होमNationalAxiom-4 मिशन से वापसी को तैयार भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला, आज...

Axiom-4 मिशन से वापसी को तैयार भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला, आज होगा ISS से Undocking

Published on

भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला आज Axiom-4 मिशन के तहत लगभग 20 दिनों की अंतरिक्ष यात्रा के बाद धरती पर लौटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। वह तीन अन्य अंतरिक्ष यात्रियों के साथ SpaceX Dragon spacecraft में सवार होकर इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) से पृथ्वी की ओर रवाना होंगे।

आज शाम होगा स्पेसक्राफ्ट का अनडॉकिंग

SpaceX का Dragon स्पेसक्राफ्ट आज शाम लगभग 4:45 बजे (IST) ISS से अनडॉक होने वाला है। पहले यह प्रक्रिया 4:30 बजे निर्धारित थी लेकिन तकनीकी कारणों से इसमें 10 मिनट की देरी हुई है। मिशन कंट्रोल की टीम ने सभी जरूरी जांच पूरी कर ली है।

शुभांशु शुक्ला और उनकी टीम के सदस्य पहले ही स्पेसक्राफ्ट में सवार हो चुके हैं और अपनी-अपनी सीटों पर सुरक्षित रूप से बैठ चुके हैं। अब सारी नजरें इस ऐतिहासिक वापसी पर टिकी हैं।

कल सुबह कैलिफोर्निया में होगी Splashdown

शुभांशु शुक्ला और उनके साथियों की वापसी 15 जुलाई की सुबह लगभग 3 बजे IST के आसपास कैलिफोर्निया के समुद्री क्षेत्र में होने की संभावना है। NASA और Axiom की टीमें पहले से Splashdown साइट पर मौजूद हैं और रिकवरी ऑपरेशन के लिए तैयार हैं।

Dragon स्पेसक्राफ्ट ISS से अलग होने के बाद धरती की कक्षा में कुछ समय बिताएगा और फिर नियंत्रित तरीके से समुद्र में लैंड करेगा।

क्या किया शुभांशु शुक्ला ने अंतरिक्ष में?

Axiom-4 मिशन के दौरान शुभांशु शुक्ला ने कई महत्वपूर्ण वैज्ञानिक प्रयोगों में हिस्सा लिया। इनमें शामिल हैं:

  • माइक्रोग्रैविटी (microgravity) में बॉडी बिहेवियर की स्टडी

  • स्पेस हेल्थ और लाइफ साइंस से जुड़े टेस्ट्स

  • नई तकनीकों का परिक्षण जो भविष्य में अंतरिक्ष मिशनों में काम आएंगी।

उनका यह मिशन खासतौर पर युवाओं के लिए एक प्रेरणा बन चुका है। देशभर के छात्रों और विज्ञान प्रेमियों ने इस पूरे मिशन को बड़ी उत्सुकता से फॉलो किया।

अंतरिक्ष से ला रहे हैं 263 किलोग्राम ‘Space Junk’

Axiom-4 मिशन की वापसी के दौरान शुभांशु और उनकी टीम 263 किलोग्राम स्पेस कचरा (Space Waste) भी ला रही है। इसमें पुराने वैज्ञानिक उपकरण, प्रयोगशाला टूल्स और NASA का हार्डवेयर शामिल है। यह प्रयास भविष्य की साफ-सुथरी अंतरिक्ष यात्रा की दिशा में एक कदम है।

Axiom-4 क्यों है खास?

Axiom-4 मिशन NASA और SpaceX के सहयोग से Axiom Space द्वारा आयोजित किया गया चौथा प्राइवेट मिशन है। इसका उद्देश्य है:

  • Low Earth Orbit (LEO) में नियमित मानव उपस्थिति का रास्ता बनाना।

  • प्राइवेट स्पेस स्टेशन Axiom Station की तैयारी को मजबूती देना।

  • आम नागरिकों और निजी कंपनियों को स्पेस रिसर्च से जोड़ना।

शुभांशु इस मिशन का हिस्सा बनकर भारत के नाम को अंतरिक्ष विज्ञान में और ऊंचा ले गए हैं।

टाइमलाइन: शुभांशु की वापसी से जुड़े मुख्य अपडेट

समय (IST) अपडेट विवरण
1:05 PM सभी अंतरिक्ष यात्रियों ने तैयारियां शुरू कीं
2:00 PM फाइनल सिस्टम चेक किया गया
4:30 PM तय समय पर अनडॉकिंग होना था
4:45 PM नई टाइमिंग, Dragon यान ISS से अलग होगा
3:00 AM (15 जुलाई) स्प्लैशडाउन, कैलिफोर्निया तट के पास होगा

शांति से होगी वापसी, तैयार है रिकवरी टीम

Landing के तुरंत बाद:

  • NASA और Axiom की टीमें Dragon कैप्सूल को रिकवर करेंगी।

  • Space Crew को मेडिकल चेकअप के लिए नजदीकी फैसिलिटी में ले जाया जाएगा।

  • शुभांशु शुक्ला के लिए सम्मान समारोह और प्रेस कॉन्फ्रेंस की तैयारी है।

क्या है भविष्य की राह?

Axiom-4 में अपनी सफल भूमिका निभाने के बाद शुभांशु शुक्ला भारत के युवाओं के लिए एक आइकॉन बन चुके हैं। इस मिशन की सफलता ISRO और भारतीय स्पेस इंडस्ट्री के लिए भी बड़ी प्रेरणा है।

भारत अब न केवल सरकारी बल्कि निजी अंतरिक्ष मिशनों में भी अपनी भागीदारी को तेजी से बढ़ा रहा है।

Axiom-4 से शुभांशु शुक्ला की धरती पर वापसी सिर्फ एक मिशन का अंत नहीं बल्कि भारत की अंतरिक्ष यात्रा में नया अध्याय है। अगले कुछ घंटों में जब वे कैलिफोर्निया की धरती पर कदम रखेंगे, भारत एक और ऐतिहासिक उपलब्धि का साक्षी बनेगा।

Read this article in

KKN लाइव WhatsApp पर भी उपलब्ध है, खबरों की खबर के लिए यहां क्लिक करके आप हमारे चैनल को सब्सक्राइब कर सकते हैं।

KKN Public Correspondent Initiative


Discover more from

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Latest articles

हिंद केसरी यादव: मीनापुर की राजनीति में वह नाम, जिसने आंदोलन को सड़क से सदन तक पहुंचाया

पांचवीं पुण्यतिथि पर दरहीपट्टी में श्रद्धांजलि सभा, वक्ताओं ने कहा—अधूरे कार्यों को आगे बढ़ाना...

मीनापुर की महिलाएं घर चलाने में कितना योगदान देती हैं? गांव की छिपी अर्थव्यवस्था का सच

मीनापुर की अर्थव्यवस्था का आधा हिस्सा शायद दिखाई ही नहीं देता मीनापुर की अर्थव्यवस्था का...

क्या अमेरिका पर भरोसा करने का दौर खत्म हो रहा है? भारत की नई चुनौती

दुनिया की राजनीति में अमेरिका की ताकत पर शायद ही कोई सवाल उठाता है,...

बागमती की पुरानी धारा फिर जगी तो मीनापुर में क्या बदलेगा? बाढ़ से राहत या नई मुसीबत—बेलवा डैम से बूढ़ी गंडक तक

मीनापुर के लिए यह सिर्फ नदी की खुदाई नहीं है मीनापुर में बागमती की पुरानी...

More like this

मीनापुर की महिलाएं घर चलाने में कितना योगदान देती हैं? गांव की छिपी अर्थव्यवस्था का सच

मीनापुर की अर्थव्यवस्था का आधा हिस्सा शायद दिखाई ही नहीं देता मीनापुर की अर्थव्यवस्था का...

बागमती की पुरानी धारा फिर जगी तो मीनापुर में क्या बदलेगा? बाढ़ से राहत या नई मुसीबत—बेलवा डैम से बूढ़ी गंडक तक

मीनापुर के लिए यह सिर्फ नदी की खुदाई नहीं है मीनापुर में बागमती की पुरानी...

मीनापुर के युवा बाहर क्यों जा रहे हैं? गांव से महानगर तक जानिए पलायन की पूरी दास्तान

सवाल सिर्फ नौकरी का नहीं, घर छोड़ने की मजबूरी का है मीनापुर के किसी गांव...

बिहार का पलायन: क्या रोज़गार की तलाश में निकलती पीढ़ियां कभी लौटेंगी?

बिहार के किसी छोटे से गांव में शाम ढलते ही अगर आप बस अड्डे,...

कहां गुम हो रही हैं बिहार की बेटियां?

गुमशुदगी का आंकड़ा गंभीर है एक लड़की घर से निकलती है। परिवार समझता है कि...

बिहार में बारिश और तेज हवा ने फिर बदला मौसम का मिजाज, 26 जिलों में अलर्ट; आखिर कब थमेगा यह सिलसिला?

आसमान में बादल हैं। रुक-रुक कर बारिश लगातार हो रही है, अचानक तेज बौछार...

चुनाव आयोग पर क्यों मचा है हंगामा? 14 आपत्तियों से उठे सवाल, ज्ञानेश कुमार की भूमिका और सत्ता पक्ष की असहजता की पूरी पड़ताल

भारत में चुनाव केवल सरकार चुनने की प्रक्रिया नहीं हैं। चुनाव वह बुनियादी व्यवस्था...

ट्रंप के दौर में क्या अमेरिका की वैश्विक साख घटी? आंकड़े क्या कहते हैं

KKN ब्यूरो। एक समय था जब दुनिया के किसी संकट पर एक सवाल लगभग...

एक सच, दो नज़रिया: दिमाग की गलती, समाज का असर या सोच का खेल?

क्यों एक ही तथ्य किसी को अवसर लगता है, तो किसी को खतरा? क्या...

विश्वकर्मा पूजा: मशीन पर फूल चढ़ाने की परंपरा या इंसान के हुनर को सलाम?

ऋग्वेद के ‘विश्वकर्मन्’ से आधुनिक कारखाने तक पहुंची परंपरा में आखिर छिपा संदेश क्या...

हिंदी सिर्फ एक भाषा नहीं, भारत की चलती-फिरती कहानी है

हिंदी दिवस पर विशेष: क्या आप जानते हैं कि हिंदी को ‘राष्ट्रभाषा’ नहीं, ‘राजभाषा’...

बिहार की सड़कें बन गईं मौत की सड़क? 5 साल में 34% बढ़े हादसे, 9,347 लोगों की गई जान

आंकड़ों का एक्स-रे: दुर्घटनाएं बढ़ीं, मौतें उससे भी तेज बढ़ीं KKN ब्यूरो। एक सड़क। एक...

लग गया ट्रांसफार्मर; किसानों की लड़ाई रंग लाई

जिस समस्या के समाधान की उम्मीद किसानों ने लगभग छोड़ दी थी, आखिरकार उसी...

बिहार की बाढ़: पानी उतर जाएगा, लेकिन कब तक पटरी पर लौटेंगी लोगों की जिंदगी?

क्या बाढ़ आने के बाद नाव भेज देना, राहत शिविर खोल देना और कुछ...

ध्वनि प्रदूषण: जुलूस आगे बढ़ता रहा… लेकिन, कानों में पड़ने वाला शोर वहीं रह गया

डीजे की धुन पर नाचते बच्चों को देखकर भीड़ तालियां बजाती है। किसी को...