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अक्षय तृतीया 2025: कब और क्यों मनाया जाता है अक्षय तृतीया? जानिए इसकी पौराणिक कथा

KKN गुरुग्राम डेस्क | अक्षय तृतीया 2025 भारत में एक विशेष धार्मिक दिन के रूप में मनाया जाएगा, जो वैशाख माह की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को पड़ता है। इसे हिंदू धर्म में अत्यंत शुभ माना जाता है और यह विशेष रूप से व्यापार, धन, और समृद्धि के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। इस दिन को लेकर विभिन्न पौराणिक कथाएँ और मान्यताएँ प्रचलित हैं, जो इसे एक अत्यधिक महत्वपूर्ण दिन बनाती हैं। अक्षय तृतीया का महत्व न केवल धार्मिक दृष्टि से है, बल्कि यह एक ऐसा दिन माना जाता है जब किसी भी अच्छे कार्य की शुरुआत शुभ और फलदायी होती है।

अक्षय तृतीया का धार्मिक महत्व

अक्षय तृतीया का दिन विशेष रूप से भगवान विष्णु और उनके विभिन्न अवतारों से जुड़ा हुआ है। इसे लेकर कई पौराणिक कथाएँ प्रचलित हैं। इस दिन के महत्व को समझने के लिए हमें कुछ प्रमुख धार्मिक घटनाओं का उल्लेख करना चाहिए:

भगवान विष्णु के अवतार

अक्षय तृतीया के दिन भगवान विष्णु ने कई अवतार लिए हैं, जिनमें परशुराम और हयग्रीव अवतार प्रमुख हैं। इन अवतारों के माध्यम से भगवान विष्णु ने मानवता को धर्म, सत्य और न्याय की शिक्षा दी।

  1. परशुराम अवतार: यह अवतार भगवान विष्णु ने ब्राह्मण परिवार में जन्म लेकर लिया था, लेकिन कर्म के अनुसार वह क्षत्रिय बन गए। परशुराम ने अत्याचारी और भ्रष्ट राजाओं का नाश किया और दुनिया में धर्म की पुनःस्थापना की। इस दिन भगवान परशुराम ने राजा साहस के साथ युद्ध किया और उन्हें पराजित किया।

  2. हयग्रीव अवतार: इस दिन भगवान विष्णु ने हयग्रीव रूप में अवतार लिया और वेदों की रक्षा की। हयग्रीव ने राक्षसों से वेदों को मुक्त कर भगवान विष्णु के रूप में वेदों की पुनःस्थापना की।

श्री बद्रीनाथ मंदिर के कपाट खोलना

अक्षय तृतीया का दिन बद्रीनाथ मंदिर के कपाट खोलने के लिए भी प्रसिद्ध है। इस दिन भगवान विष्णु के श्रीविग्रह को अलकनंदा नदी में स्थित कुंड से बाहर निकालकर श्रीबद्रीनाथ के मंदिर में प्रतिष्ठित किया जाता है। यही कारण है कि इस दिन को बद्रीनाथ धाम के दर्शन और पूजा के लिए विशेष माना जाता है। यह दिन श्रद्धालुओं के लिए एक अहम अवसर होता है जब वे भगवान विष्णु के दर्शन कर पुण्य प्राप्त करते हैं।

महाभारत और अक्षय तृतीया

महाभारत का समापन भी अक्षय तृतीया के दिन हुआ था। पांडवों और कौरवों के बीच जो महायुद्ध हुआ था, वह इस दिन समाप्त हुआ। इसे लेकर यह मान्यता है कि इस दिन भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश दिया और धर्म की विजय सुनिश्चित की। यह दिन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसे द्वापर युग का समापन और कलियुग की शुरुआत माना जाता है।

अक्षय तृतीया का महत्व और उसके साथ जुड़ी परंपराएँ

अक्षय तृतीया का दिन विशेष रूप से व्यापारियों, किसानों और गृहस्थों के लिए बेहद शुभ माना जाता है। यह दिन किसी भी नए कार्य की शुरुआत के लिए सर्वोत्तम होता है, जैसे नए व्यापार की शुरुआत, घर की खरीदारी, विवाह या अन्य शुभ कार्यों की शुरुआत।

सोने की खरीदारी और अक्षय तृतीया

अक्षय तृतीया का दिन विशेष रूप से सोने की खरीदारी के लिए आदर्श माना जाता है। इस दिन सोना, चांदी और अन्य बहुमूल्य धातुओं का व्यापार बहुत बढ़ जाता है। यह विश्वास किया जाता है कि इस दिन सोने की खरीदारी से आर्थिक समृद्धि और स्थायित्व प्राप्त होता है। यही कारण है कि हर साल इस दिन भारत में सोने और आभूषणों की खरीदारी बहुत अधिक होती है।

दीन-हीन को दान देना

अक्षय तृतीया के दिन दान का महत्व भी अत्यधिक है। इस दिन विशेष रूप से गरीबों और जरूरतमंदों को दान देने की परंपरा है। माना जाता है कि इस दिन दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है और यह पुण्य जीवनभर स्थायी रहता है। यही कारण है कि इस दिन मंदिरों में विशेष रूप से तर्पण, पूजा और दान की परंपराएँ निभाई जाती हैं।

अक्षय तृतीया पर शुभ कार्य और पूजा

अक्षय तृतीया का दिन किसी भी नए कार्य की शुरुआत के लिए सबसे शुभ माना जाता है। इसके अलावा, इस दिन विशेष पूजा और व्रत किए जाते हैं। विशेष रूप से वैष्णव पूजा, हयग्रीव पूजा, और भगवान विष्णु की पूजा होती है। इसके अलावा, श्रद्धालु इस दिन घरों में दीप जलाकर शुभता की कामना करते हैं।

इस दिन विशेष रूप से जप और ध्यान का महत्व है। लोग घरों में भगवान विष्णु और उनके अवतारों का पूजन करते हैं और उनसे सुख, समृद्धि और शांति की प्रार्थना करते हैं।

अक्षय तृतीया के दिन किए गए कार्यों का फल

अक्षय तृतीया के दिन किए गए कार्यों का फल स्थायी और शुभ माना जाता है। इस दिन किए गए किसी भी शुभ कार्य, जैसे विवाह, नए घर की खरीदारी, व्यापार का आरंभ, या किसी धार्मिक स्थल की यात्रा, का फल जीवनभर मिलता है। यही कारण है कि लोग इस दिन को बहुत विशेष मानते हैं और इसे बड़े धूमधाम से मनाते हैं।

अक्षय तृतीया के दिन व्रत और उपाय

जो लोग धार्मिक रूप से जागरूक होते हैं, वे इस दिन उपवासी रहते हैं और भगवान विष्णु की पूजा करते हैं। इस दिन विशेष रूप से हयग्रीव पूजा, विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ, और कुबेर पूजन करने से धन की प्राप्ति होती है। कुछ लोग इस दिन गोपनीय मंत्र का जप करते हैं ताकि जीवन में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहे।

अक्षय तृतीया 2025 एक धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण दिन है। इसे लेकर बहुत सारी मान्यताएँ और परंपराएँ जुड़ी हुई हैं। चाहे वह सोने की खरीदारी हो, नए कार्यों की शुरुआत हो, या दान-पुण्य का कार्य हो, इस दिन का महत्व असीम है। यह दिन भगवान विष्णु के विभिन्न अवतारों के साथ जुड़ा हुआ है, जो मानवता के लिए धर्म, सत्य और न्याय का प्रतीक हैं। इस दिन को श्रद्धा और विश्वास के साथ मनाकर हम जीवन में सुख, समृद्धि और शांति की प्राप्ति कर सकते हैं।

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