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बिहार की राजनीति में खीर, खिचड़ी और ख्याली पुलाव पकाने का दौर शुरू

बिहार की राजनीति में लोकसभा चुनाव की धमक अब दिखने लगा है। नेताओं के खीर, खिचड़ी और ख्याली पुलाव पकाने के मायने तलाशे जाने लगे है। संकेतो की आर लेकर बयानबाजी का सिलसिला चल पड़ा है। राजनीति के जानकार इन्हीं संकेतो के सहारे बनते बिगड़ते समीकरणों का खाका तैयार करने में जुट गए है। वैसे तो भारत की राजनीति में चुनाव करीब आते ही नेताओं का दर्द छलकने की परंपरा नई नहीं है। बावजूद इसके बयान के मायने तो तलाशने ही होंगे।

रालोसपा ने कैसे पकाई खीर

बहरहाल, रालोसपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और वर्तमान में एनडीए का हिस्सा रहे केन्द्रीय मंत्री उपेन्द्र कुशवाहा का सांकेतिक बयान ने बिहार की राजनीति सुगबुगाहट ला दिया है। श्री कुशवाहा ने पिछले दिनो पटना में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा था कि यदुवंशियों का दूध और कुशवंशियों का चावल मिल जाये तो खीर’ बन सकती है। लेकिन लजीज खीर के लिए छोटी जाति और दबे-कुचले समाज का पंचमेवा भी चाहिए। कहा कि यही सामाजिक न्याय की परिभाषा है। राजनीतिक दायरे में श्री कुशवाहा का यह बयान राजद से उनके करीब होने के संबंधों के संकेत के रूप में भी देखा जाने लगा है।

महागठबंधन में पकने लगी ख्याली पुलाव

बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव ने इस पर ट्यूट करके जवाब देने में देरी नहीं की। ट्विटर पर श्री यादव ने केंद्रीय मंत्री उपेन्द्र कुशवाहा की सियासी खीर के आग्रह को स्वीकार करते हुए श्री यादव ने आने वाले दिनो में महागंठबंधन के मजबूत होने की उम्मीद जताते हुए इसे स्वस्थ समता मूलक समाज के निर्माण में ऊर्जा देते वाला बता दिया। बहरहाल, यहां उम्मीद की राजनीति, कोई बड़ा गुल खिलायेगा या महज नेताओं की ख्याली पुलाव बन कर रह जायेगा। फिलहाल, इस पर कुछ भी कहना जल्दीबाजी होगी।

भाजपा ने महागठबंधन को बताया खिचड़ी

बिहार में राजनीति की बदलते घटनाक्रम पर भाजपा चुप कैसी रहती। नतीजा, अबकी मोर्चा सम्भाला खुद भाजपा प्रदेश अध्यक्ष नित्यानंद राय ने। श्री राय ने रालोसपा अध्यक्ष उपेन्द्र कुशवाहा के बयान पर कहा कि ना दूध किसी का है ना चावल किसी जाति की है। बल्कि, यह दोनो तो इसी देश का है। श्री राय ने कहा कि उपेंद्र कुशवाहा ने सबको साथ लेकर चलने की बात कही है। अब देश में जात की नहीं गोत्र की बात होनी चाहिए। लगे हाथ महागठबंधन पर निशाने साधते हुए भाजपा रनेताओं ने महागठबंधन को खिचड़ी बतातें हुए सवाल पूछ दिएं हैं कि यहां तो नेता का ही पता मालुम नहीं है।

 

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