मिडिल ईस्ट में उठती युद्ध की लपटें क्या सिर्फ एक सैन्य कार्रवाई हैं… या दुनिया की नई भू-राजनीतिक व्यवस्था की शुरुआत? ईरान की इस्लामिक क्रांति से लेकर आज तक, मिडिल ईस्ट की राजनीति कई बार ऐसे मोड़ से गुज़री है जहाँ एक नेता की मौत ने युद्ध को खत्म नहीं किया—बल्कि उसे और खतरनाक बना दिया। आज तेहरान में जो हो रहा है, वह सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र की शक्ति संरचना को बदलने की प्रस्तावना भी हो सकता है। अगर हॉर्मुज जलडमरूमध्य प्रभावित हुआ तो इसका असर सिर्फ तेल की कीमतों पर नहीं बल्कि भारत की अर्थव्यवस्था, वैश्विक बाज़ार और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर भी पड़ेगा। क्या यह संघर्ष नई विश्व व्यवस्था की शुरुआत है?