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विजय की TVK रैली में सुरक्षा चूक पर उठे सवाल, पलानीस्वामी ने साधा निशाना

तमिलनाडु के करूर में तमिलगा वेत्री कषगम (TVK) की रैली एक बड़ी त्रासदी में बदल गई। शनिवार को आयोजित इस राजनीतिक सभा में अचानक बिजली आपूर्ति बाधित होने से भगदड़ मच गई। इस दर्दनाक हादसे में 39 निर्दोष लोगों की मौत हो गई जबकि 51 से अधिक लोग अस्पताल में भर्ती हुए। इस घटना ने सुरक्षा इंतज़ाम और Crowd Management पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

AIADMK महासचिव और पूर्व मुख्यमंत्री के. पलानीस्वामी ने इस हादसे के लिए पुलिस, राज्य सरकार और TVK नेतृत्व को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि यदि पर्याप्त सावधानी बरती जाती तो इतनी बड़ी त्रासदी टाली जा सकती थी।

पलानीस्वामी के आरोप और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल

पलानीस्वामी ने संवाददाताओं से कहा कि मीडिया रिपोर्ट्स स्पष्ट रूप से दिखाती हैं कि विजय की रैली में Security Lapse हुआ। अचानक बिजली जाने से अफरातफरी मची और भगदड़ फैल गई। उन्होंने यह भी कहा कि TVK को पहले ही चार रैलियों का अनुभव था और उसे अपने कार्यकर्ताओं की सुरक्षा को प्राथमिकता देनी चाहिए थी।

AIADMK नेता ने इस बात पर जोर दिया कि पुलिस को भीड़ के आकार को ध्यान में रखते हुए पहले से तैयारी करनी चाहिए थी। Crowd Control और Safety Drill जैसी व्यवस्थाओं की कमी ने स्थिति को और बिगाड़ दिया।

अस्पताल का दौरा और पीड़ितों से मुलाकात

मीडिया से बात करने से पहले पलानीस्वामी ने करूर सरकारी अस्पताल का दौरा किया। उन्होंने हादसे में घायल लोगों का हालचाल जाना और डॉक्टर्स से इलाज की जानकारी ली। इस दौरान उन्होंने गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि आम जनता राजनीतिक सभाओं में पार्टी, सरकार और पुलिस पर भरोसा करके आती है।

उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों की मौत तमिलनाडु की राजनीति में अभूतपूर्व है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अन्य राजनीतिक दलों की सभाओं में ऐसा हादसा कभी नहीं हुआ है, इसलिए यह घटना और भी चौंकाने वाली है।

सरकार और TVK की जिम्मेदारी पर सवाल

पलानीस्वामी ने राज्य सरकार और TVK नेतृत्व दोनों को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि बड़े राजनीतिक आयोजनों के लिए मजबूत सुरक्षा प्रबंधन, Backup Power System और Medical Support अनिवार्य है।

उन्होंने यह भी कहा कि Political Rally केवल भीड़ जुटाने का माध्यम नहीं हो सकती, बल्कि लोगों की जान की सुरक्षा सर्वोपरि होनी चाहिए। जनता जब हजारों की संख्या में इकट्ठा होती है, तो वह पूरी तरह प्रशासन और आयोजकों पर भरोसा करती है। ऐसी स्थिति में जान गंवाना सीधा लापरवाही का परिणाम है।

भगदड़ और भयावह मंजर

करूर की रैली में भगदड़ के बाद का दृश्य बेहद भयावह था। चश्मदीदों के अनुसार जैसे ही बिजली गई, अफरा-तफरी मच गई। लोग出口 खोजते हुए एक-दूसरे पर गिरने लगे और कई लोग कुचल गए। Survivors का कहना है कि Emergency Exit और Medical टीम जैसी सुविधाएं मौजूद नहीं थीं।

अन्य रैलियों से तुलना

पलानीस्वामी ने कहा कि तमिलनाडु की राजनीतिक परंपरा में बड़ी सभाएं आम रही हैं, लेकिन ऐसी त्रासदी पहले कभी नहीं हुई। उन्होंने सवाल उठाया कि TVK ने पिछले आयोजनों से सबक क्यों नहीं लिया। उन्होंने कहा कि Political Enthusiasm के साथ जिम्मेदारी भी जरूरी है, वरना ऐसी घटनाएं जनता के लिए घातक हो सकती हैं।

राजनीतिक प्रतिक्रिया और जनता का आक्रोश

करूर हादसे ने पूरे राज्य के राजनीतिक माहौल को झकझोर दिया है। विपक्षी दल सरकार से जवाब मांग रहे हैं, जबकि TVK समर्थक पारदर्शी जांच की मांग कर रहे हैं।

जनता के बीच भी गुस्सा साफ झलक रहा है। कई लोग इस बात से आहत हैं कि साधारण परिवार जो विजय को सुनने आए थे, वे हादसे के शिकार बन गए। Civil Society Groups अब इस बात की मांग कर रहे हैं कि Political Gatherings के लिए नए सुरक्षा नियम बनाए जाएं।

भविष्य के लिए सबक

इस त्रासदी ने Crowd Management और Public Safety पर गहन चिंतन की जरूरत पैदा कर दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि अब हर राजनीतिक सभा में Safety Guidelines, Medical Camp, Backup Electricity और प्रशिक्षित Security Personnel की मौजूदगी अनिवार्य होनी चाहिए।

राजनीतिक दलों को Law Enforcement Agencies के साथ मिलकर ही आयोजन करना चाहिए। वरना ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति से बचना मुश्किल होगा।

पलानीस्वामी की अपील और जांच की मांग

पलानीस्वामी ने अपनी बात को समाप्त करते हुए कहा कि सरकार को इस त्रासदी को गंभीरता से लेना चाहिए। उन्होंने निष्पक्ष जांच की मांग की और कहा कि भविष्य की सभाओं में Public Safety से समझौता नहीं होना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि वह किसी एक पक्ष को दोष नहीं दे रहे, लेकिन 39 निर्दोष लोगों की मौत ने राज्य की राजनीति को हिला दिया है। यह सरकार और TVK दोनों के लिए एक नैतिक जिम्मेदारी का सवाल है।

तमिलनाडु की राजनीति के लिए चुनौती

करूर की यह घटना तमिलनाडु की राजनीति के लिए एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकती है। विजय की TVK के लिए यह पार्टी की छवि पर गंभीर असर डाल सकती है। अगर समय पर Corrective Measures नहीं लिए गए तो जनता का विश्वास डगमगा सकता है।

राज्य सरकार के लिए भी यह एक बड़ा सबक है। अब समय आ गया है कि Mass Political Rally की सुरक्षा को लेकर ठोस नीति बनाई जाए। लोकतंत्र में जनसभाएं जरूरी हैं, लेकिन अगर सुरक्षा पर ध्यान नहीं दिया गया तो वे मौत का मैदान भी बन सकती हैं।

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