Home Bihar बिहार चुनाव 2025 से पहले मुकेश सहनी का बड़ा ऐलान

बिहार चुनाव 2025 से पहले मुकेश सहनी का बड़ा ऐलान

KKN गुरुग्राम डेस्क | जैसे-जैसे बिहार विधानसभा चुनाव 2025 नज़दीक आ रहा है, राजनीतिक दलों की सक्रियता तेज होती जा रही है। इसी कड़ी में विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के प्रमुख मुकेश सहनी ने रविवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के गृह जिला नालंदा में एक विशाल जनसभा को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने न केवल सरकार बनाने का दावा किया, बल्कि यह भी स्पष्ट किया कि अगर उनकी सरकार बनी, तो निषाद समाज को आरक्षण देना तय है।

 निषाद आरक्षण संकल्प यात्रा 3.0: “सरकार बनाओ, अधिकार पाओ”

मुकेश सहनी नालंदा पहुंचे थे अपनी राज्यव्यापी यात्रा — निषाद आरक्षण संकल्प यात्रा 3.0 — के तहत। इस यात्रा का नारा है: “सरकार बनाओ, अधिकार पाओ”, जो साफ तौर पर यह संदेश देता है कि जब तक समाज राजनीतिक रूप से सशक्त नहीं होगा, तब तक हक और अधिकार नहीं मिल सकते।

सभा में उमड़े जनसमूह को संबोधित करते हुए सहनी ने कहा:

“इस बार हम सत्ता में आएंगे और निषाद समाज को उसका संवैधानिक अधिकार मिलेगा। आरक्षण अब सपना नहीं, हमारा संकल्प है।”

 “बच्चों को शिक्षित कीजिए, अधिकार के लिए संघर्ष कीजिए”

राजनीतिक भाषण के साथ-साथ सहनी ने अपने संबोधन में सामाजिक चेतना का भी संदेश दिया। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपने बच्चों को शिक्षित करें, अपने अधिकारों को समझें, और समाज में सम्मान पाने के लिए संघर्ष करें।

“अगर बदलाव चाहिए तो पढ़ाई और संघर्ष जरूरी है। अधिकार कोई देता नहीं, लेना पड़ता है।”

उन्होंने राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के प्रमुख लालू प्रसाद यादव का उदाहरण देते हुए कहा:

“लालू जी ने अपने संघर्ष से समाज को आगे बढ़ाया। आज उनका समाज राजनीतिक रूप से मजबूत है क्योंकि उन्होंने आवाज उठाई।”

 भाजपा पर सीधा हमला: “बांटने की राजनीति कर रही है बीजेपी”

मुकेश सहनी ने अपने भाषण में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा समाज को जाति और धर्म के नाम पर बांटने की कोशिश कर रही है।

“बीजेपी बांटने की राजनीति करती है। हमें सतर्क रहने की जरूरत है। अगर हम एकजुट रहेंगे तो कोई हमें हमारे अधिकार से वंचित नहीं कर सकता।”

सहनी ने यह भी कहा कि राजनीतिक एकता और सामाजिक जागरूकता ही समाज को आगे ले जा सकती है। उन्होंने जनता से अपील की कि वे वीआईपी पार्टी को मजबूत करें और संगठित होकर चुनावी मैदान में उतरें।

 बिहार चुनाव 2025: वीआईपी की रणनीति और लक्ष्य

बिहार में आने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर वीआईपी पार्टी ने अब पूर्ण राजनीतिक दावेदारी ठोंक दी है। पहले भाजपा और राजद के साथ गठबंधन कर चुके सहनी अब स्वतंत्र ताकत बनने की ओर अग्रसर हैं। उनका मुख्य वोट बैंक है निषाद, मल्लाह, केवट और अन्य पिछड़े वर्ग, जो वर्षों से सामाजिक न्याय और राजनीतिक प्रतिनिधित्व की मांग कर रहे हैं।

वीआईपी पार्टी की प्रमुख रणनीतियाँ:

  • निषाद आरक्षण को चुनावी मुद्दा बनाना

  • जातिगत एकता और संगठित अभियान

  • भाजपा विरोधी लहर को मजबूत करना

  • नीतीश कुमार के गढ़ में चुनौती देना

 नालंदा में सभा क्यों महत्वपूर्ण है?

यह सभा केवल एक चुनावी अभियान नहीं थी, बल्कि एक राजनीतिक संदेश थी। नालंदा, जो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का गृह जिला है, वहाँ सहनी की जनसभा यह दिखाने की कोशिश थी कि अब पुरानी राजनीतिक धारणाएं बदल रही हैं और नए सामाजिक नेतृत्व उभर रहे हैं।

“अगर नीतीश जी मुख्यमंत्री बन सकते हैं, तो निषाद समाज का बेटा क्यों नहीं?” — इस तरह के नारों के साथ समर्थकों ने सभा में उत्साह बढ़ाया।

 क्या VIP बन सकती है चुनावी किंगमेकर या खुद बनाएगी सरकार?

मुकेश सहनी का यह दावा कि उनकी सरकार बनेगी, एक साहसिक राजनीतिक रणनीति है। पहले सहयोगी दल की भूमिका में रहने के बाद अब वे खुद को मुख्यमंत्री पद के दावेदार के रूप में पेश कर रहे हैं।

यह बात गौर करने योग्य है कि:

  • वीआईपी पार्टी अब केवल समर्थन देने वाली पार्टी नहीं रहना चाहती।

  • वह खुद राजनीतिक नेतृत्व में भागीदारी चाहती है।

  • सहनी अपने समर्थक वर्ग में तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं।

 “सरकार बनाओ, अधिकार पाओ” क्यों हो सकता है गेम-चेंजर?

यह नारा केवल एक राजनीतिक स्लोगन नहीं, बल्कि एक सामाजिक आंदोलन की शुरुआत है। इससे यह स्पष्ट संदेश जाता है कि राजनीतिक सत्ता के बिना सामाजिक अधिकार अधूरे हैं।

यह नारा विशेषकर ओबीसी, ईबीसी और दलित वर्गों को राजनीतिक रूप से सशक्त करने की दिशा में असरदार साबित हो सकता है।

बिहार की राजनीति में जहां भाजपा और राजद-जदयू जैसे दलों की जड़ें गहरी हैं, वहीं मुकेश सहनी की वीआईपी पार्टी अब तीसरी ताकत बनने की तैयारी में है। उन्होंने यह दिखा दिया है कि सामाजिक संघर्ष को राजनीतिक आंदोलन में कैसे बदला जा सकता है।

2025 का चुनाव सिर्फ सत्ता परिवर्तन का नहीं, बल्कि प्रतिनिधित्व और अधिकार की लड़ाई बन सकता है। अब देखना होगा कि VIP का यह जनसंघर्ष कितनी सीटों तक पहुंच पाता है।

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