नवरात्रि के इस पावन अवसर पर हर दिन देवी दुर्गा के विभिन्न रूपों की पूजा की जाती है, और पांचवें दिन की पूजा मां स्कंदमाता को समर्पित होती है। इस दिन मां स्कंदमाता की विधिपूर्वक पूजा-अर्चना की जाती है, जो विशेष रूप से उनके भक्तों के लिए लाभकारी मानी जाती है। मां स्कंदमाता को भगवान स्कंद (कार्तिकेय) की मां होने के कारण उनकी पूजा से विशेष आशीर्वाद प्राप्त होते हैं। पूजा के इस दिन के साथ जुड़ी मान्यताएं बताती हैं कि इस दिन मां स्कंदमाता की उपासना से न केवल भक्तों की इच्छाएं पूरी होती हैं, बल्कि यह नकारात्मक शक्तियों को दूर करने और कार्यों में सफलता पाने का भी एक उत्तम मार्ग है।
मां स्कंदमाता का स्वरूप
मां स्कंदमाता का रूप अत्यंत आकर्षक और दिव्य होता है। वह एक शेर पर विराजमान हैं और उनके चार हाथ हैं। एक हाथ में भगवान स्कंद (कार्तिकेय) बैठे हैं, जो उनकी गोद में बालरूप में हैं। दूसरी ओर, उनके दाहिनी हाथ में भगवान स्कंद हैं, जबकि बाईं हाथ में वरमुद्रा (आशीर्वाद की मुद्रा) में हैं। उनके दोनों हाथों में कमल के फूल भी होते हैं, जो उनकी कोमलता और पवित्रता को दर्शाते हैं। मां स्कंदमाता का यह रूप शक्ति, करूणा और ममता का अद्भुत संयोजन है।
मां स्कंदमाता की पूजा विधि
मां स्कंदमाता की पूजा करने से पहले भक्तों को सूर्योदय से पूर्व उठकर नहाना चाहिए और स्वच्छ वस्त्र पहनने चाहिए। फिर, मां की प्रतिमा को गंगाजल से स्नान कराएं। इसके बाद, मां को कुमकुम, रोली, पुष्प, फल, मिठाई, पान का पत्ता, लौंग और इलायची अर्पित करें। मां के सामने दीपक और धूप जलाएं और अंत में उनकी आरती का आयोजन करें। इस प्रकार विधिपूर्वक पूजा करने से मां स्कंदमाता का आशीर्वाद प्राप्त होता है और व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं।
मां स्कंदमाता का प्रिय भोग
नवरात्रि के पांचवे दिन मां स्कंदमाता को विशेष रूप से केले का भोग अर्पित किया जाता है। इस दिन केले की खीर, केले का हलवा, या केले से बनी मिठाई अर्पित करने से मां स्कंदमाता का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इसके अलावा, फल, मिठाई, मिश्री और खीर भी मां को भोग स्वरूप अर्पित की जा सकती है। ये भोग विशेष रूप से उनके आशीर्वाद को प्राप्त करने के लिए माना जाता है।
मां स्कंदमाता का प्रिय रंग
नवरात्रि के पांचवे दिन का शुभ रंग पीला और सफेद होता है। इस दिन मां की पूजा करते समय श्वेत या पीले रंग के वस्त्र पहनना अत्यंत शुभ माना जाता है। इन रंगों का संबंध मां स्कंदमाता की पवित्रता और आभा से जुड़ा हुआ है, और इन रंगों के माध्यम से पूजा का प्रभाव बढ़ता है।
मां स्कंदमाता को प्रिय पुष्प
मां स्कंदमाता को कमल का फूल विशेष रूप से प्रिय है। यह फूल शुद्धता, सौंदर्य और आध्यात्मिकता का प्रतीक है। मां के आसन पर कमल का फूल होने के कारण इसे उनकी पूजा में अर्पित किया जाता है। इसके अलावा, मां स्कंदमाता को गुलाब और गुड़हल के लाल फूल भी अर्पित किए जा सकते हैं। ये फूल उनकी भव्यता और दिव्यता को और बढ़ाते हैं।
मां स्कंदमाता के मंत्र
मां स्कंदमाता के मंत्रों का जप करने से भक्तों को उनके आशीर्वाद और संरक्षण की प्राप्ति होती है। यहां कुछ महत्वपूर्ण मंत्र दिए गए हैं:
सरल बीज मंत्र
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं स्कन्दमातायै नमः॥
ध्यान मंत्र
सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया।
शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी॥
स्तुति मंत्र
या देवी सर्वभूतेषु माँ स्कन्दमाता रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
मां स्कंदमाता की आरती
मां स्कंदमाता की आरती विशेष रूप से भक्तों द्वारा की जाती है, जिससे मां का आशीर्वाद प्राप्त होता है और जीवन में सफलता मिलती है। यहां मां स्कंदमाता की एक प्रसिद्ध आरती दी जा रही है:
आरती
जय तेरी हो स्कंद माता,
पांचवां नाम तुम्हारा आता।
सब के मन की आस पुराती,
तेरी महिमा सब जग गाता।
कही पहाड़ों पर है डेरा,
कई शहरों में तेरा बसेरा।
हर मंदिर में तेरे नजारे,
गुण गाए तेरे भक्त प्यारे।
भक्ति अपनी हमें दिला दो,
शक्ति मेरी बिगड़ी बना दो।
इंद्र आदि देवता मिल सारे,
करे पुकार तुम्हारे द्वारे।
दुष्ट दैत्य जब चढ़ कर आए,
तू ही खंडा हाथ उठाए।
दासों को सदा बचाने आई,
भक्त की आस पुजाने आई।
स्कंदमाता जी की आरती जो कोई गावे,
कहत शिवानंद स्वामी, मनवांछित फल पावे।
जय तेरी हो स्कंद माता,
पांचवां नाम तुम्हारा आता।
पूजा का महत्व
मां स्कंदमाता का पूजन न केवल भक्ति और आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह जीवन में सफलता, सुख-शांति और समृद्धि के लिए भी आवश्यक माना जाता है। उनकी पूजा से न केवल शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार होता है, बल्कि नकारात्मक ऊर्जा से छुटकारा भी मिलता है। इसके साथ ही, यह पूजा व्यक्ति को आत्मिक शांति और मुक्ति की दिशा में भी मार्गदर्शन करती है।
इस दिन मां स्कंदमाता की आराधना से कार्यों में सफलता प्राप्त होती है और जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं। यह दिन विशेष रूप से उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण होता है जो अपने जीवन में किसी प्रकार की बाधाओं का सामना कर रहे हैं और मुसीबतों से उबरने की कोशिश कर रहे हैं।
नवरात्रि के पांचवे दिन मां स्कंदमाता की पूजा एक विशेष अवसर है, जो न केवल आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह जीवन के विभिन्न पहलुओं में समृद्धि, सफलता और शांति लाने का एक तरीका भी है। उनके मंत्रों का जप, भोग अर्पित करना, और उनके दर्शन से भक्तों को जीवन के हर क्षेत्र में आशीर्वाद मिलता है। मां स्कंदमाता की पूजा से न केवल आंतरिक शांति मिलती है, बल्कि यह उन्हें दिव्य शक्ति का आशीर्वाद भी देती है, जो जीवन के विभिन्न संघर्षों से उबरने में मदद करती है।
