पाकिस्तान के अशांत बलूचिस्तान प्रांत में गुरुवार शाम को एक दिल दहला देने वाला हमला हुआ, जिसमें अज्ञात बंदूकधारियों ने नौ बस यात्रियों को अगवा कर गोली मार दी। घटना की पुष्टि सरकार के अधिकारियों ने शुक्रवार सुबह की। प्रारंभिक जांच में बलूच अलगाववादी गुटों की संलिप्तता की आशंका जताई जा रही है, हालांकि अभी तक किसी भी संगठन ने हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है।
कैसे हुआ हमला?
सरकारी प्रवक्ता शाहिद रिंद के अनुसार, गुरुवार शाम को कई यात्रियों से भरी बसें बलूचिस्तान के बोलन जिले से गुजर रही थीं, जब हथियारों से लैस हमलावरों ने उन्हें रोका। बसों से यात्रियों को जबरन उतारा गया और उनमें से चुनिंदा लोगों को पास के पहाड़ी इलाके में ले जाकर गोलियों से भून दिया गया।
सरकारी अधिकारी नवीद आलम ने जानकारी दी,
“रात भर चले सर्च ऑपरेशन के बाद पहाड़ों में गोलियों से छलनी शव बरामद हुए हैं।”
घटना स्थल बेहद दुर्गम इलाका था, जिससे राहत और बचाव कार्य में काफी कठिनाई आई।
हमलावरों का मकसद क्या था?
हालांकि, मारे गए यात्रियों की पहचान पूरी तरह से उजागर नहीं की गई है, लेकिन अधिकारियों को संदेह है कि यह हमला जातीय आधार पर चुनकर हत्याएं करने की एक और कोशिश थी। अतीत में बलूच अलगाववादी संगठन अक्सर पंजाब प्रांत से आए नागरिकों को निशाना बनाते रहे हैं, जिन्हें वे “बाहरी” मानते हैं।
इस तरह के हमलों का उद्देश्य बलूच क्षेत्र में आबादी के संतुलन को प्रभावित करना और राज्य पर दबाव बनाना होता है।
अभी तक किसी संगठन ने नहीं ली जिम्मेदारी
शुक्रवार सुबह तक इस हमले की जिम्मेदारी किसी भी आतंकवादी या अलगाववादी संगठन ने नहीं ली है। हालांकि बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) जैसे संगठनों पर शक गहराता जा रहा है। यह संगठन पाकिस्तान सरकार द्वारा प्रतिबंधित है और पहले भी इसी तरह के लक्षित हमलों में शामिल रहा है।
बलूच लिबरेशन आर्मी लंबे समय से पाकिस्तान पर बलूचिस्तान के प्राकृतिक संसाधनों के शोषण का आरोप लगाता रहा है, खासकर यह दावा करता है कि पंजाब प्रांत को लाभ पहुंचाने के लिए बलूचिस्तान की संपदा लूटी जा रही है।
बलूचिस्तान: एक ज्वालामुखी की तरह सुलगता इलाका
बलूचिस्तान, जो पाकिस्तान का सबसे बड़ा लेकिन सबसे कम विकसित प्रांत है, लंबे समय से राजनीतिक उपेक्षा, आर्थिक शोषण और सैन्य कार्रवाई का शिकार रहा है। यहां की जातीय बलूच आबादी पाकिस्तान से अधिक स्वायत्तता और संसाधनों पर अधिकार की मांग करती रही है।
इस क्षेत्र में समय-समय पर हुए प्रमुख हमले:
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गैस पाइपलाइन और रेलवे ट्रैक पर बम धमाके
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चीनी इंजीनियरों और CPEC प्रोजेक्ट पर हमले
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जातीय पंजाबी मजदूरों की हत्या
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सरकारी इमारतों और सुरक्षाबलों पर हमले
सेना और सरकार का जवाब
हमले के बाद पाकिस्तानी सेना और अर्धसैनिक बलों ने बोलन और मस्तुंग जिलों के पहाड़ी क्षेत्रों में तलाशी अभियान शुरू कर दिया है। प्रांत के गृह विभाग ने सभी बस स्टैंड, हाइवे और ट्रांजिट रूट्स पर सुरक्षा बढ़ा दी है।
पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नक़वी ने हमले को “कायरता पूर्ण आतंकवादी कार्रवाई” बताते हुए दोषियों को जल्द पकड़ने का भरोसा दिलाया है।
क्या फिर से भड़केगी जातीय हिंसा?
बलूचिस्तान की यह घटना पंजाब और बलूच समुदाय के बीच की दरार को और गहरा कर सकती है। अतीत में भी ऐसे हमलों ने देश में अंतर-प्रांतीय तनाव को बढ़ावा दिया है। इससे पाकिस्तान के राजनीतिक स्थायित्व और सामाजिक सौहार्द्र पर भी खतरा मंडरा रहा है।
अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोण
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग और कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने बलूचिस्तान में मानवाधिकार हनन और सुरक्षा बलों की जवाबदेही की कमी पर चिंता जताई है। यह घटना अंतरराष्ट्रीय मीडिया का ध्यान भी आकर्षित कर सकती है, खासकर जब पाकिस्तान CPEC जैसे अंतरराष्ट्रीय निवेश प्रोजेक्ट्स को लेकर चिंतित है।
यात्री सुरक्षा पर सवाल
घटना ऐसे समय में हुई है जब पाकिस्तान में सावन के धार्मिक पर्व और मुहर्रम को लेकर बड़ी संख्या में लोग लंबी दूरी की यात्राएं करते हैं। अब यात्री और बस ऑपरेटर अधिक सुरक्षा, सशस्त्र एस्कॉर्ट, और चेकिंग व्यवस्था की मांग कर रहे हैं।
बलूचिस्तान का यह हमला एक बार फिर साबित करता है कि पाकिस्तान का यह इलाका सुरक्षा और स्थिरता के लिहाज से बेहद संवेदनशील बना हुआ है। राजनीतिक संवाद, सामाजिक समावेश, और मानवाधिकारों का सम्मान ही इस समस्या का दीर्घकालिक समाधान हो सकता है।
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