आरोपितों ने पाकिस्तान के चार मोबाइल नंबर दिए, जिनसे वे व्हाट्सएप कॉलिंग के जरिए लगातार संपर्क में रहते थे।
खुलासा हुआ कि पाकिस्तान में बैठे उनके आकाओं ने वीडियो भेजकर ठगी की ट्रेनिंग दी थी। इस तरह के वीडियो के जरिए उन्हें फर्जी अकाउंट बनाने, पैसों की मांग करने और धमकाने के तरीके सिखाए जाते थे।
फेसबुक ठगी से मिला सुराग
नगर थाना क्षेत्र की स्तूति कुमारी ने मोतिहारी साइबर थाना में शिकायत दर्ज कराई थी। उसके रिश्तेदार के नाम से फर्जी Facebook ID बनाई गई थी और उस ID से जुड़े एजेंट ने उसे धमकाकर 1.20 लाख रुपये की मांग की। डर के कारण स्तूति ने 30 हजार रुपये साइबर ठगों को भेज दिए।
जांच में सामने आया कि यह पैसा सुगौली थाना क्षेत्र के श्रीपुर धर्मपुर वार्ड 11 निवासी राजकृत कुमार के खाते में गया था। राजकृत फिलहाल फरार है लेकिन उसके खाते के जरिए पुलिस को गिरोह के अन्य बदमाशों तक पहुंचने का सुराग मिला।
FIR में दर्ज आठ नाम
साइबर थाना के दारोगा सौरभ कुमार आजाद के बयान पर इस मामले में आठ लोगों पर FIR दर्ज की गई है। इनमें पश्चिम चंपारण के बैरिया थाना क्षेत्र के तधवा नंदपुर गांव के अखिलेश कुमार, मनीष कुमार, रोहित कुमार, आनंद कुमार, मझौलिया थाना क्षेत्र के जौकटिया गांव के संतोष यादव और प्रेम यादव, शाहिद आलम तथा पूर्वी चंपारण के सुगौली थाना क्षेत्र के राजकृत कुमार शामिल हैं।
मास्टरमाइंड की लाइफस्टाइल और ठगी का जाल
पुलिस के अनुसार मास्टरमाइंड अखिलेश ने साइबर फ्रॉड से अकूत संपत्ति बनाई। वह युवाओं को आसान पैसे का लालच देकर गिरोह में शामिल करता था और उन्हें हर हफ्ते तय भुगतान करता था। धीरे-धीरे उसका नेटवर्क इतना बड़ा हो गया कि रोजाना लाखों रुपये की ठगी होने लगी।
साइबर ठगी का बढ़ता खतरा
इस मामले ने यह साबित कर दिया है कि साइबर फ्रॉड सिर्फ लोकल नहीं बल्कि इंटरनेशनल नेटवर्क से जुड़ा हुआ है। पाकिस्तान से ट्रेनिंग और लगातार संपर्क ने इस गैंग को और खतरनाक बना दिया था। यह केस आम लोगों के लिए चेतावनी है कि सोशल मीडिया पर फर्जी अकाउंट और अज्ञात कॉल्स से हमेशा सतर्क रहें।
बिहार का यह साइबर फ्रॉड केस दिखाता है कि तकनीक का गलत इस्तेमाल समाज के लिए कितना बड़ा खतरा बन सकता है। इंजीनियरिंग की पढ़ाई छोड़ने वाला अखिलेश अपराध की दुनिया में उतर गया और पाकिस्तान से ट्रेनिंग लेकर एक बड़ा नेटवर्क तैयार कर लिया।
पुलिस और जांच एजेंसियां लगातार इस गिरोह की जड़ों तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं। लेकिन यह साफ है कि साइबर सुरक्षा को लेकर और कड़े कदम उठाने की जरूरत है।



