दुर्गा पूजा 2025 एक ओर जहां श्रद्धा और भक्ति से ओत-प्रोत है, वहीं दूसरी ओर असमय बारिश ने इस बार के उत्सव को अप्रत्याशित रूप से प्रभावित किया है। यह वर्ष दुर्गा पूजा का आयोजन जहां पारंपरिक रूप से धूमधाम से मनाया जाता है, वहीं महा नवमी के दिन के साथ बारिश ने कई क्षेत्रों में उत्सवों में विघ्न डाला है। लेकिन, इसके बावजूद, भक्तों की श्रद्धा और उत्सव का माहौल असमय बारिश के बावजूद बरकरार है।
महा नवमी का महत्व
महा नवमी, जो इस वर्ष 1 अक्टूबर 2025 को मनाई जा रही है, नवरात्रि महापर्व के नौ दिनों का अंतिम दिन है। यह दिन विशेष रूप से मां दुर्गा की महिषासुर पर विजय और अच्छाई की बुराई पर जीत के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। महा नवमी के दिन विशेष रूप से कुछ प्रमुख पूजा और अनुष्ठान होते हैं, जो धार्मिक दृष्टि से अत्यधिक महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
इन अनुष्ठानों में प्रमुख हैं:
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कन्या पूजन: महा नवमी के दिन कन्या पूजन एक महत्वपूर्ण परंपरा है, जिसमें छोटी बच्चियों को माता दुर्गा का स्वरूप मानते हुए उनका पूजन किया जाता है। उन्हें चावल, फल, मिठाई और अन्य उपहार देकर आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है।
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आयुध पूजन: इस दिन आयुध पूजन का महत्व भी बहुत अधिक है। यह पूजा औजारों, वाहनों, पुस्तकों और अन्य उपकरणों की पूजा करके उनके प्रति सम्मान और आशीर्वाद प्राप्त करने की परंपरा है। इसे कार्य के प्रति सम्मान और सफलता की प्राप्ति के रूप में देखा जाता है।
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सरस्वती पूजन: यह पूजा विशेष रूप से विद्या और ज्ञान की देवी मां सरस्वती की पूजा होती है। इस दिन छात्र, शिक्षक और कलाकार अपने पुस्तकों और कला सामग्रियों का पूजन करते हैं, ताकि ज्ञान में वृद्धि हो और सफलता मिले।
यह दिन विशेष रूप से उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण होता है जो अपने जीवन में किसी न किसी रूप में ज्ञान, कार्य या कला में सफलता प्राप्त करना चाहते हैं।
असमय बारिश के कारण उत्सवों में विघ्न
इस वर्ष दुर्गा पूजा के दौरान असमय बारिश ने उत्सवों में कुछ कठिनाइयाँ उत्पन्न की हैं। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने पहले ही भविष्यवाणी की थी कि पूजा के दौरान हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है, लेकिन महा नवमी के दिन जब बारिश शुरू हुई, तो कई स्थानों पर इसने उत्सवों को अप्रत्याशित रूप से प्रभावित किया।
कोलकाता और इसके आसपास के क्षेत्रों में बारिश ने कई पंडालों में जलभराव कर दिया है, जिससे शाम की पूजा और अनुष्ठान प्रभावित हुए हैं। विशेष रूप से देवी दुर्गा की मूर्तियों के विसर्जन और अर्चना की प्रक्रिया में रुकावट आई है। हालांकि, भक्तों ने बारिश के बावजूद अपने आस्था के साथ पूजा में हिस्सा लिया। कुछ आयोजकों ने घटनाओं को सुरक्षित रूप से करने के लिए उन्हें अंदरूनी स्थानों पर स्थानांतरित किया है।
क्षेत्रीय उत्सवों पर असर
असमय बारिश का प्रभाव केवल कोलकाता तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में भी इसने दुर्गा पूजा के आयोजन में विघ्न डाला है। बिहार और झारखंड के कुछ स्थानों पर बारिश ने मूर्ति विसर्जन और सार्वजनिक आयोजनों में बाधाएं उत्पन्न की हैं। हालांकि, बारिश ने गर्मी से राहत दी है, फिर भी बारिश ने कई आउटडोर आयोजनों और झांकियों को प्रभावित किया है।
बिहार में विशेष रूप से मूर्ति विसर्जन के लिए निर्धारित समय और स्थान में बदलाव किए गए हैं। आयोजकों ने बारिश के कारण मूर्तियों की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त प्रयास किए हैं और भक्तों के लिए भी आरामदायक व्यवस्था सुनिश्चित की है। वहीं, झारखंड और उत्तर प्रदेश में भी कई स्थानों पर जलभराव के कारण पंडालों में आंशिक रूप से विसर्जन और पूजा समय को प्रभावित किया गया है।
हालांकि बारिश ने आयोजनों को प्रभावित किया है, फिर भी पूजा की भावना और भक्तों की श्रद्धा में कोई कमी नहीं आई है। लोग बारिश में भी एकजुट होकर पूजा में हिस्सा ले रहे हैं और अपने देवी के प्रति आस्था को व्यक्त कर रहे हैं।
दुर्गा पूजा 2025: श्रद्धा की मिसाल
इस वर्ष की दुर्गा पूजा असमय बारिश के बावजूद श्रद्धा, उत्साह और शक्ति की मिसाल बन चुकी है। यह वर्ष हमें यह दिखाता है कि चाहे मौसम जैसी भी स्थिति हो, यदि श्रद्धा मजबूत हो तो कोई भी कठिनाई पूजा के रास्ते में रुकावट नहीं डाल सकती।
यह वर्ष दुर्गा पूजा के उत्सव को नहीं बल्कि, विश्वास और समर्पण को प्रमाणित करता है। भक्तों ने इस वर्ष असमय बारिश के बावजूद दिखा दिया है कि पूजा के मार्ग में कोई भी विघ्न उनका रास्ता नहीं रोक सकता।
अंत में, इस महा नवमी पर हम सभी देवी दुर्गा से आशीर्वाद प्राप्त करें और उनकी कृपा से जीवन में खुशियां और समृद्धि की प्राप्ति करें।
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