Home Bihar BPSC TRE-4 भर्ती: शिक्षा मंत्री सुनील कुमार के बयान से बढ़ा विवाद

BPSC TRE-4 भर्ती: शिक्षा मंत्री सुनील कुमार के बयान से बढ़ा विवाद

बिहार में होने वाली BPSC TRE-4 Teacher Recruitment को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि इस चरण में 26 हजार से अधिक पदों पर नियुक्ति होगी। यह बयान आने के बाद अभ्यर्थियों में निराशा बढ़ गई है क्योंकि वे लंबे समय से 1.20 लाख वैकेंसी की मांग कर रहे थे। विधानसभा चुनाव नज़दीक आने के साथ ही भर्ती प्रक्रिया और राजनीतिक माहौल दोनों में हलचल तेज हो गई है।

अभ्यर्थियों की मांग 1.20 लाख पदों की

शिक्षक बनने की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों की मुख्य मांग है कि TRE-4 Recruitment में कम से कम 1.20 लाख पद निकाले जाएं। उन्हें उम्मीद थी कि सरकार इस बार बड़े पैमाने पर बहाली करेगी। लेकिन शिक्षा विभाग ने साफ कर दिया है कि इस चरण में केवल 26 हजार से कुछ अधिक पदों पर भर्ती होगी। इस अंतर ने अभ्यर्थियों को झटका दिया है और वे सरकार से नाराज़ दिखाई दे रहे हैं।

शिक्षा मंत्री सुनील कुमार का स्पष्टीकरण

प्रेस कॉन्फ्रेंस में Sunil Kumar Statement में कहा गया कि भर्ती की प्रक्रिया पूरी तरह से विषयवार और छात्रों की संख्या के आधार पर तय होती है। मंत्री ने कहा कि वैकेंसी बिना आधार के घोषित नहीं की जा सकती। उन्होंने बताया कि इस बार लगभग 26 हजार से अधिक पदों को शामिल किया जाएगा और ये अगले चार से पांच दिनों में BPSC को भेज दिए जाएंगे। अगर इसके बाद भी सीटें बचती हैं तो उन्हें अगले चरण यानी TRE-5 में जोड़ा जाएगा।

BPSC को जल्द भेजी जाएगी वैकेंसी

शिक्षा मंत्री ने यह भी कहा कि प्रक्रिया में अनावश्यक देरी नहीं हो रही है। वर्तमान में दो से तीन जिलों में रोस्टर क्लियरेंस की प्रक्रिया चल रही है। जैसे ही यह काम पूरा होगा, रिक्तियां BPSC को भेज दी जाएंगी। उन्होंने यह भी कहा कि 26 हजार पद किसी भी तरह से कम नहीं हैं। लेकिन यह तर्क अभ्यर्थियों को संतुष्ट नहीं कर पाया है और वे लगातार अपनी पुरानी मांग पर डटे हुए हैं।

पटना में प्रदर्शन और विरोध

19 सितंबर को अभ्यर्थियों ने अपनी मांगों को लेकर पटना कॉलेज से मार्च निकाला। उनका इरादा मुख्यमंत्री आवास तक पहुंचने का था। लेकिन पुलिस ने उन्हें जेपी गोलंबर के पास रोक दिया। TRE-4 Candidates का कहना था कि सरकार ने 1.20 लाख पदों का वादा किया था और उसे पूरा करना चाहिए।

बारिश में तीन घंटे तक धरना

भारी बारिश के बावजूद अभ्यर्थी करीब तीन घंटे तक वहीं डटे रहे और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। उनकी जिद ने साफ कर दिया कि वे कम पदों पर समझौता करने को तैयार नहीं हैं। बाद में छात्र नेता दिलीप और अन्य प्रतिनिधि मंडल ने शिक्षा विभाग के मुख्य सचिव से मुलाकात की। बातचीत के बाद प्रदर्शन समाप्त हुआ, लेकिन असंतोष अब भी बना हुआ है।

रोजगार की कमी से नाराज़गी

बिहार के युवाओं का कहना है कि यहां रोजगार का सबसे बड़ा विकल्प सिर्फ सरकारी नौकरी है। प्राइवेट सेक्टर में मौके बहुत कम हैं और स्थायित्व भी नहीं है। ऐसे में Bihar Government Jobs ही युवाओं का सहारा हैं। अभ्यर्थियों का आरोप है कि सरकार बार-बार भर्ती में देरी कर रही है, जिससे लाखों योग्य उम्मीदवार बेरोजगार बैठे हैं।

चुनावी माहौल में भर्ती पर राजनीति

BPSC TRE-4 Recruitment का यह विवाद अब राजनीति का भी हिस्सा बन चुका है। विधानसभा चुनाव करीब हैं और विपक्ष सरकार को बेरोजगारी के मुद्दे पर घेरने की तैयारी कर रहा है। वहीं सत्ताधारी दल का तर्क है कि भर्ती की प्रक्रिया ज़रूरत के आधार पर होती है, किसी दबाव में नहीं। शिक्षा मंत्री का यह बयान राजनीतिक आलोचना को कम करने की कोशिश दिखता है, लेकिन बेरोजगार युवाओं की नाराज़गी चुनाव में मुद्दा बन सकती है।

पारदर्शिता की मांग

अभ्यर्थी चाहते हैं कि भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी हो और पदों की जानकारी विषयवार और जिला-वार साझा की जाए। इससे उन्हें समझने में आसानी होगी कि किस आधार पर 26 हजार पद तय किए गए हैं। सरकार का कहना है कि छात्र संख्या और विषय के हिसाब से पद तय होते हैं। लेकिन विश्वास की कमी के कारण अभ्यर्थी इसे अधूरा मान रहे हैं।

TRE-5 को लेकर उम्मीदें और आशंका

शिक्षा मंत्री ने कहा कि अगर सीटें बची तो उन्हें TRE-5 Recruitment में जोड़ा जाएगा। इस बयान से अभ्यर्थियों को थोड़ी उम्मीद तो मिली है लेकिन नई आशंका भी पैदा हो गई है। उन्हें डर है कि बार-बार अगले चरण में धकेलने से भर्ती और लंबी खिंच जाएगी। अभ्यर्थियों का मानना है कि सरकार को अधिकतम पद इसी बार निकालने चाहिए।

सरकार पर बढ़ता दबाव

सरकार अब दोहरी चुनौती का सामना कर रही है। एक ओर अभ्यर्थी 1.20 लाख पदों की मांग कर रहे हैं और दूसरी ओर शिक्षा विभाग कह रहा है कि उपलब्धता सिर्फ 26 हजार पदों की है। विपक्ष इस मुद्दे को राजनीतिक हथियार बना रहा है। सरकार के लिए व्यावहारिक ज़रूरत और राजनीतिक दबाव के बीच संतुलन बनाना मुश्किल हो रहा है।

अभ्यर्थियों के भविष्य पर असर

TRE-4 भर्ती को लेकर असमंजस ने अभ्यर्थियों के भविष्य पर गहरा असर डाला है। कई उम्मीदवार सालों से तैयारी कर रहे हैं और उन्होंने अपनी पढ़ाई और प्रशिक्षण पर पैसा भी खर्च किया है। अब उन्हें लग रहा है कि उनकी मेहनत बेकार जा रही है। अगर वैकेंसी कम ही रहती हैं तो कई योग्य उम्मीदवारों का करियर प्रभावित होगा।

सोशल मीडिया पर गुस्सा

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी अभ्यर्थियों का गुस्सा साफ दिख रहा है। Twitter और Facebook पर TRE-4 Recruitment और BPSC Vacancy से जुड़े हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं। छात्र और युवा इन प्लेटफॉर्म्स के ज़रिए विरोध दर्ज करा रहे हैं और सरकार से जवाब मांग रहे हैं। इस डिजिटल आंदोलन ने अभ्यर्थियों की आवाज़ को और बुलंद कर दिया है।

अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में सरकार और BPSC क्या कदम उठाते हैं। उम्मीदवारों को विस्तृत नोटिफिकेशन का इंतज़ार है, जिससे असल वैकेंसी संख्या और परीक्षा शेड्यूल साफ होगा। राजनीतिक दल भी इस पूरे मामले पर पैनी नज़र रखे हुए हैं।

BPSC TRE-4 Teacher Recruitment बिहार के युवाओं के लिए रोजगार की सबसे बड़ी उम्मीद है। लेकिन शिक्षा मंत्री सुनील कुमार का 26 हजार पदों का बयान अभ्यर्थियों को रास नहीं आया। उम्मीदवार अब भी 1.20 लाख पदों की मांग पर अड़े हुए हैं। इस विवाद ने बेरोजगारी के मुद्दे को फिर से सुर्खियों में ला दिया है। चुनावी मौसम में यह मामला सरकार के लिए चुनौती और विपक्ष के लिए अवसर दोनों बन चुका है। आने वाले हफ्तों में यह तय होगा कि सरकार भरोसा बहाल कर पाती है या असंतोष और गहराता है।

Read this article in

KKN लाइव WhatsApp पर भी उपलब्ध है, खबरों की खबर के लिए यहां क्लिक करके आप हमारे चैनल को सब्सक्राइब कर सकते हैं।

KKN Public Correspondent Initiative

NO COMMENTS

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Exit mobile version