बिहार विधानसभा… 2008 की वह दोपहर, जब बजट सत्र के बीच अचानक एक माननीय ने माइक पकड़ा और सदन में ऐसा राज खोल दिया कि कई चेहरों का रंग उड़ गया।
कहानी शुरू होती है 1988 से—एक गुप्त समझौते से। टिकट और मंत्रालय की डील… सत्ता और महत्वाकांक्षा का खेल… और फिर 20 साल बाद उसका पर्दाफाश।
यह कहानी है उस किंगमेकर की, जिसने सदन में अपनी वेदना उंडेल दी… और उस विजनरी नेता की, जिसने अपने ही समझौते को ठुकराकर राजनीति का नया समीकरण गढ़ दिया।
आखिर क्या था वह गुप्त राज? क्यों सदन की कार्यवाही से उसे हटा दिया गया? और कैसे उस दिन की गूंज ने आने वाले दशकों तक बिहार की राजनीति को हिला कर रख दिया?
https://youtu.be/w7TVDWjukjs

