KKN गुरुग्राम डेस्क | विराट कोहली ने टेस्ट क्रिकेट से आधिकारिक संन्यास की घोषणा कर दी। भारत के लिए 123 टेस्ट खेल चुके कोहली को लंबे समय से सचिन तेंदुलकर का उत्तराधिकारी माना जाता रहा है। खासकर, नंबर-4 बल्लेबाज के रूप में उन्होंने उम्मीदों से कहीं ज्यादा प्रदर्शन किया।
हालांकि, कोहली ने खुद भी माना है कि सचिन जैसे खिलाड़ी की बराबरी कोई नहीं कर सकता। लेकिन क्या आंकड़े भी यही कहते हैं? चलिए, जानते हैं कि 123 टेस्ट मैचों के बाद दोनों खिलाड़ियों के आंकड़े कैसे रहे।
टेस्ट रन: तेंदुलकर को पछाड़ नहीं पाए कोहली
विराट कोहली:
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मैच: 123
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पारी: 210
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रन: 9,230
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औसत: 46.85
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सर्वोच्च स्कोर: 254*
सचिन तेंदुलकर (123 टेस्ट के बाद):
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मैच: 123
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पारी: 198
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रन: 10,134
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औसत: 57.25
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सर्वोच्च स्कोर: 248*
सचिन तेंदुलकर ने विराट कोहली से करीब 900 रन ज्यादा बनाए और उनका बल्लेबाजी औसत भी करीब 10 रन बेहतर था। यह अंतर यह दर्शाता है कि कोहली का टेस्ट करियर भले ही शानदार रहा हो, लेकिन सचिन टेस्ट क्रिकेट में उनसे एक स्तर ऊपर थे।
शतक और अर्धशतक: कोहली का कन्वर्जन रेट बेहतर
विराट कोहली:
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शतक (100s): 30
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अर्धशतक (50s): 31
सचिन तेंदुलकर (123 टेस्ट के बाद):
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शतक (100s): 34
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अर्धशतक (50s): 41
ध्यान देने योग्य:
विराट कोहली की शुरुआत में फिफ्टी को शतक में बदलने की कला काबिले तारीफ थी। लेकिन 2019 के बाद से उनके प्रदर्शन में गिरावट आई, और उन्होंने पिछले पांच वर्षों में केवल 3 शतक लगाए। वहीं, सचिन ने इस समय में भी स्थिरता बनाए रखी।
नॉट आउट पारियां: सचिन का संयम दिखता है
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कोहली: 210 पारियों में 13 बार नाबाद
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तेंदुलकर: 198 पारियों में 21 बार नाबाद
यह आंकड़े दर्शाते हैं कि सचिन पारी को अंत तक ले जाने में माहिर थे, जबकि कोहली का खेलने का तरीका ज्यादा आक्रामक रहा, जो कभी-कभी जोखिम भरा साबित हुआ।
फिफ्टी को शतक में बदलने की दर
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कोहली: 61 बार 50+ स्कोर में से 30 बार शतक → ~49.1% कन्वर्जन रेट
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तेंदुलकर: 75 बार 50+ स्कोर में से 34 बार शतक → ~45.3% कन्वर्जन रेट
यहां कोहली थोड़े बेहतर दिखते हैं। उनका कन्वर्जन रेट सचिन से थोड़ा ऊपर है, जो उन्हें फॉर्म में रहने पर एक खतरनाक बल्लेबाज बनाता था।
कप्तानी बनाम बल्लेबाजी: कोहली पर कप्तानी का असर?
कोहली ने 68 टेस्ट में कप्तानी की, जबकि सचिन ने केवल सीमित समय के लिए टीम की कमान संभाली।
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कप्तान के रूप में कोहली: 68 मैच, 20 शतक
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बिना कप्तानी के: 55 मैच, 10 शतक
कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि कप्तानी की जिम्मेदारी ने कोहली के बल्लेबाजी फॉर्म पर असर डाला, खासकर जब वे ऑफ-फॉर्म दौर से गुजर रहे थे।
तुलनात्मक सारणी: कोहली बनाम तेंदुलकर (123 टेस्ट के बाद)
| मापदंड | विराट कोहली | सचिन तेंदुलकर |
|---|---|---|
| मैच | 123 | 123 |
| रन | 9,230 | 10,134 |
| औसत | 46.85 | 57.25 |
| शतक | 30 | 34 |
| अर्धशतक | 31 | 41 |
| सर्वोच्च स्कोर | 254* | 248* |
| नॉट आउट पारियां | 13 | 21 |
विशेषज्ञों की राय: दोनों दिग्गज, अपनी-अपनी शैली में
हर्षा भोगले कहते हैं:
“तेंदुलकर स्थिरता के प्रतीक थे, जबकि कोहली ने भारतीय क्रिकेट को आक्रामकता और आत्मविश्वास सिखाया।”
सुनील गावस्कर का कहना है:
“सचिन तकनीकी परफेक्शन थे, वहीं कोहली जुनून और ऊर्जा का मिश्रण। दोनों का अपना अलग प्रभाव है।”
कोहली का खुद सचिन के बारे में क्या कहना है?
विराट कोहली ने कई बार कहा है:
“मेरे लिए क्रिकेट का मतलब हमेशा सचिन तेंदुलकर ही रहा है। मैंने उन्हें देखकर बल्ला उठाया था। उनके जैसा कोई नहीं हो सकता।”
विराट कोहली टेस्ट क्रिकेट में सचिन तेंदुलकर से आंकड़ों के लिहाज से पीछे जरूर हैं, लेकिन उनकी लीडरशिप, फिटनेस कल्चर और आक्रामक सोच ने भारतीय टीम को एक नई पहचान दी है।
जहां सचिन ने 90 के दशक में भारत को क्रिकेट से जोड़ा, वहीं कोहली ने उसे दुनिया में डर पैदा करने वाली टेस्ट टीम बनाया।
दोनों ही खिलाड़ी अपने युग के चैंपियन हैं — एक ने उम्मीद दी, तो दूसरे ने विश्वास।
