KKN गुरुग्राम डेस्क | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री और तेलुगू देशम पार्टी (TDP) के प्रमुख एन. चंद्रबाबू नायडू की खुले मंच से सराहना की है। आंध्र प्रदेश में एक जनसभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि चंद्रबाबू नायडू उन्हें “टेक-सेवी” कहते हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि उन्होंने हैदराबाद में नायडू के काम को देखकर बहुत कुछ सीखा।
“जब मैं गुजरात का मुख्यमंत्री बना, तब मैंने हैदराबाद में चंद्रबाबू नायडू जी के काम को बहुत ध्यान से देखा और उनसे बहुत कुछ सीखा। आज मुझे वो सब लागू करने का अवसर मिला है।”
राजनीतिक संदेश: केवल प्रशंसा नहीं, रणनीतिक सहयोग भी
पीएम मोदी की यह टिप्पणी केवल एक व्यक्तिगत प्रशंसा नहीं थी, बल्कि यह भाजपा और टीडीपी के बीच बढ़ते राजनीतिक समीकरण का भी संकेत है। आंध्र प्रदेश में आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए यह बयान बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
यह कदम कई स्तरों पर संकेत देता है:
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टीडीपी और बीजेपी के गठबंधन की मजबूती
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चंद्रबाबू नायडू की तकनीकी सोच को राष्ट्रीय मान्यता
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दक्षिण भारत में बीजेपी की स्थानीय नेताओं के साथ समन्वय की रणनीति
हैदराबाद को तकनीकी हब बनाने वाले चंद्रबाबू नायडू
चंद्रबाबू नायडू को भारत के सबसे पहले टेक-सेवी मुख्यमंत्रियों में गिना जाता है। उन्होंने 1990 के दशक के अंत में हैदराबाद को IT हब बनाने की दिशा में जो काम किया, वह आज पूरे देश में डिजिटल गवर्नेंस की नींव बन चुका है।
उनकी प्रमुख उपलब्धियां:
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हाइटेक सिटी (Cyberabad) का निर्माण
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ई-गवर्नेंस की शुरुआत
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Microsoft, Infosys, Oracle जैसी कंपनियों को हैदराबाद में लाना
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Mee Seva जैसी नागरिक सेवा योजनाएं लागू करना
डिजिटल इंडिया और गवर्नेंस में नायडू की भूमिका
प्रधानमंत्री मोदी की डिजिटल इंडिया योजना 2015 में शुरू हुई थी, लेकिन उसके मूल में जिस प्रकार की सोच है, वह नायडू के शासन में ही सामने आने लगी थी। नरेंद्र मोदी ने इस सोच को गुजरात में e-Gram Vishwagram परियोजना और बाद में केंद्र में जनधन, आधार और मोबाइल (JAM) ट्रिनिटी के रूप में लागू किया।
नायडू की पहल ने मोदी को:
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डिजिटल गवर्नेंस के प्रारूप को समझने में मदद की
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टेक्नोलॉजी के उपयोग से पारदर्शिता लाने की प्रेरणा दी
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शहरी योजना में टेक्नोलॉजी की भूमिका का उदाहरण प्रस्तुत किया
भाजपा-टीडीपी गठबंधन: 2025 के चुनावी समीकरण
इस वक्त जब बीजेपी और टीडीपी के गठबंधन को फिर से मजबूत किया जा रहा है, तब मोदी की यह टिप्पणी राजनीतिक सामंजस्य का प्रतीक है। टीडीपी, जो 2018 में एनडीए से अलग हो गई थी, अब दोबारा एनडीए का हिस्सा बनने की प्रक्रिया में है।
इस सराहना से BJP को मिलेगा:
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आंध्र में स्थानीय समर्थन
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नायडू के शहरी और तकनीकी विकास मॉडल से जुड़ने का अवसर
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विपक्षी दल YSR कांग्रेस के खिलाफ मजबूत मोर्चा
चंद्रबाबू नायडू के काम की राष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृति
मोदी द्वारा खुले मंच से तारीफ किए जाने के बाद, टीडीपी कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने इसे चंद्रबाबू नायडू की कार्यशैली की जीत बताया। सोशल मीडिया पर ट्रेंड करने लगे:
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#ModiOnNaidu
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#TechSavvyLeader
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#DigitalIndiaInspiration
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इससे नायडू को फिर से एक राष्ट्रीय नेता के तौर पर स्थापित करने में मदद मिलेगी।
पीएम मोदी ने क्या सीखा?
नरेंद्र मोदी ने बताया कि उन्होंने नायडू से क्या-क्या सीखा:
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स्मार्ट शहरी योजना: हैदराबाद से प्रेरित होकर गुजरात में GIFT City बनाई गई
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सार्वजनिक सेवा प्रबंधन: Mee Seva जैसी योजनाओं की तर्ज पर ई-ग्राम परियोजना
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तकनीक आधारित प्रशासन: वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से लेकर आईटी नीति तक
2025 का संदर्भ: तकनीकी प्रशासन बनेगा चुनावी मुद्दा
2025 के चुनावों में जहां बेरोजगारी, महंगाई जैसे मुद्दे होंगे, वहीं डिजिटल इंडिया और टेक्नोलॉजी के जरिए विकास भी प्रमुख चुनावी मुद्दा बनता जा रहा है। युवा वोटर, जो टेक्नोलॉजी से जुड़ा है, उसके लिए नायडू और मोदी दोनों के काम प्रेरणादायक हैं।
विशेषज्ञों की राय: रणनीतिक और प्रेरणात्मक दोनों
राजनीतिक विश्लेषक डॉ. रमन शर्मा कहते हैं:
“मोदी का यह बयान न केवल चंद्रबाबू नायडू की तारीफ है, बल्कि यह बीजेपी की रणनीतिक योजना का भी हिस्सा है। यह क्षेत्रीय नेताओं को राष्ट्रीय पहचान देने का संकेत है।”
प्रधानमंत्री मोदी द्वारा चंद्रबाबू नायडू की सराहना यह दिखाता है कि भारत की राजनीति में अब केवल दल और विचारधारा नहीं, बल्कि विकास मॉडल और टेक्नोलॉजी भी निर्णायक भूमिका निभा रहे हैं।
यह बयान दर्शाता है कि कैसे एक मुख्यमंत्री, जिसने 25 साल पहले तकनीकी प्रशासन की नींव रखी थी, आज भी देश के शीर्ष नेतृत्व के लिए प्रेरणा स्रोत है।
