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जब जगमगा उठा जर्मनी का आसमान

19 जनवरी 2026 — एक रात जो खगोल विज्ञान और सोशल मीडिया दोनों पर याद रखी जाएगी

KKN ब्यूरो। सर्दियों की ठंडी रात में, यूरोप और विशेषकर जर्मनी के अधिकांश हिस्सों के ऊपर अचानक एक अद्भुत प्रकाश शो चमक उठा। हैम्बर्ग से लेकर म्यूनिख तक के लोगों ने अपने कैमरों में कैद किया वो रंग-बिरंगा आकाश — लाल, हरा, गुलाबी और पीला — जैसे किसी दैवीय इंद्रधनुष ने रात के काले पर्दे को बेचैन कर दिया हो।

यह कोई फ़ैंटेसी नहीं थी — बल्कि अब तक की सबसे बड़े भूचुंबकीय सौर तूफानों में से एक ने पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र के साथ इतनी गहरी टक्कर की कि उत्तरी रोशनी (Aurora Borealis) जैसे ध्रुवीय दिव्य नृत्य को सामान्य मध्य-देशीरेय अक्षांशों तक पहुँचा दिया।

स्थानीय लोगों ने कहा:

“हमने कभी भी इतनी चमकदार रोशनी नहीं देखी थी — रात में ऐसा लगा मानो कोई प्राचीन शक्ति आकाश में रंगों के झरने चला रही हो।”
तुरंत हजारों तस्वीरें और वीडियो वायरल — #NorthernLights, #AuroraGermany, #SkyPhenomenon ट्रेंड करने लगे।

वैज्ञानिकों के अनुसार:

यह घटना साल 2026 के सौर गतिविधि चक्र की ऊँची अवस्था से जुड़ी थी — तथा इसे लगभग हर कुछ दशक में ही देखा जाता है।

यह UFO नहीं, यह “Aurora Borealis” था

उत्तरी रोशनी का कारण सूर्य से आने वाले चार्ज्ड कणों का पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र के साथ टकराना होता है। ये कण वातावरण के ऊपरी भागों में प्रोटॉन और इलेक्ट्रॉन से टकराकर खूबसूरत प्रकाश का सहारा लेते हैं। सामान्यतः ये रोशनी ध्रुवों के पास ही देखी जाती है, लेकिन अत्यधिक सौर गतिविधि के दौरान यह मध्य-देशों तक फैल सकती है — जैसा कि जनवरी 2026 में हुआ।

खगोलीय घटना

यह कोई साधारण खगोलीय घटना नहीं थी — यह वैज्ञानिक और दृश्य रूप से प्रभावशाली एक असाधारण रोशनी का प्रदर्शन था, जिसने न सिर्फ जर्मनी बल्कि सोशल मीडिया और अंतरराष्ट्रीय न्यूज चैनलों के नजरिये को भी अपनी ओर खींचा। युवाओं से लेकर खगोल विज्ञान के शौकीनों तक, हर कोई इस रात की यादें शेयर कर रहा है।

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