होमNationalअजमेर मौसम अपडेट: मूसलधार बारिश से जनजीवन प्रभावित, राहत कार्य शुरू

अजमेर मौसम अपडेट: मूसलधार बारिश से जनजीवन प्रभावित, राहत कार्य शुरू

Published on

अजमेर में 18 जुलाई 2025 से मूसलधार बारिश के कारण जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। लगातार हो रही बारिश से शहर के कई इलाके जलमग्न हो गए हैं, जिससे यातायात और रोजमर्रा की गतिविधियों में भारी व्यवधान आया है। नालों का पानी सड़कों पर आ गया है, जिससे स्थिति और भी गंभीर हो गई है। हालात को बिगड़ते देख प्रशासन ने राहत कार्य शुरू कर दिए हैं।

अजमेर की बुरी स्थिति

अजमेर में बीती रात से हो रही मूसलधार बारिश ने शहर की व्यवस्था को पूरी तरह से बिगाड़ दिया है। बारिश की वजह से कई इलाकों में पानी भर गया है। कई सड़कें जलमग्न हो चुकी हैं और यातायात पूरी तरह से प्रभावित हो गया है। लोगों को घरों से बाहर निकलने में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। कई क्षेत्रों में पानी घुस जाने से मकान और दुकानें भी जलमग्न हो गई हैं।

रेलवे स्टेशन पर जलभराव

अजमेर रेलवे स्टेशन भी मूसलधार बारिश से प्रभावित हुआ है। स्टेशन के प्लेटफॉर्म और अन्य इलाके पानी से भर गए हैं। यात्रियों को प्लेटफॉर्म और ट्रेनों तक पहुंचने के लिए घुटनों तक पानी में चलने को मजबूर होना पड़ा है। यह स्थिति अजमेर रेलवे स्टेशन पर बहुत गंभीर हो गई है, जिससे यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा है।

पुष्कर में बाढ़ जैसे हालात

अजमेर के पुष्कर में बारिश के कारण बाढ़ जैसे हालात उत्पन्न हो गए हैं। कई स्थानों पर पानी इतना बढ़ गया कि राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) को प्रभावित इलाकों से लोगों को निकालने के लिए भेजा गया। यहां तक कि पशु और पक्षी भी भारी बारिश का सामना कर रहे हैं।

कावड़ यात्रियों को भी परेशानी

पुष्कर में भारी बारिश के कारण कावड़ यात्रा पर गए श्रद्धालुओं को भी काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। पानी घुटनों तक भर जाने से श्रद्धालु कावड़ लेकर यात्रा कर रहे थे। पानी में चलने के कारण यात्रा में परेशानी हुई, लेकिन श्रद्धालुओं ने अपनी यात्रा जारी रखी।

बाड़ी नदी का उफान

अजमेर की प्रमुख नदियों में से एक बाड़ी नदी भारी बारिश के कारण उफान पर है। नदी के आसपास की कॉलोनियां पानी से पूरी तरह जलमग्न हो गई हैं। आसपास के क्षेत्रों में पानी भर जाने के कारण स्थिति गंभीर हो गई है और स्थानीय प्रशासन ने राहत कार्य शुरू कर दिए हैं।

स्थानीय बाजारों में सन्नाटा

अजमेर में भारी बारिश के कारण स्थानीय बाजारों में सन्नाटा छाया हुआ है। जलभराव की वजह से लोग अपने घरों से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। इसके साथ ही कई स्थानों पर बिजली आपूर्ति भी बाधित हो गई है, जिससे लोगों को और भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

राहत कार्य शुरू

अजमेर प्रशासन ने स्थिति को देखते हुए राहत कार्य शुरू कर दिए हैं। कई स्थानों पर राहत शिविर लगाए गए हैं और प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है। राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) और स्थानीय प्रशासन के कर्मचारी आपातकालीन कार्यों में जुटे हुए हैं।

मौसम विभाग की चेतावनी

मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले दिनों में भी बारिश जारी रह सकती है, हालांकि उसकी तीव्रता में कुछ कमी आ सकती है। अगर भारी बारिश जारी रही तो स्थिति और बिगड़ सकती है। प्रशासन ने बारिश के कारण बाढ़ की संभावना को देखते हुए तैयारी की है और राहत कार्य तेज कर दिए हैं।

अजमेर में मूसलधार बारिश ने शहर में भारी तबाही मचाई है, जिसके चलते कई इलाके जलमग्न हो गए हैं और यातायात ठप हो गया है। प्रशासन और राहत एजेंसियां स्थिति को नियंत्रण में करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही हैं। स्थानीय निवासियों से अपील की गई है कि वे अत्यधिक बारिश के दौरान घरों से बाहर न निकलें और राहत कार्यों में मदद करें।

Read this article in

KKN लाइव WhatsApp पर भी उपलब्ध है, खबरों की खबर के लिए यहां क्लिक करके आप हमारे चैनल को सब्सक्राइब कर सकते हैं।

KKN Public Correspondent Initiative


Discover more from

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Latest articles

मीनापुर की महिलाएं घर चलाने में कितना योगदान देती हैं? गांव की छिपी अर्थव्यवस्था का सच

मीनापुर की अर्थव्यवस्था का आधा हिस्सा शायद दिखाई ही नहीं देता मीनापुर की अर्थव्यवस्था का...

क्या अमेरिका पर भरोसा करने का दौर खत्म हो रहा है? भारत की नई चुनौती

दुनिया की राजनीति में अमेरिका की ताकत पर शायद ही कोई सवाल उठाता है,...

बागमती की पुरानी धारा फिर जगी तो मीनापुर में क्या बदलेगा? बाढ़ से राहत या नई मुसीबत—बेलवा डैम से बूढ़ी गंडक तक

मीनापुर के लिए यह सिर्फ नदी की खुदाई नहीं है मीनापुर में बागमती की पुरानी...

मीनापुर के युवा बाहर क्यों जा रहे हैं? गांव से महानगर तक जानिए पलायन की पूरी दास्तान

सवाल सिर्फ नौकरी का नहीं, घर छोड़ने की मजबूरी का है मीनापुर के किसी गांव...

More like this

मीनापुर की महिलाएं घर चलाने में कितना योगदान देती हैं? गांव की छिपी अर्थव्यवस्था का सच

मीनापुर की अर्थव्यवस्था का आधा हिस्सा शायद दिखाई ही नहीं देता मीनापुर की अर्थव्यवस्था का...

बागमती की पुरानी धारा फिर जगी तो मीनापुर में क्या बदलेगा? बाढ़ से राहत या नई मुसीबत—बेलवा डैम से बूढ़ी गंडक तक

मीनापुर के लिए यह सिर्फ नदी की खुदाई नहीं है मीनापुर में बागमती की पुरानी...

मीनापुर के युवा बाहर क्यों जा रहे हैं? गांव से महानगर तक जानिए पलायन की पूरी दास्तान

सवाल सिर्फ नौकरी का नहीं, घर छोड़ने की मजबूरी का है मीनापुर के किसी गांव...

बिहार का पलायन: क्या रोज़गार की तलाश में निकलती पीढ़ियां कभी लौटेंगी?

बिहार के किसी छोटे से गांव में शाम ढलते ही अगर आप बस अड्डे,...

कहां गुम हो रही हैं बिहार की बेटियां?

गुमशुदगी का आंकड़ा गंभीर है एक लड़की घर से निकलती है। परिवार समझता है कि...

बिहार में बारिश और तेज हवा ने फिर बदला मौसम का मिजाज, 26 जिलों में अलर्ट; आखिर कब थमेगा यह सिलसिला?

आसमान में बादल हैं। रुक-रुक कर बारिश लगातार हो रही है, अचानक तेज बौछार...

चुनाव आयोग पर क्यों मचा है हंगामा? 14 आपत्तियों से उठे सवाल, ज्ञानेश कुमार की भूमिका और सत्ता पक्ष की असहजता की पूरी पड़ताल

भारत में चुनाव केवल सरकार चुनने की प्रक्रिया नहीं हैं। चुनाव वह बुनियादी व्यवस्था...

एक सच, दो नज़रिया: दिमाग की गलती, समाज का असर या सोच का खेल?

क्यों एक ही तथ्य किसी को अवसर लगता है, तो किसी को खतरा? क्या...

विश्वकर्मा पूजा: मशीन पर फूल चढ़ाने की परंपरा या इंसान के हुनर को सलाम?

ऋग्वेद के ‘विश्वकर्मन्’ से आधुनिक कारखाने तक पहुंची परंपरा में आखिर छिपा संदेश क्या...

हिंदी सिर्फ एक भाषा नहीं, भारत की चलती-फिरती कहानी है

हिंदी दिवस पर विशेष: क्या आप जानते हैं कि हिंदी को ‘राष्ट्रभाषा’ नहीं, ‘राजभाषा’...

बिहार की सड़कें बन गईं मौत की सड़क? 5 साल में 34% बढ़े हादसे, 9,347 लोगों की गई जान

आंकड़ों का एक्स-रे: दुर्घटनाएं बढ़ीं, मौतें उससे भी तेज बढ़ीं KKN ब्यूरो। एक सड़क। एक...

लग गया ट्रांसफार्मर; किसानों की लड़ाई रंग लाई

जिस समस्या के समाधान की उम्मीद किसानों ने लगभग छोड़ दी थी, आखिरकार उसी...

बिहार की बाढ़: पानी उतर जाएगा, लेकिन कब तक पटरी पर लौटेंगी लोगों की जिंदगी?

क्या बाढ़ आने के बाद नाव भेज देना, राहत शिविर खोल देना और कुछ...

ध्वनि प्रदूषण: जुलूस आगे बढ़ता रहा… लेकिन, कानों में पड़ने वाला शोर वहीं रह गया

डीजे की धुन पर नाचते बच्चों को देखकर भीड़ तालियां बजाती है। किसी को...

क्या नकारात्मक सोच इंसान को उसी अंधेरे में धकेल देती है, जिसे वह दुनिया में खोज रहा होता है?

हर घटना में षड्यंत्र, हर परंपरा में खामी, हर व्यक्ति में स्वार्थ और हर...